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जनप्रतिनिधियों के लेटर पर कर्मचारी-अधिकारियों की जवाबदेही होगी तय, पब्लिक रिप्रजेंटेटिव लैटर्स एसेसमेंट पोर्टल तैयार

-जनप्रतिनिधियों की ओर से भेजे गए लेटर पर कितना हुआ काम इसकी मॉनिटरिंग करेगा पोर्टल, जनप्रतिनिधियों के पत्र को महत्व नहीं मिलने की कई बार शिकायत मिलने के बाद सरकार ने लिया फैसला

जयपुर

Updated: April 17, 2022 12:21:36 pm

जयपुर। विधायकों, सांसद और स्थानीय निकायों के जनप्रतिनिधियों की ओर से जारी होने वाले लेटर पर सरकारी अधिकारी और कर्मचारी अब टालमटोल और अनदेखी नहीं कर पाएंगे। इसके लिए सरकार ने कर्मचारी- अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की तैयारी कर ली है।

secretariat
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जनप्रतिनिधि की ओर से जारी लेटर पर पर कितना काम हुआ या काम नहीं हुआ इसकी इसकी मॉनिटरिंग की जाएगी। इसके लिए सरकार ने पब्लिक रिप्रेजेंटेटिव लेटेस्ट असेसमेंट पोर्टल(पीआरएलए) लॉन्च करने जा रही है। बताया जा रहा है कि कुछ सुझावों को इसमें शामिल करने के बाद जल्द ही पोर्टल लांच कर दिया जाएगा, जिसके बाद जनप्रतिनिधियों की ओर से जारी होने वाले पत्रों पर अधिकारी-कर्मचारियों की जवाबदेही तय हो जाएगी।

इसलिए पड़ी पब्लिक रिप्रेजेंटेटिव लेटेस्ट असेसमेंट पोर्टल की जरूरत
दरअसल आमजन या कोई भी अगर विधायक-सांसद या स्थानीय जनप्रतिनिधियों के पास अपनी कोई समस्या लेकर जाता है तो जनप्रतिनिधि संबंधित विभाग को लेटर जारी करके संबंधित व्यक्ति का काम करने के निर्देश देते हैं लेकिन कई बार ऐसा सामने आया है कि जनप्रतिनिधियों के लेटर को प्रशासन में कोई तवज्जो नहीं मिलती और अधिकारी कर्मचारी भी लेटर की अवहेलना कर उसे रद्दी की टोकरी तक में डाल देते हैं ।

अपने लेटर को तवज्जों नहीं मिलने की कई बार विधायकों, सांसदों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को शिकायत भी की है, जिसके बाद सरकार ने जनप्रतिनिधियों के पत्रों पर जवाबदेही तय करने के लिए पोर्टल लॉन्च करने के निर्देश प्रशासनिक सुधार विभाग को दिए थे और प्रशासनिक सुधार विभाग ने इस पर काम करना शुरू कर दिया है।

जनप्रतिनिधि के पत्र की होगी मॉनिटरिंग
दरअसल पोर्टल लॉन्च होने के बाद जनप्रतिनिधि के पत्र की लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी। जनप्रतिनिधियों ने जो लेटर संबंधित विभाग को लिखा था उस पर कितना काम हुआ है और कितना काम नहीं हो पाया उस तमाम की जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध रहेगी। बड़ी बात यह भी है कि इस पोर्टल के जरिए जनप्रतिनिधि संबंधित विभाग को अपने पत्र का रिमाइंडर भी भेज सकते हैं।

जवाबदेही सुशासन सरकार की प्राथमिकता
सरकार से जुड़े सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत लगातार जवाबदेही और पारदर्शी सुशासन की बात करते हैं लेकिन, सरकारी कार्मिकों की लेटलतीफी और रवैये के चलते जनप्रतिनिधियों के लेटर को प्रशासन में तवज्जो नहीं मिलने से ग्रास रूट पर सरकार के स्लोगन का असर ज्यादा देखने को नहीं मिल पा रहा था, जिसके बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पब्लिक रिप्रेजेंटेटिव पोर्टल के जरिए कर्मचारी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की तैयारी कर ली है।

जवाबदेही और पारदर्शिता शासन में इसे भी एक बड़े कदम के तौर पर देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस पोर्टल पर संबंधित अधिकारी और कर्मचारी जनप्रतिनिधि के पत्रों पर की गई रिपोर्ट को डाउनलोड कर सकेंगे। साथ ही पत्रों के निस्तारण की जानकारी इस पोर्टल पर अपलोड करनी होगी और 7 दिन में कार्रवाई नहीं होने पर रिमाइंडर करवाया जाएगा।

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