राजस्थान में यहां पीएम मोदी के 'सपने' की उड़ रही धज्जियां, सामने आया अफसरों का झूठ

राजस्थान में यहां पीएम मोदी के 'सपने' की उड़ रही धज्जियां, सामने आया अफसरों का झूठ

neha soni | Publish: Jan, 04 2019 03:35:40 PM (IST) | Updated: Jan, 04 2019 03:35:41 PM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

बिन पानी शौचालय बने स्टोर
हकीकत : नाम के लिए गांवों को घोषित कर दिया खुले में शौच मुक्त

जयपुर। स्वच्छ भारत मिशन अभियान के तहत प्रदेश में बनाए गए शौचालय पानी की व्यवस्था ना होने से घर के सामान-चारा रखने के स्टोर के रूप में काम लिए जा रहे हैं। राजस्थान पत्रिका ने इस अभियान की जमीनी हकीकत टटोली तो यह सच निकलकर सामने आया। अब सरकार प्रदेश में बनाए गए 79.31 लाख शौचालयों का सत्यापन कराएगी।

ओडीएफ घोषित, लेकिन हकीकत कुछ और...
भीलवाड़ा जिले में स्वच्छ भारत मिशन के तहत 4 लाख 96 हजार शौचालय बनाए गए है। जिले को पिछले साल ही ओडीएफ घोषित किया जा चुका है, लेकिन इन शौचालयों की जमीनी हकीकत कुछ और ही है। अधिकांश लोग शौचालयों का उपयोग नहीं कर रहे। इनका उपयोग भूसा या कबाड़ रखने के लिए किया जा रहा रहा है। कुछ लोगों ने इसे स्टोर भी बना दिया है।
पत्रिका टीम ने जमीनी हकीकत जानी तो कुछ शौचालयो में बकरीया बंधी हुई थी तो कहीं चारा भरा हुआ था। कई मकानों में बने शौचालय स्टोर रूम बना दिए गए और कहीं पर शौचालयों में ताले लगे मिले।

नहीं हो रहा शौचालयों का उपयोग
कोटा जिले में स्वच्छ भारत मिशन अभियान के तहत करीब सात हजार 300 शौचालय बनाए गए हैं। यूं तो यह लक्ष्य से काफी कम है, लेकिन शहर में कई जगहों पर शौचालयों का उपयोग नहीं हो रहा है। बस्तियों में कोई कबाड़ घर के रूप में तो कोई स्टोर के रूप में काम ले रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में भी कमोबेश यही स्थिति है, जबकि पिछले साल कोटा जिले को खुले में शौचमुक्त (ओडीएफ) घोषित कर दिया है।

भुगतान नहीं, काम अटके
नागौर में स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले में बने शौचालय केवल शो पीस बनकर रह गए हैं। कई मकानों में बने शौचालय स्टोर रूम बना दिए गए हैं। जिले की कई पंचायत समितियों में तो शौचालय निर्माण के लिए राशि का भुगतान नहीं होने से शौचालय आधे अधूरे पड़े हैं। जिले को खुले में शौच मुक्त घोषित किया जा चुका है।

पानी नहीं तो लगाए ताले
फलोदी नगरपालिका ने फलोदी शहर को खुले में शौच मुक्त घोषित करवाने की कवायद शुरू कर रखी है। इसके लिए शहर के सभी 30 वार्डों में करीब 700 घरों में
शौचालय बनवाए हैं। नगर पालिका द्वारा बनवाए गए शौचालयों का उपयोग लेने के लिए कई जगहों पर पानी की टंकियों का अभाव है तो कई शौचालयों पर पानी व मल निकासी सुविधा के अभाव में ताले लगे हुए है।

रुचि नहीं दिखाई
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में 79.31 लाख शौचालय बन गए। सरकार ने प्रत्येक के लिए 12 हजार का अनुदान भी दिया। लेकिन जो मकसद था, वह पूरा नहीं हुआ। प्रदेश के हर ग्राम स्तर पर एक सामुदायिक शौचालय का निर्माण होना था, लेकिन अब तक प्रदेश में एक हजार का ही निर्माण हो पाया है। जबकि प्रदेश में 42 हजार 869 ग्राम है। इसमें भी सरकार ने रुचि नहीं दिखाई है।

अब घरों के बाहर रंग दिखाएगा उपयोग हो रहा है या नहीं
इस बार सर्वे के लिए सरकार ने एक प्रपत्र दिया है। सर्वे दल की ओर से निरीक्षण के दौरान ही इस प्रपत्र के सभी कॉलमों को भरना आवश्यक किया है। इसमें तीन रंगों को चिन्हीकरण करने के भी आदेश दिए है। पहला जिन घरों में शौचालय का शत-प्रतिशत उपयोग हो रहा है, उसके आगे हरा रंग, जिन घरों में आंशिक उपयोग हो रहा है, उसके आगे पीला रंग तथा जिन घरों में उपयोग नहीं हो रहा है उसका कारण जानकर सूचीबद्ध करने के साथ ही लाल रंग भरना होगा।

अब यह करेगी सरकार
केंद्र सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत गांवों को खुले में शौचमुक्त बनाया है। अब इनका भौतिक सत्यापन होगा। इसके लिए प्रदेश के हर ग्राम पंचायत पर तीन कर्मचारी लगाए गए है। ये कर्मचारी प्रदेश के 79.31 लाख शौचालयों का सत्यापन करेंगे। टीम घर-घर जाकर यह सर्वे करेगी कि शौचालयों का उपयोग हो रहा या नहीं। यह काम 25 जनवरी तक चलेगा।

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