सुधरने की बजाय बिगड़ गई बिजली की व्यवस्था

-जिन शहरों में निजी हाथों में है विद्युत वितरण का काम, वहां और बुरी स्थिति

जयपुर. विधानसभा सत्र के शून्यकाल में शुक्रवार को निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा ने बिजली की अव्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राजस्थान राज्य विद्युत मंडल का विखंडन करने के साथ विद्युत सुधार लागू हुआ तो लगा था कि विद्युत व्यवस्था पटरी पर लौट आएगी, लेकिन दो दशक बीत जाने के बाद विद्युत व्यवस्था सुधरने की बजाय बिगड़ गई।
वितरण के क्षेत्र जयपुर, अजमेर और जोधपुर में तीन कम्पनियों का निर्माण किया गया , लेकिन दो दशक का अनुभव अच्छा नहीं रहा। रही सही कसर पिछली सरकार ने अजमेर, कोटा, भरतपुर और बीकानेर में विद्युत वितरण का काम निजी कम्पनियों को सौंपकर पूरा कर दिया। पिछली सरकार ने बिना किसी को विश्वास में लिए निजी कम्पनियों को वितरण का काम 20-20 वर्षों के लिए सौंप दिया। उपभोक्ताओं का बिल एक हजार की जगह चार हजार रुपए हो गया। 2018 में कोटा में तो स्मार्ट मीटर लगाए जाने का विरोध हुआ, उसके बाद स्मार्ट मीटर लगना बंद हुए। इनता सब कुछ होने के बाद भी न तो पिछली सरकार ने कोई ध्यान दिया और न ही मौजूदा सरकार कोई ध्यान दे रही है।
सदन को लोढ़ा ने बताया कि जयपुर डिस्कॉम से निजी कम्पनियां एक लाख यूनिट बिजली खरीद रही हैं और उपभोक्ताओं को तीन लाख यूनिट का बिल सौंप रही हैं। उपभोक्ताओं से ज्यादा वसूली हो रही है और सरकार इन कम्पनियों की ऑडिट तक नहीं करवा रही है।

Ashwani Kumar Reporting
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