देश में सिर्फ 6 प्रतिशत पुलिस वालों को मिलती है दोबारा ट्रेनिंग

देश में सिर्फ 6 प्रतिशत पुलिस वालों को मिलती है दोबारा ट्रेनिंग
देश में सिर्फ 6 प्रतिशत पुलिस वालों को मिलती है दोबारा ट्रेनिंग

Dhairya Kumar Mishra | Publish: Oct, 12 2019 12:41:19 AM (IST) | Updated: Oct, 12 2019 12:41:20 AM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

पुलिस के काम के तरीके को बेहतर करने को लेकर सरकारें कितनी सतर्क हैं, इसका अंदाजा इससे चल जाता है कि देश भर में सिर्फ छह फीसदी पुलिस वालों को ही पूरे करियर में दोबारा प्रशिक्षण मिलता है।

नई दिल्ली. पुलिस के काम के तरीके को बेहतर करने को लेकर सरकारें कितनी सतर्क हैं, इसका अंदाजा इससे चल जाता है कि देश भर में सिर्फ छह फीसदी पुलिस वालों को ही पूरे करियर में दोबारा प्रशिक्षण मिलता है।
बड़े अधिकारियों में तो फिर भी प्रशिक्षण पाने वालों का औसत थोड़ा बेहतर है, लेकिन कांस्टेबल स्तर पर तो यह नगण्य है। गुजरात जैसे विकसित कहे जाने वाले राज्य में महज एक प्रतिशत पुलिसवालों को प्रशिक्षण मिलता है और कांस्टेबल स्तर पर यहां यह औसत सिर्फ 0.4 प्रतिशत है। राजस्थान में 4.1 प्रतिशत पुलिस वालों को दोबारा ट्रेनिंग दी जाती है। राज्य में सिर्फ कांस्टेबल स्तर के पुलिस वालों को लें तो यह औसत महज 2.8 है। इस लिहाज से हरियाणा और तमिलनाडु की स्थिति थोड़ी बेहतर पाई गई है। इन राज्यों में भी हर पांच में से एक पुलिस वाले को ही दोबारा प्रशिक्षण मिलता है। यह जानकारी कॉमन कोज की ओर से तैयार की गई हाल की एक रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट में सरकारी आंकड़ों का उपयोग किया गया है।

राज्य घटा रहे खर्च
पुलिस प्रशिक्षण पर ज्यादातर राज्य पर्याप्त धन खर्च नहीं करते। सबसे ज्यादा चिंता की बात है कि अधिकांश राज्य इस पर खर्च बढ़ाने की बजाय घटा रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर पुलिस पर होने वाले खर्च का सिर्फ १त्न ही प्रशिक्षण पर खर्च किया गया। अध्ययन में शामिल 22 में से 15 राज्यों में यह खर्च घट रहा है।

ढांचागत सुविधाएं हों
राज्यों को प्रशिक्षण के लिए जरूरी सुविधाएं तैयार करने पर ध्यान देना होगा। इसके लिए ट्रेनिंग संस्थान तैयार करने, उनमें सीटें बढ़ाने, शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर देना होगा। ढांचागत सुविधाओं को लगातार बेहतर करते रहना होगा। पर्याप्त धन उपलब्ध करवाना भी जरूरी है।

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