मोदी के कौन से सपने पर पड़ रही है तंगी की मार

मोदी के कौन से सपने पर पड़ रही है तंगी की मार
jaipur

Pawan kumar | Updated: 25 Jun 2018, 10:58:01 AM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

— राजस्थान के 5 स्मार्ट सिटीज को 7025 करोड़ में से मिले सिर्फ 928 करोड़
— पैसों की कमी के कारण 270 कार्यों में से सिर्फ 29 ही हुए, 241 काम अटके

जयपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का महत्वाकांक्षी स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पैसे की तंगी झेल रहा है। राजस्थान के जयपुर, उदयपुर, कोटा और अजमेर के लिए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का बजट 7,025 करोड़ रूपए के है। लेकिन अब तक मिले सिर्फ 928 करोड़ ही हैं। इसके चलते स्मार्ट सिटी के 270 कार्यों में से सिर्फ 29 कार्य ही पूरे हो पाए हैं। जबकि 241 कार्य पैसों की कमी से अटक गए हैं।

केन्द्र सरकार के स्मार्ट सिटी मिशन में चयनित प्रदेश के चारों शहरों के लिए कुल 7025 करोड़ रूपए का निवेश प्लान तैयार किया गया है। सबसे ज्यादा राजधानी जयपुर का 2,401 करोड़ रूपए का प्लान है। अजमेर का 1,947 करोड़ रूपए, उदयपुर का 1,221 करोड़ रूपए और कोटा का 1,456 करोड़ रूपए का है। चारों शहरों को 15 जून 2015 के बाद से अब तक 7025 करोड़ रूपए में से 928.8 करोड़ रूपए ही मिले हैं। इसमें से केन्द्र सरकार ने 579 करोड़ और राज्य सरकार ने 349.80 करोड़ रूपए दिए हैं। बाकी बची 6,097 करोड़ की राशि अभी मिलना बाकी है।

ये है अटके काम का गणित
राज्य के चारों शहरों के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में 7,025 करोड़ रूपए की लागत से 270 कार्य होने हैं। ढाई साल में इनमें से 154.29 करोड़ रूपए के सिर्फ 29 कार्य ही हो पाए हैं। जबकि 1114.91 करोड़ रुपए के 34 कार्य चल रहे हैं। वहीं, 2121.37 करोड़ रुपए के 61 कार्य निविदा के स्तर पर हैं। 793.49 करोड़ रुपए की लागत के 33 कार्यों की डीपीआर बनाई जा रही है। 2597.53 करोड़ रूपए की सबसे ज्यादा लागत वाले 113 कार्यों की अब तक डीपीआर ही नहीं बनी है।

ऐसे मिलता है स्मार्ट फंड
जयपुर, उदयपुर अजमेर एवं कोटा को चयनित किया गया है। परियोजना निधि में प्रत्येक शहर के लिए केन्द्र सरकार 500 करोड़ रूपए और राज्य सरकार (राज्य एवं निकाय) 500 करोड़ रूपए का योगदान करती है। इस तरह प्रत्येक शहर को सालाना 1,000 करोड़ रूपए देने का प्रावधान किया गया है। स्मार्ट योजना में प्रतिवर्ष केन्द्र सरकार 100 करोड़ रूपए और राज्य सरकार की ओर से 100 करोड़ रूपए प्रतिवर्ष का प्रावधान है। यदि प्रावधानों के हिसाब से फंड मिलता तो अब तक प्रदेश के चारों शहरों को 4,800 करोड़ रूपए मिल चुके होते।

ये है स्मार्ट शहरों की परिकल्पना
25 जून 2015 में लॉन्च किए गए स्मार्ट सिटी मिशन के तहत शहरों में पर्याप्त जलापूर्ति, 24 घंटे विद्युत आपूर्ति, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सहित सफाई, सक्षम शहरी गतिशीलता और सार्वजनिक परिवहन, गरीबों के लिए किफायती आवास, बेहतर आईटी कनेक्टिविटी और डिजीटेलाइजेशन, सुशासन, ई-गवर्नेंस और नागरिक भागीदारी, सुस्थिर पर्यावरण, स्वास्थ्य और शिक्षा, महिला एवं बच्चों और वृद्ध नागरिकों की सुरक्षा सहित अन्य कंपोनेंट शामिल है।

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