उप चुनाव में निकली भाजपा के दिग्गजों की "हवा", सताने लगी 2023 की चिंता

प्रदेश की तीन सीटों पर हुए उप चुनाव में भाजपा के दिग्गजों की "हवा" निकल गई है। पार्टी ने प्रदेश व केंद्रीय स्तर के नेताओं को उप चुनाव के रण में उतारा। मगर जनता ने सबको नकार दिया। ऐसे में पार्टी को हार की समीक्षा कर गलतियों को दूर करने की जरूरत है।

By: Umesh Sharma

Published: 03 May 2021, 07:12 PM IST

जयपुर।

प्रदेश की तीन सीटों पर हुए उप चुनाव में भाजपा के दिग्गजों की "हवा" निकल गई है। पार्टी ने प्रदेश व केंद्रीय स्तर के नेताओं को उप चुनाव के रण में उतारा। मगर जनता ने सबको नकार दिया। ऐसे में पार्टी को हार की समीक्षा कर गलतियों को दूर करने की जरूरत है। नहीं तो 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में जीत की राह भाजपा के लिए आसान नहीं होगी।

तीनों सीटों की बात की जाए तो प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां और उनकी टीम के ज्यादातर सदस्य प्रदेश की गहलोत सरकार के खिलाफ जनता के बीच माहौल बनाने में असफल नजर आए। बूथ लेवल तक पार्टी को मजबूत करने के बयान धरातल पर नहीं उतर पाया और उसी का खामियाजा पार्टी को उठाना पड़ा है। सबसे बड़ी बात है कि टिकट चयन में आखिर कहां चूक हुई जिसकी वजह से इतने बड़े अंतर से भाजपा को हार मिली है। इस हार के बाद एक बार फिर पूनियां विरोधी खेमा मुखर होने की उम्मीद जताई जा रही है, जो इस चुनाव से गायब नजर आया।

सहाड़ा में ये नेता रहे फेल

भाजपा को सबसे बड़ी हार सहाड़ा में मिली है। यहां कांग्रेस की गायत्री देवी 42 हजार से ज्यादा मतों से जीती है। खुद प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां प्रचार के आखिरी दो दिनों तक यहीं जमे रहे, इसके बाद भी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। पूनियां के अलावा यहां विधायक दल के सचेतक जोगेश्वर गर्ग और प्रदेश मंत्री श्रवण सिंह बगड़ी संगठन की तरफ से जिम्मेदारी संभाल रहे थे। भीलवाड़ा सांसद सुभाष महरिया, चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी और क्षेत्रीय विधायक विट्ठल शंकर भी यहां जीत की रणनीति बना रहे थे। केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी ने भी यहां कुछ एक चुनावी सभा और प्रचार किया था। इनके सबसे के बाद भी पार्टी की इतनी बड़ी हार सोच का विषय है।

सुजानगढ़ में राठौड़ नहीं कर पाए जादू

सुजानगढ़ सीट चूरू जिले में आती है और यहां से प्रतिपक्ष के उपनेता राजेंद्र राठौड़ विधायक हैं, लेकिन भजपा प्रत्याशी खेमाराम मेघवाल को 35,611 वोटों से हार मिली है। केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, स्थानीय सांसद राहुल कस्वां और उनके पिता के साथ भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने भी यहां चुनाव प्रचार किया। पूनियां का गृह जिला होने के बाद भी यहां की हार पार्टी नेताओं की समझ से परे हैं। वरिष्ठ नेता घनश्याम तिवाडी भी यहां प्रचार में आए थे।

जीते मगर घट गया जीत का अंतर

राजसमंद में पार्टी को जीत तो मिली, मगर जीत का अंतर महज 5300 के आसपा रहा है। जबकि 2018 के विधानसभा चुनाव में किरन माहेश्वरी को यहां 24 हजार से ज्यादा मतों से जीत मिली थी। इस सीट पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां के अलावा नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, सांसद और प्रदेश महामंत्री दीया कुमारी, प्रदेश महामंत्री मदन दिलावर, विधायक वासुदेव देवनानी और सुरेंद्र राठौड़ ने जिम्मेदारी संभाली थी। मगर जीत का अंतर कम रहना कई सवाल छोड़ गया है।

PM Narendra Modi
Umesh Sharma Reporting
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