मरीजों की जिंदगी बचाने का लिया संकल्प

बेसिक लाइफ सपोर्ट की ली ट्रेनिंग

By: Rakhi Hajela

Published: 07 Mar 2021, 06:29 PM IST


भारत के मुकाबले जर्मनी में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वाले मरीज लगभग ३५० गुणा अधिक सुरक्षित हैं, इसकी मुख्य वजह वहां प्राथमिक स्तर पर मिलने वाली ट्रोमा केयर हैं। हमारे देश में कमजोर नियम, अविकसित आपातकालीन सेवाओं आदि की वजह से हम ट्रोमा पेशेंट की उतनी अच्छी केयर नहीं दे पाते जितनी कि दी जानी चाहिए। भारत देश में ट्रोमा पेशेंट केयर को बढ़ाए जाने की सख्त आवश्यकता है। कुछ ऐसी ही बातें विशेषज्ञों ने रविवार को एपेक्स हाॅस्पिटल की ओर से बेसिक लाइफ सपोर्ट एवं ट्रोमा केयर पर पर जयपुर में आयोजित वर्कशॉप में कही। एपेक्स हॉस्पिटल के डॉ. शैलेश झंवर ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों में १४ से ४४ वर्ष के ९० प्रतिशत लोग होते हैं , जिन्हें यदि शुरुआती पहले एक घंटे में बेहतर केयर मिल जाए तो उन्हें बचा पाना आसान रहता है। इस मौके पर चिकित्सकों ने उपस्थित लोगों को बेसिक लाइफ सपोर्ट का प्रशिक्षण भी दिया, साथ ही क्विज का भी आयोजन किया गया तथा लोगों द्वारा ट्रोमा केयर से सम्बंधित सवाल भी पूछे गए जिनका जवाब मौके पर ही दिए गए। एपेक्स हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली ३० प्रतिशत मौतों का मुख्य कारण हेड इंजरी है, दुर्घटना होने पर पहला एक घंटा गोल्डन टाइम माना जाता है जिस दौरान यदि बेहतर उपचार मिल जाए तो मरीज को बचा पाना आसान रहता है। डॉ. ललित भारद्वाज द्वारा लोगों को ट्रोमा विषय पर टिप्स भी दिए गए। उपस्थित लोगों को सर्टिफिकेट भी दिए गए। इस मौके पर कमोबेश सभी प्रमुख अस्पतालों के नर्सिंग कर्मी तथा बीएससी नर्सिंग एवं अन्य नर्सिंग छात्रों ने उपस्थित होकर बेसिक लाइफ सपोर्ट के टिप्स लिए तथा मरीज को प्रारंभिक स्तर पर सबसे बेहतर इलाज देकर जान बचाने का संकल्प लिया। डाॅ. शैलेश झंवर ने बताया कि यदि मरीजों को बचाने की अवेयरनेस को चारों ओर तेजी से फैलाया जाए तथा बेसिक लाइफ सपोर्ट सिस्टम एवं ट्रोमा केयर को अच्छे से इम्पलीमेंट किया जाए तो सैकड़ों जानें बचाई जा सकती हैं।

Rakhi Hajela Desk
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