Fire Incident : Jaipur में भी Delhi जैसा 'Denger'

-जयपुर में लचर है अग्निशमन इंतजाम
- 30 लाख की आबादी वाले शहर में है सिर्फ 47 दमकल गाड़ियां

By: Pawan kumar

Published: 08 Dec 2019, 01:07 PM IST

जयपुर। राजधानी दिल्ली में एक चार मंजिला भवन में आग लगने से 40 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और कई लोग झुलस गए। दिल्ली के तंगगलियों और भीड़भाड़ वाले इलाके में फायर फाइटिंग के इंतजामों की एक बार फिर से पोल खुल गई। कुछ ऐसे ही हालात राजधानी जयपुर के चारदीवारी वाले इलाक में है। जहां पर तंग गलियों और रास्तों के आवासीय भवनों में गुपचुप तरीके से औद्योगिक श्रेणी के काम चलते हैं। ऐसे में जयपुर के भीड़भाड़ वाले इलाके में अग्नि हादसों से निपटने के इंतजामात भी लचर ही है।

जयपुर हेरिटेज सिटी की चारदीवारी में बनी चार से पांच मंजिला आवासीय भवनों में कॉमर्शियल गतिविधियां धड़ल्ले से चल रही है। घरों के भीतर नगीना कारीगरी, बोटलिंग, लाख की चूड़ी बनाने और वेल्डिंग का काम होता है। आग की मदद से होने वाले कामों में हादसे का डर बना रहता है। साथ ही चारदीवारी की तंग गलियों में बिजली के खुले तार हादसों को न्यौता दे रहे हैं। चारदीवारी की गलियों की हालत यह है कि अगर सामने से एक वाहन आ जाए तो पैदल आदमी भी बमुश्किल वहां से निकल सकता है। रही सही कसर दुकानदार पूरी कर रहे हैं। दुकानदारों के सामान ने सड़क के एक हिस्से पर कब्जा जमा रखा है। इन गलियों में बिजली के तार झूल रहे है जो कि कभी हादसे को जन्म दे सकते है। शहर में पिछले दिनों लगी आग की घटना के बाद भी नगर निगम ने सबक नहीं लिया है। सदर थाना इलाके में एक आवास में व्यवसायिक गोदाम चल रहा था। आग लगने से कई लोगों की जान सांसत में आग गई। कैमिकल का दरिया सड़क पर बह निकला था इससे आग भी पूरी सड़क पर फैल गई थी। दमकल विभाग ने बमुश्किल आग पर काबू पाया था।

जयपुर में अग्निशमन विभाग संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। अग्निशमन विभाग के शहर में ग्यारह फायर स्टेशन है और 47 दमकल और 20 मोटरबाइक फायर फाइटर है। इसके अलावा एक हाइड्रोलिंग लैंडर भी है। वर्तमान में चौगान स्टेडियम व जगतपुरा में फायर स्टेशन का निर्माण किया जा रहा है। पचास हजार की आबादी पर एक फायर स्टेशन होना चाहिए । जबकि तीन लाख की आबादी वाले जयपुर शहर में केवल ग्यारह फायर स्टेशन ही है। वर्तमान जनसंख्या के हिसाब से जयपुर शहर में करीब 22 फायर स्टेशन और 100 गाड़ियों की आवश्यकता है। जयपुर की तंग गलियों के लिए छोटी गाड़ियों की आवश्यकता है। स्टैण्डर्ड नियम यह है कि आग की सूचना मिलने के 5 मिनट के अंतराल में दमकल मौके पर पहुंचनी चाहिए। लेकिन आग लगने के आधा घंटे बाद ही दमकल मौके पर पहुंच पाती है। इसकी वजह जयपुर शहर का यातायात और तंग रास्ते भी एक वजह है।

कब—कब हुए अग्नि हादसे
-टोंक रोड पर रूफ टॉफ में आग, धमाके के साथ सिलेण्डर फटा, रूफ टॉफ की छत उड़ी, पांचवीं मंजिल पर चल रहा था , रामबाग चौराहे के पास की घटना
-राजधानी जयपुर में रेलवे स्टेशन के पास कालवाड़ स्कीम गोपालबाड़ी में कैमिकल गोदाम में आग, कैमिकल बहा, सड़क की गलियों में लगी थी आग, 6 वाहन और 8 दुकानें आग की चपेट में आई थी,कई लोगों की जान आई थी सांसत में
-जनवरी 2019 में अम्बाबाडी में आग में रणजी प्लेयर संजीव और उनका श्वान जिंदा जल गए
— नवम्बर 2019 आग लगने से एक व्यक्ति हरमाडा में जिंदा जल गया था
— विद्याधर नगर में जनवरी 2018 को हुए अग्निकांड में एक ही परिवार के 5 लोगों की जान चली गई थी

Pawan kumar
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