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पोद्दार स्कूल : बिना एसएमडीसी से प्रस्ताव लिए वसूला विकास शुल्क

राजकीय राजा रामदेव पोद्दार उच्च माध्यमिक विद्यालय जिसे हाल ही में अंग्रेजी मीडियम में तब्दील किया गया है। यहां नियमों की अवहेलना करते हुए तकरीबन सवा दो सौ बच्चों से प्रति विद्यार्थी 2100 रुपए विकास शुल्क लिए जाने का मामला सामने आया है।

जयपुर

Updated: October 21, 2021 10:23:31 am

पोद्दार स्कूल : मनमानी बिना एसएमडीसी से प्रस्ताव लिए 200 से अधिक बच्चों से लिए प्रति विद्यार्थी 2100 रुपए
की गई नियमों की अवहेलना
कोविड काल में डाला अभिभावकों पर आर्थिक भार
राखी हजेला
जयपुर।
किसी भी स्कूल के सुचारू संचालन के लिए जरूरी है कि वहां के शिक्षक, संस्था प्रधान और अन्य कार्मिक नियमों के तहत काम करें जिससे बच्चों में अनुशासन की भावना जागृत हो लेकिन जब संस्था प्रधान ही नियमों के विपरित जाकर काम करे तो स्कूल का संचालन सुचारू कैसे होगा। मामला है राजधानी के राजकीय राजा रामदेव पोद्दार उच्च माध्यमिक विद्यालय का, जिसे हाल ही में अंग्रेजी मीडियम में तब्दील किया गया है। यहां नियमों की अवहेलना करते हुए तकरीबन सवा दो सौ बच्चों से प्रति विद्यार्थी 2100 रुपए विकास शुल्क लिए जाने का मामला सामने आया है। प्रिंसिपल रवि कुमार भारद्वाज ने मनमानी करते हुए नए एडमिशन लेने वाले इन बच्चों के अभिभावकों से 2100 रुपए प्रति विद्यार्थी शुल्क लिया, वह भी कोविड के उस दौर में जहां पहले से ही अभिभावकों पर आर्थिक भार पड़ रहा है।
पोद्दार स्कूल :   बिना एसएमडीसी से प्रस्ताव लिए वसूला विकास शुल्क
पोद्दार स्कूल : बिना एसएमडीसी से प्रस्ताव लिए वसूला विकास शुल्क
शिक्षकों के विरोध के बाद भी नहीं माने प्रिंसिपल
सूत्रों की माने तो स्कूल के अधिकांश शिक्षकों ने प्रिंसिपल के इस मनमाने निर्णय का विरोध किया। शिक्षकों का कहना था कि विद्यालय विकास प्रबंध समिति यानी एसएमडीसी के प्रस्ताव पारित करवाए बिना विद्यार्थियों से विकास शुल्क नहीं लिया जा सकता। एसएमडीसी ही यह निर्णय करती हैं कि विकास शुल्क के रूप में कितनी रकम नए एडमिशन लेने वाले विद्यार्थियों से ली जा सकती है, लेकिन प्रिंसिपल ने शिक्षकों की बात ही नहीं मानी।
पूर्व निदेशक से दोस्ती का दिया हवाला
पूर्व माध्यमिक शिक्षा निदेशक सौरभ स्वामी से अपने व्यक्तिगत संबंधों का हवाला देते हुए प्रिंसिपल रवि कुमार ने शिक्षकों से यहां तक कह दिया कि मैंने निदेशक से विकास शुल्क लिए जाने की स्वीकृति ले ली है जबकि वास्तव में जब प्रिंसिपल ने पूर्व निदेशक सौरभ स्वामी को इस संबंध में पत्र भेजा तो स्वामी ने भी उन्हें मनमाने तरीके से शुल्क लेने के स्थान पर नियमों के मुताबिक ही काम किए जाने की बात कही थी।
क्या है विद्यालय विकास प्रबंध समिति ?
गौरतलब है कि विद्यालय विकास प्रबंध समिति एक रजिस्टर्ड संस्था है। जिसका गठन हर स्कूल में होता है। स्कूल की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार और स्कूल विकास संबंधी सभी कार्य और प्रबंधन समिति के जरिए ही किए जाते हैं। यहां तक कि समसा से प्राप्त अनुदान, विकास शुल्क और अन्य मदों से प्राप्त होने वाली राशियों का लेनदेन, लेखा जोखा इस समिति के जरिए ही किया जाता है। समिति की बैठक में प्रस्ताव लाए बिना कोई काम नहीं किया जा सकता। इस समिति में संस्था प्रधान के साथ कुछ अभिभावक प्रतिनिधि, स्कूल के कुछ शिक्षकों के साथ ही शहरी निकाय के प्रतिनिधि, विद्यार्थी प्रतिनिधि, जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से मनोनीत अधिकारी, ऑडिट और वित्त विभाग के अधिकारी भी शामिल होते हैं। यह समिति ही तय करती है कि विद्यार्थी से यदि विकास शुल्क लेना है तो कितना लेना है।
देखने में आया है कि कई जगह संस्था प्रधान अपनी मनमानी करते हुए बिना एसएमडीसी से प्रस्ताव लिए विकास शुल्क तय कर देते हैं, ऐसे में बाद में उन्हें विरोध झेलना पड़ता है। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार के मामले सामने आते हैं।

इनका कहना है,
नए एडमिशन लेने वाले विद्यार्थियों से विकास शुल्क के रूप में 2100 रुपए प्रति विद्यार्थी लिए गए हैं। विद्यालय विकास प्रबंधन समिति की बैठक अभी नहीं हो सकी है इसलिए उनसे इस संबंध में स्वीकृति नहीं ली गई। 22 अक्टूबर को बैठक करने की योजना है, उसमें हम इसके लिए स्वीकृति लेंगे।
रवि कुमार भारद्वाज, प्रिंसिपल
राजकीय राजा रामदेव पोद्दार उच्च माध्यमिक विद्यालय स्कूल।
मेरी जानकारी में अभी ऐसा कोई मामला नहीं आया है। यदि किसी स्कूल में नियमों की अवहेलना करते हुए विकास शुल्क लिया जा रहा है तो इसकी जांच की जाएगी। एसएमडीसी से प्रस्ताव लिए बिना किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जा सकता। पहले एसएमडीसी से प्रस्ताव लिया जाना जरूरी होता है।
रवींद्र कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक

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