scriptPolitical crisis came on Gehlot government 2 years ago | 2 साल पहले आज ही के दिन गहलोत सरकार पर आया था सियासी संकट, 35 दिन बाड़ेबंदी में रही सरकार | Patrika News

2 साल पहले आज ही के दिन गहलोत सरकार पर आया था सियासी संकट, 35 दिन बाड़ेबंदी में रही सरकार

-12 जुलाई 2020 को सचिन पायलट कैंप ने 30 विधायकों के समर्थन का दावा करते हुए गहलोत सरकार के अल्पमत में होने की बात कही थी, 14 अगस्त को विधानसभा के विशेष सत्र में गहलोत सरकार ने साबित किया था बहुमत, 2 साल से सचिन पायलट को है सत्ता और संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिलने का इंतजार, दो साल के बाद गहलोत-पायलट कैंप के बीच कम नहीं हुई दूरियां

जयपुर

Published: July 12, 2022 11:02:09 am

फिरोज सैफी/जयपुर।

राजस्थान की राजनीति में भूचाल ला देने वाले सियासी संकट को आज पूरे 2 साल हो गए हैं। आज ही के दिन 12 जुलाई 2020 को सचिन पायलट कैंप ने बगावत करके गहलोत सरकार को संकट में डाल दिया था। सरकार 35 दिनों तक बाड़ेबंदी में रही और उसके बाद विधानसभा में बहुमत भी साबित किया।

ashok gehlot
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कांग्रेस आलाकमान ने दोनों खेमों के बीच दूरियां कम करने की कोशिश भी की लेकिन आज भी गहलोत और पायलट कैंप के बीच जुबानी जंग जारी है और सबसे बड़ी बात तो यह है कि पूरे 2 साल के बाद भी सचिन पायलट को सत्ता और संगठन में बड़ी भूमिका का इंतजार है।

सरकार पर सियासी संकट को भले ही 2 साल का समय बीत गया हो लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के मन में आज भी उसकी टीस बाकी है। यही वजह है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कई बार सार्वजनिक मंचों पर भी सरकार गिराने की साजिशों में अपने ही लोगों के शामिल होने के बयान भी देते आए हैं।


12 जुलाई 2020 को सचिन पायलट ने किया था गहलोत सरकार के अल्पमत में होने का दावा
आज ही के दिन सचिन पायलट कैंप ने 30 विधायकों के समर्थन का दावा करते हुए गहलोत सरकार के अल्पमत में होने की बात कही थी, जिसके बाद 13 जुलाई को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने आवास पर विधायक दल की बैठक बुलाई थी लेकिन पायलट समर्थक विधायक बैठक में नहीं पहुंचे और उसके बाद तत्कालीन प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत विधायकों को लेकर दिल्ली रोड स्थित एक होटल में चले गए थे।


12 जुलाई को ही बगावत करने वाले विधायकों के खिलाफ दर्ज हुए हुए मुकदमे
इधर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से आज ही के दिन बगावत करने वाले विधायकों के खिलाफ राजद्रोह सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए थे। यही नहीं, इन विधायकों के घरों पर भी नोटिस चस्पा किए गए थे। विधानसभा में मुख्य सचेतक महेश जोशी ने सरकार गिराने की साजिशों को लेकर एसओजी में भी मुकदमे दर्ज करवाए थे। कई दिनों एसओजी दिल्ली और मानसेर के चक्कर भी काटती रही।


14 जुलाई को सचिन पायलट सहित तीन मंत्रियों को किया गया था बर्खास्त
14 जुलाई 2020 को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के तमाम विधायक कूकस स्थित एक लग्जरी होटल में रुके हुए थे और यहीं पर आलाकमान की ओर से भेजे गए पर्यवेक्षक रणदीप सिंह सुरजेवाला, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, तत्कालीन प्रदेश प्रभारी अजय माकन सहित कई अन्य नेताओं ने फिर से होटल में ही विधायक दल की बैठक बुलाई थी और दावा किया था कि पायलट कैंप के लोग बैठक में शामिल होंगे लेकिन तब भी सचिन पायलट से जुड़े विधायक बैठक में शामिल नहीं हुए।

