Purnima Vrat — सभी सुखों से चंद्रमा का है सीधा संबंध, ऐसे होते हैं प्रसन्न

सनातन धर्म में पूर्णिमा की तिथि को चंद्रमा से जोडकर देखा जाता है

By: deepak deewan

Published: 07 Mar 2020, 03:17 PM IST

जयपुर.
हिंदू कैलेंडर के अनुसार माह के शुक्लपक्ष की अंतिम तिथि को पूर्णिमा होती है; जिस दिन आकाश में पूरा चांद होता है वह दिन पूर्णिमा कहलाता है। पूर्णिमा के अगले दिन से कृष्ण पक्ष प्रारंभ हो जाता है। पूर्णिमा और अमावस्या के मध्य के 15 दिन के भाग को कृष्ण पक्ष कहते हैं।

सनातन धर्म में पूर्णिमा की तिथि को चंद्रमा से जोडकर देखा जाता है। इस दिन चंद्रमा की पूजा—अर्चना करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। पूर्णिमा पर भगवान विष्णु की प्रसन्नता के लिए सत्यनारायण व्रत और कथा का आयोजन भी किया जाता है ताकि भगवान विष्णु या सत्यनारायण की कृपा दृष्टि उन पर बनी रहे। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने की भी परंपरा है. भविष्यपुराण के अनुसार पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान से सभी पापों से मुक्ति मिलती है।

नवग्रहों में चंद्रमा को रानी का दर्जा दिया गया है। वस्तुत: चंद्रमा मन के कारक हैं और यही कारण है कि उनकी कृपा के बिना जीवन में कोई सुख नहीं मिलता। कुंडली में चंद्रमा की स्थिति अच्छी हो तो धन—संपत्ति—वैभवपूर्ण जीवन होता है। पूर्णिमा पर श्रद्धालु निर्जला व्रत रखकर पूजा अर्चना करते हैं। साल में लगभग 12 पूर्णिमा पड़ती हैं और हर एक का अपना अलग—अलग महत्व होता है। इनमें भी फाल्गुन मास की पूर्णिमा का सबसे ज्यादा महत्व है।

शास्त्रोक्त मान्यता है कि फाल्गुन मास की पूर्णिमा को ही महर्षि अत्रि और देवी अनुसूया से चंद्रमा की उत्पत्ति हुई थी। इस कारण इस दिन चंद्रमा की आराधना विशेष फलदायक होती है। इस दिन लोग पूजा पाठ, हवन आदि करते हैं और चद्रमा से मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना की जाती है। इस बार फाल्गुन पूर्णिमा 9 मार्च को आ रही है। सोमवार को पूर्णिमा तिथि आने पर फाल्गुन पूर्णिमा व्रत और लाभदायक बन गया है। ज्योतिषाचार्य पंडित दीपक दीक्षित बताते हैं कि 9 मार्च सोमवार को सुबह 3.03 बजे पूर्णिमा प्रारंभ होगी और रात 11:17 तक रहेगी।

जीवन में धन सम्बन्धी समस्याओं को दूर करने के लिए चंद्रमा की पूजा जरूर करनी चाहिए. इसके लिए पूर्णिमा के दिन से एक जाप प्रारंभ करें. चंद्रोदय के समय चन्द्रमा करें और मंत्र- ॐ स्रां स्रीं स्रौं स: चन्द्रमासे नम: का जाप करे। इस मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें, ऐसा लगातार 40 दिनों तक करें. पूरे मनोयोग और श्रदृधा से नियमपूर्वक जाप करने से धीरे धीरे आपकी आर्थिक समस्या खत्म हो जाएगी।

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