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Polluted River : देश की 351 नादियां का पानी हाथ धोने लायक भी नहीं

देश की हर चार में से तीन नदी उच्च स्तर पर प्रदूषण का शिकार हैं। इनमें बड़ी मात्रा में हेवी टॉक्सिक मटीरियल मिले हैं, जिनमें लेड, आयरन, निकल, आर्सेनिक, क्रोमियम व कॉपर शामिल हैं। यह भी उन जगहों पर, जहां पर इनकी पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए स्टेशन बनाए गए हैं। गंगा पर बनाए गए 33 केंद्रों में से 10 पर प्रदूषण का स्तर मानक से कहीं ज्यादा दिखाई दिया।

जयपुर

Published: June 09, 2022 05:30:09 pm

देश की हर चार में से तीन नदी उच्च स्तर पर प्रदूषण का शिकार हैं। इनमें बड़ी मात्रा में हेवी टॉक्सिक मटीरियल मिले हैं, जिनमें लेड, आयरन, निकल, आर्सेनिक, क्रोमियम व कॉपर शामिल हैं। यह भी उन जगहों पर, जहां पर इनकी पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए स्टेशन बनाए गए हैं। गंगा पर बनाए गए 33 केंद्रों में से 10 पर प्रदूषण का स्तर मानक से कहीं ज्यादा दिखाई दिया।
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सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायर्नमेंट की रिपोर्ट कहती है कि देशभर में नदियों के पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए 764 क्वालिटी स्टेशन बनाए हैं। 2018 से 2020 के बीच 688 सेंटर पर पानी में मात्रा से ज्यादा हेवी टॉक्सिक मटीरियल मिले। यही नहीं, 21 राज्यों के 239 सेंटर पर कोलीफॉर्म की मात्रा ज्यादा मिली, जबकि 88 केंद्र्रों पर जैव रासायनिक ऑक्सीजन की मांग अधिक थी।
सबसे खराब हालत में गंगा और यमुना
प्रदूषण बोर्ड के आंकड़े कहते हैं कि गंगा में 80% प्रदूषण सीवेज का पानी छोड़े जाने से हो रहा है। गंगा सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश के कानपुर और वाराणसी में प्रदूषण का शिकार होती है। यमुना दिल्ली के महज दो फीसदी हिस्से को छूती है, पर उसमें 80% प्रदूषण वहीं से होता है। 22 किमी के दायरे में फैली यमुना में दिल्ली के 40 से ज्यादा नालों का पानी आता है। दिल्ली सरकार अब तक 200 करोड़ और केंद्र सरकार 1500 करोड़ से ज्यादा की राशि खर्च कर चुकी है।
नदियों में सीवेज रोकने पर नियंत्रण नहीं
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार देश की 351 नदियां प्रदूषण का शिकार हैं। इनका पानी आचमन के लायक भी नहीं है। अगर आप इसको पीते हैं तो बीमार होने की आशंका है। इन नदियों में प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह सीवेज ही है। महाराष्ट्र की 53 नदियां प्रदूषित हैं। इसके साथ ही यह राज्य देश में नंबर एक पर है। असम 44 प्रदूषित नदियों के साथ दूसरे और मध्यप्रदेश 22 प्रदूषित नदियों के साथ तीसरे नंबर पर है। उत्तराखंड की नौ नदियां प्रदूषण का शिकार हैं।

देश की पांच सबसे प्रदूषित नदियां
गंगा

यमुना

ब्रह्मपुत्र

दामोदर

बागमती (कोसी)

हजारों करोड़ हुए खर्च, फिर भी सीवेज का पानी
2019 में लोकसभा में एक जवाब में सरकार ने कहा था कि राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना के तहत अब तक 16 राज्यों के 77 शहरों में 34 नदियों के प्रदूषित हिस्से को कवर किया है। इसके लिए 5,870.54 करोड़ बजट भी दिया गया। बावजूद इसके रिपोर्ट ने साफ कर दिया कि नदियों में अभी भी सीवेज सीधे मिल रहा है।
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Anand Mani Tripathi

आनंद मणि त्रिपाठी (@aanandmani) राजनीति, अपराध, विदेश, रक्षा एवं सामरिक मामलों के पत्रकार हैं। पत्रकारिता के तीनों माध्यम प्रिंट, टीवी और आनलाइन में गहरा और अपनी तेज तर्रार रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। पश्चिम बंगाल के कलकत्ता में जन्म हुआ। प्रारंभिक शिक्षा उत्तर प्रदेश के कानपुर और बस्ती में हुई। माध्यमिक शिक्षा नवोदय विद्यालय बस्ती, फैजाबाद और पूर्वोत्तर त्रिपुरा के धलाई जिले में हुई। अयोध्या के साकेत महाविद्यालय से स्नातक और 2009 में जेआईआईएमसी,दिल्ली से पत्रकारिता का डिप्लोमा किया। हरियाणा से पत्रकारिता आरंभ की। शिक्षा, विज्ञान, मौसम, रेलवे, प्रशासन, कृषि विभाग और मंत्रालय की रिपोर्टिंग की। इंवेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग से शिक्षा और रेलवे विभाग के कई भ्रष्टाचार का खुलासा किया। रक्षा मंत्रालय के रक्षा संवाददाता पाठयक्रम-2016 पूरा किया। इसके बाद रक्षा मामलों की पत्रकारिता शुरू कर दी। चीन, पाकिस्तान और कश्मीर मामलों पर तीक्ष्ण नजर रहती है। लेफ्टिनेंट उमर फैयाज की हत्या 2017, राइफलमैन औरंगजेब की हत्या 2018, जम्मू—कश्मीर में बदले 2018 में बदले राजनीतिक समीकरण, पुलवामा हमला 2019, कश्मीर से 370 का हटना, गलवान घाटी मुठभेड़ 2020 को बेहद करीब से जम्मू और कश्मीर में रहकर ही कवर किया। कोरोना काल 2020 में भी लददाख से नेपाल तक की यात्रा चीन के बदलते समीकरण को लेकर की। इसके साथ ही लोकसभा चुनाव 2019 में जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पंजाब की रिपोर्टिंग की। 9 नवंबर 2019 को श्रीराम जन्म भूमि अयोध्या मामले में आए फैसले की अयोध्या से कवर किया। 2022 उत्तरप्रदेश् चुनाव को सहारनपुर से सोनभद्र तक मोटर साइकिल के माध्यम से कवर किया। पत्रकारिता से इतर आनंद मणि त्रिपाठी को संगीत और पर्यटन का जबरदस्त शौक है। इन्हें किसी भी कार्य में असंभव शब्द न प्रयोग करने के लिए जाना जाता है...

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