हस्ताक्षर ने अटकाए मूल निवास प्रमाण-पत्र

कोटा यह तो मात्र उदाहरण है, एðसे करीब डेढ़ हजार मूल निवासी प्रमाण पत्र है, जो सक्षम अधिकारी के डिजिटल हस्ताक्षर नहीं होने के कारण एक माह से लाडपुरा तहसील में अटके पड़े है। आवेदक आए दिन तहसील के चक्कर लगा रहे हैं। यह महत्वपूर्ण प्रमाण पत्र है, जिनकी नौकरी, छात्रवृत्ति समेत अन्य कार्यों में आवश्यकता पड़ती है।

1. डीसीएम इन्द्रा गांधी नगर निवासी प्रशांत कुमार ने 20 दिन पहले मूल निवासी प्रमाण पत्र के लिए ई-मित्र पर आवेदन किया था, लेकिन वह आज तक बनकर नहीं आया।

2. बोरखेड़ा क्षेत्र के कृष्णा विहार निवासी काजल ने सप्ताह भर पहले मूल निवासी व जाति प्रमाण पत्र के लिए समीप के ई-मित्र पर आवेदन किया था, लेकिन वह भी बनकर नहीं आया।

कोटा यह तो मात्र उदाहरण है, एðसे करीब डेढ़ हजार मूल निवासी प्रमाण पत्र है, जो सक्षम अधिकारी के डिजिटल हस्ताक्षर नहीं होने के कारण एक माह से लाडपुरा तहसील में अटके पड़े है। आवेदक आए दिन तहसील के चक्कर लगा रहे हैं। यह महत्वपूर्ण प्रमाण पत्र है, जिनकी नौकरी, छात्रवृत्ति समेत अन्य कार्यों में आवश्यकता पड़ती है।

मूल निवासी प्रमाण पत्र जारी करने के लिए तहसीलदार व जाति प्रमाण पत्र के उपखण्ड अधिकारी को  समक्ष अधिकारी अधिकृत किया है। तहसीलदार के डिजिटल हस्ताक्षर नहीं होने से एक माह से मूल निवासी प्रमाण पत्र नहीं बन रहे है। तहसील में करीब 1546 मूल निवासी प्रमाण पत्र पेंडिंग पड़े हैं।

रोजाना आ रहे आवेदन

संचालकों के अनुसार, ई-मित्र केन्द्रों  पर प्रतिदिन 15 से 20 मूल निवासी व जाति प्रमाण पत्र के आवेदन आ रहे हैं। संचालकों का कहना है कि सात दिन से  जाति प्रमाण भी नहीं बन रहे है।


 डिजिटल हस्ताक्षर जयपुर से बनकर आना था, लेकिन नहीं आया। बाद में कोटा में बनवाने के लिए कहा गया। गुरुवार को डिजिटल हस्ताक्षर बनकर आ जाएगा। इसके बाद प्रमाण पत्रों को जारी कर देंगे।
गजेन्द्र सिंह, तहसीलदार, लाडपुरा
shailendra tiwari Desk
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