पुलिस ने मारपीट मामले में मेयर सौम्या गुर्जर के खिलाफ पेश किया चालान, हो सकती है सात साल सजा

हाईकोर्ट में चल रही थी सुनवाई, पुलिस ने जांच कर चालान किया पेश, सौम्या गुर्जर सहित चार पार्षदों के खिलाफ मारपीट और राजकार्य में बाधा के आरोप माने साबित

By: pushpendra shekhawat

Published: 15 Jun 2021, 09:50 PM IST

कमलेश अग्रवाल / जयपुर। निलंबित महापौर सौम्या गुर्जर सहित चार पार्षदों के खिलाफ दर्ज मामले में पुलिस ने कोर्ट में चालान पेश कर दिया है। पुलिस ने सौम्या गुर्जर के अलावा निलंबित पार्षद अजय चौहान, पारस जैन, शंकर शर्मा और पार्षद रामकिशोर प्रजापत के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 323, 341, 353 और 332 आईपीसी में आरोप साबित माने हैं। जिसमें अधिकतम सात साल तक सजा का प्रावधान है। पुलिस ने रिकार्ड दस दिन में चालान पेश किया है।

नगर निगम ग्रेटर की महापौर सौम्या गुर्जर ने रूम में सफाई के मुद्दे पर 4 जून को बैठक हुई थी। इस बैठक के बाद निगम आयुक्त यज्ञमित्र देव सिंह ने महापौर और कुछ पार्षदों पर मारपीट, दुर्रव्यवहार और काम में बाधा पहुंचाने के आरोप लगाए थे। इस संबंध में पुलिस थाना ज्योतिनगर में एफआईआर भी दर्ज हुई थी।

मामले की जांच के बाद थाना पुलिस ने जयपुर महानगर मजिस्ट्रेट की कोर्ट में सोमवार को चालान पेश कर दिया। पुलिस ने महापौर सहित चार पार्षदों पर मारपीट के साथ ही राजकार्य में बाधा के आरोप को सही माना है। पुलिस ने चालान में कार्यालय स्टाफ के बयान सहित अन्य दस्तावेज पेश किए।

अधिकतम सात साल तक सजा

विधि के जानकारों के अनुसार, राजकार्य में बाधा के लिए आईपीसी की धारा 332 और 353 में सात साल तक सजा का प्रावधान है। इसी के साथ 323 व 341 आईपीसी में एक साल तक सजा एवं जुर्माने का प्रावधान है।

एक ओर सुनवाई दूसरी ओर चालान

मामला दर्ज होने के बाद राज्य सरकार ने छह जून को महापौर सौम्या गुर्जर और तीन पार्षदों को निलंबित कर दिया था। जिसको महापौर ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट में 14 जून तक मामले पर सुनवाई की और फैसला सुरक्षित रखा हुआ है और पुलिस ने भी मामले में जांच पूरी कर चालान पेश कर दिया।

pushpendra shekhawat Desk
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