वित्र की नमाज जरूरी

जयपुर. वित्र की नमाज जरूरी है, इसका दर्जा फर्ज से करीब है। इशा के फर्ज के बाद वित्र का वक्त है।

By: Rajkumar Sharma

Published: 05 May 2020, 12:02 PM IST

मुफ्ती ए शहर मो. जाकिर नोमानी ने बताया कि हदीस में है कि जो शख्स वित्र न पढ़े, वो हम में से नहीं है। रमजानुल मुबारक में वित्र की नमाज जमात के साथ अदा करना अफजल व बेहतर है। ऐसा जरूरी नहीं है कि जो तरावीह पढ़ाए, वही वित्र पढ़ाए। हजरत उमर रजि. इशा के फर्ज और आखिर में वित्र पढ़ाते थे। हजरत उबई बिन काअब रजि. तरावीह पढ़ाते थे।
रोजा इफ्तार और सहरी का वक्त
इफ्तार सहरी
मंगलवार शाम बुधवार सुबह
मुफ्ती-ए-शहर 7.02 4.15
जामा मस्जिद 7.05 4.10
दारुल उलूम रजविया 7.05 4.14
शिया इस्ना अशरी 7.16 4. 09
बच्चों ने भी रखा रोजा
जगतपुरा, इंदिरा गांधी नगर सेक्टर 1 निवासी छह वर्षीय आतिफ आजाद भी रोजा रख रहे हैं। पिता रकीब आजाद ने बताया कि आतिफ परिजनों से पाक महीने रमजान से जुड़े सवाल पूछकर जिज्ञासा भी शांत कर रहे हैं। शास्त्री नगर निवासी रियान बनेठी ने रोजा रखा है।
उधर, जालूपुरा निवासी 12 वर्षीय अमान खान ने भी जीवन का पहला रोज़ा रखा। दादी खैरून निशा ने दुआ पढ़ा कर रोजा इफ्तार कराया।

Rajkumar Sharma Desk
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