उसके बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ,पर्यवेक्षक रणदीप सिंह सुरजेवाला ने आलाकमान से बात की और सचिन पायलट सहित तीन मंत्रियों को बर्खास्त करने का फैसला लिया गया। होटल से बाहर आकर रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सचिन पायलट को पीसीसी अध्यक्ष और डिप्टी सीएम के पद से बर्खास्त करने की घोषणा की।

साथ ही रमेश मीणा और विश्वेंद्र सिंह को भी कैबिनेट से बर्खास्त किया गया। इसके अलावा सचिन पायलट के समर्थक विधायक मुकेश भाकर को यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष पद से बर्खास्त किया गया और राकेश पारीक को सेवादल के अध्यक्ष पद से बर्खास्त किया गया। अभिमन्यू पुनिया को एनएसयूआई के अध्यक्ष पद से बर्खास्त किया गया।


डोटासरा को मिली पीसीसी की कमान
वहीं जहां सचिन पायलट को पीसीसी अध्यक्ष पद से बर्खास्त करने की घोषणा के साथ ही कांग्रेस पर्यवेक्षक रणदीप सिंह सुरजेवाला ने आलाकमान के निर्देश पर तत्कालीन शिक्षा राज्य मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा को प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष नियुक्त करने की घोषणा की।

साथ ही युवा कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर गहलोत समर्थक विधायक गणेश घोगरा को नियुक्त किया गया। सेवादल के अध्यक्ष पद पर हेम सिंह शेखावत और एनएसयूआई के अध्यक्ष पद पर अभिषेक चौधरी को नियुक्त किया गया।


पायलट को कहा, निकम्मा-नकारा
सरकार पर है सियासी संकट से नाराज मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का पहली बार उग्र रूप भी दिखाई दिया था। जब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मीडिया के सामने सचिन पायलट को निकम्मा और नाकारा करार दिया था मुख्यमंत्री के इस बयान की देश भर में चर्चा हुई थी और आज भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कई बार निकम्मा शब्द को दोहरा चुके हैं।


जयपुर के बाद जैसलमेर में हुई बाडे़बंदी
सियासी संकट के दौरान ही जयपुर के बाद गहलोत समर्थक विधायकों और कांग्रेस विधायकों को विशेष विमान से जैसलमेर भी ले जाया गया, जहां भी करीब 1 सप्ताह तक बाड़ेबंदी में रहे। इस दौरान बकरी ईद और रक्षाबंधन का पर्व भी विधायकों ने बाड़ेबंदी में ही मनाया।


पायलट कैंप के तीन विधायक लौट आए थे जयपुर
सचिन पायलट के विश्वस्त माने जाने वाले कांग्रेस विधायक रोहित बोहरा, दानिश अबरार और चेतन डूडी पायलट कैंप का साथ छोड़कर जयपुर लौट आए थे और गहलोत कैंप में शामिल हो गए थे।


सरकार और राजभवन के बीच भी टकराव
इसी बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से विधानसभा का विशेष सत्र बुलाए जाने को लेकर भी राजभवन और सरकार के बीच टकराव हुआ था। सरकार की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को राजभवन ने दो बार वापस लौटा दिया था, जिसके बाद सीएम गहलोत तमाम विधायकों के साथ राजभवन का घेराव करने पहुंच गए थे।


प्रियंका गांधी ने निभाई बड़ी भूमिका
वहीं दूसरी ओर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने इस पूरे सियासी संकट के दौरान बड़ी भूमिका निभाई थी। सचिन पायलट कैंप के नेताओं को मनाने और उनकी बात सुनने के बाद उनकी मांगों का समाधान करने का भी आश्वासन दिया गया था। जिसके बाद पायलट कैंप जयपुर लौटा था और कांग्रेस के ही साथ रहने का दावा किया था।


विधानसभा में साबित किया बहुमत
वहीं गहलोत सरकार के अल्पमत में होने का दावा करते हुए बीजेपी विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई थी, जिसके बाद 14 अगस्त को विशेष सत्र बुलाया गया था और सीएम गहलोत ने सचिन पायलट कैंप के जयपुर लौटने के बाद विधानसभा में विश्वास मत हासिल किया था। सरकार के समर्थन में 126 वोट पड़े थे।

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