पैरोल और अंतरिम जमानत पर बंदियों की रिहाई तैयारी

बंदियों की सूची तैयार, पहली बार के अपराधियों को मिलेगी राहत

जयपुर।

राजस्थान की जेलों में बंद कैदियों की स्क्रीनिंग करने के बाद सूचियां तैयार की जा रही है। अब तक 1328 बंदियों को चिंहिंत किया गया है। इनमें 1211 विचाराधीन और 117 सजायाप्ता है। इसी के साथ बीमार और पैरोल योग्य बंदियों की अलग से सूची तैयार की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना में सूचियां तैयार की जा रही है सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्वप्रेरित याचिका पर सुनवाई के बाद एक उच्चस्तरीय कमेटी को इस पर विचार करने का आदेश दिया था।

कारागार में कोरोना वायरस का संक्रमण नही फैले इसके लिए बंदियों को अंतरिम जमानत और पैरोल पर रिहा किया जाएगा। इसके लिए मजिस्ट्रेट ट्रायल वाले बंदियों को चिंहिंत किया गया है। इनमें वे कैदी शामिल है जो पहली बार किसी अपराध में जेल आएं और उनका अब तक का व्यवहार ठीक रहा है। इस आधार पर करीबन 1328 बंदियों की सूची तैयार की गई है। इन बंदियों की सूची को उच्च न्यायालय प्रशासन वेरिफाई करवाने के बाद आदेश जारी कर सकता है। इसके लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव, जिला पैरोल कमेटी की बैठक भी बुलाने की तैयारी है।

महीने के आखिर में बैठक

मिली जानकारी के अनुसार अंडर ट्रायल रिव्यू कमेटी की बैठक 31 मार्च को होने जा रही है। इस बैठक में जिला न्यायाधीश, जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और सीजेएम सदस्य होते हैं जो इस मसले पर विचार कर अपनी रिपोर्ट देगी।

यह है परेशानी

प्रशासन इस पर भी विचार कर रहा है कि ज्यादातर बंदी दूसरे जिले या राज्य से संबंध रखते हैं। इस वक्त पूरी तरह से लॉकडाउन की स्थिति है ऐसे में इन बंदियों को उनके स्थायी आवास तक कैसे पहुंचाया जाएगा।

करीबन दो हजार बंदियों के स्थानांतरण

जेल प्रशासन ने बीते करीबन सप्ताह में बंदियों को दूसरे जेलों में भेजा है। बंदियों को क्षमता से अधिक बंदियों वाले कारागार से दूसरी खाली जेलों में भेजा गया है।

सभी जेलों का निरीक्षण

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव जिलों की कारागार का निरीक्षण कर रिपोर्ट उच्च न्यायालय को दे चुके हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार बंदियों के बाहर जाने पर रोक लगाई गई है और परिजनों से मुलाकात भी बंद है। जेल प्रशासन सुरक्षाकर्मियों की स्क्रीनिंग करने के बाद ड्यूटी पर नियुक्त कर रहा है और सभी कैदियों की स्क्रीनिंग और सफाई पर ध्यान दिया जा रहा है।

इनका कहना है

मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत माहान्ती और प्राधिकरण के अध्यक्ष न्यायाधीश संगीत लोढ़ा ने पहले ही इस विषय को प्राथमिकता से ले रखा है। जेल प्रशासन से रिपोर्ट ले चुके हैं और सभी जिला विधिक प्राधिकरण के सचिव भी अपने अपने अधिकार क्षेत्र के कारागार का निरीक्षण कर रिपोर्ट दे चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा रही है।

एके जैन, सचिव, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण

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KAMLESH AGARWAL Desk
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