scriptprotest gets stalled 232 times in a year at jaipur | धरने-रैलियों से साल में 232 बार ठप हो जाता है जयपुर, बन जाते हैं ऐसे हालात | Patrika News

धरने-रैलियों से साल में 232 बार ठप हो जाता है जयपुर, बन जाते हैं ऐसे हालात

एक तरफ शहर का विस्तार हो रहा है और दूसरी तरफ आए दिन धरने-प्रदर्शन, शोभायात्राएं और रैलियां हो रही हैं।

जयपुर

Updated: December 24, 2021 09:16:33 pm

संजय कौशिक
एक तरफ शहर का विस्तार हो रहा है और दूसरी तरफ आए दिन धरने-प्रदर्शन, शोभायात्राएं और रैलियां हो रही हैं। हालात यह बन जाते हैं कि शहरवासियों को बेवजह घंटों जाम में फंसना पड़ता है। वीवीआइपी की आवाजाही से लेकर धरने-प्रदर्शन और रैलियों को लेकर न्यायालयों की ओर से कई बार आदेश जारी किए गए। शुरुआत के दिनों में इनको लागू भी किया गया, लेकिन समय के साथ सिस्टम भी पुराने ढर्रे पर आ गया।
धरने-रैलियों से साल में 232 बार ठप हो जाता है जयपुर, बन जाते हैं ऐसे हालात
धरने-रैलियों से साल में 232 बार ठप हो जाता है जयपुर, बन जाते हैं ऐसे हालात
राजस्थान हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका में तो यहां तक बताया गया कि जयपुर में ही ऐसी गतिविधियों से सालभर में 232 बार शहर ठप हो जाता है। ऐसे में धरने प्रदर्शन और रैलियों के लिए शहर के बाहर न केवल स्थान चिह्नित करने की जरूरत है, बल्कि इसकी पालना सख्ती से की जानी चाहिए।
न्यायालय आए आगे
सरकारें कोई भी रहीं हों। धरने-प्रदर्शन और रैलियों को लेकर कभी किसी ने कोई बात नहीं की। इसके लिए न्यायालय आगे आए और जनता की पीड़ा को समझा और आदेश जारी किए। ऐसे ही एक आदेश की वजह से अमरूदों का बाग में रैलियां होना बंद हो गईं। अब शहीद स्मारक, वीटी रोड, विद्याधर नगर स्टेडियम और रामलीला मैदान में सभाएं होती हैं। हालांकि, जब इन स्थानों से एक साथ लोग गुजरते हैं तो घंटों तक शहर जाम रहता है।
कांग्रेस के जन घोषणा-पत्र में भी शामिल
कांग्रेस ने अपने जन घोषणा-पत्र बिंदु संख्या 64 में जिक्रभी किया कि विभिन्न संगठन अपने अधिकारों के लिए आंदोलन करते हैं, जिससे शहर का यातायात ठप हो जाता है। इसको ध्यान में रखते हुए सरकार बड़े शहरों में प्रतिरोध और आंदोलन के लिए स्थान चिह्नित करेगी।
अब जनता दिखा रही समझदारी
पिछले कुछ धरने-प्रदर्शनों में सामने आया है कि जनता जरूरी होने पर ही घरों से बाहर निकलती है। इससे जाम की स्थिति कम बनती है। गौरतलब है कि शहर की सड़कों पर प्रतिदिन 30 लाख से अधिक वाहन चलते हैं। उद्योग मैदान और अमरूदों के बाग में पहले धरने-प्रदर्शन होते थे, लेकिन कोर्ट के दखल के बाद अमरूदों के बाग में बंद हो गए।
सरकार से अपेक्षा
शहरी सीमा में धरने-प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जाए।
वीवीआइपी गतिविधि के दौरान ट्रैफिक नहीं रोका जाए।
सत्र के दौरान कई संगठन विधानसभा का घेराव करने आते हैं। इससे सहकार मार्ग, जनपथ पर कई बार जाम लग जाता है। इसे रोका जाना चाहिए।

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