किसानों को बुरे वक्त में इस योजना से मिलेगी राहत

Pradhan mantri fasal bima yojana : कड़ी मेहनत से अन्न उपजाने वाले किसानों की परेशानी उस समय बढ़ जाती है, जब असमय मौसम की मार से उनकी फसल चौपट हो जाती है।

 

By: Ashish

Published: 27 Nov 2019, 06:18 PM IST

Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

जयपुर

Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana : कड़ी मेहनत से अन्न उपजाने वाले किसानों की परेशानी उस समय बढ़ जाती है, जब असमय मौसम की मार से उनकी फसल चौपट हो जाती है। हाल ही में राजस्थान के कई जिलों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसलों में खराबा हुआ है। इन स्थितियों में प्राकृतिक आपदा से किसानों की कमर टूट जाती है। लेकिन अगर किसान चाहें तो फसल खराब होने वाले बुरे वक्त में उन्हें राहत मिल सकती है। किसानों को यह राहत मिल सकती है प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत। रबी सीजन की फसलों के लिए फसल बीमा की अधिसूचना जारी कर दी गई है। किसान फसल खराबे के नुकसान से राहत पाने के लिए इस योजना के तहत अपनी फसल का बीमा कवर करवा सकते हैं। देखिए हमारी यह रिपोर्ट

दरअसल, कृषि विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक रबी सीजन की गेहूं, चना, मसूर, सरसों, धनिया समेत अन्य अधिसूचित फसलों को फसल बीमा योजना के दायरे में रखा गया है। किसान 31 दिसंबर तक फसल बीमा के लिए आवेदन कर सकते हैं। खास बात यह है कि जिन किसानों ने बैंकों से फसली ऋण ले रखा है, उन किसानों को बीमा अनिवार्य रूप से करवाने के निर्देश सरकार ने दिए हैं। लेकिन जिन किसानों ने फसली ऋण नहीं ले रखा है, ऐसे किसान भी इस योजना के तहत फसल बीमा करवा सकते हैं। ऐसे किसानों को भी इस योजना में बीमा कवर करवाने पर क्लेम मिल सकेगा।

ये किसान योजना के लिए पात्र
रबी सीजन की फसल बीमा अधिसूचना के मुताबिक फसली ऋणी लेने वाले किसान के साथ ही गैरऋणी किसान, बटाईदार किसानों की फसल का बीमा करवाया जा सकता है। अधिसूचना में बैंक से ऋण लेने वाले किसानों के लिए फसल बीमा करवाना अनिवार्य किया गया है, जबकि गैरऋण किसानों के लिए स्वैच्छिक रखा गया है। फसल बीमा के लिए किसानों को अपना आधार नंबर भी देना होगा। तभी जाकर किसान इस योजना से जुड़ सकते हैं। किसान फसल परिवर्तन की सूचना 30 दिसंबर तक संबंधित बैंक शाखा को दे सकते हैं। अधिसूचित फसलों का बीमा करवाने के लिए प्रति हैक्टेयर के हिसाब से प्रीमियम राशि तय की गई है।

इन स्थितियों में मिलेगा क्लेम
आपको बता दें कि किसानों को निर्धारित परिस्थितियों में फसल खराबा होने पर ही क्लेम का भुगतान बीमा कंपनियों की ओर से किया जाएगा। कम वर्षा या फिर प्रतिकूल मौसमीय परिस्थितियों से बुवाई नहीं होने की स्थिति, खड़ी फसल बुवाई से कटाई तक में सूखा, लम्बी सूखा अवधि, बाढ़, जल प्लावन, कीट एवं व्याधि, भू-स्खलन, प्राकृतिक आग एवं बिजली का गिरना, तूफान, ओलावृष्टि, चक्रवात, आंधी, समुद्री तूफान, भंवर एवं फसल कटाई प्रयोगों से प्राप्त उपज आंकड़ों के आधार पर, फसल कटाई उपरान्त सूखने के लिए खेत में काटकर फैलाकर छोड़ी गई फसल को चक्रवात, चक्रवाती वर्षा, असामयिक वर्षा तथा ओलावृष्टि से होने वाले नुकसान के लिए कटाई उपरान्त अधिकतम 2 सप्ताह की अवधि के लिए, अधिसूचित क्षेत्र के आंशिक कृृषि भूमि क्षेत्र में ओलावृष्टि, भू-स्खलन, बादल फटना, प्राकृतिक आपदाए एवं जल प्लावन से व्यक्तिगत आधार पर हुए नुकसान शामिल किया गया है।

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