हरियाली के बीच कोरोना मरीजों को मिलेगा सुखद और शांत माहौल

समाजसेवी संस्था टोंक रोड बीलवा स्थित राधास्वामी सत्संग व्यास परिसर ने यह परिसर अस्थाई कोरोना केयर सेंटर बनने के लिए दिया है।

By: santosh

Updated: 23 Apr 2021, 11:06 AM IST

जयपुर। राजधानी जयपुर समेत प्रदेशभर में दिनोंदिन तेजी से बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के मद्देनजर जीवन बचाने के लिए आक्सीजन को लेकर हाहाकर मचा हुआ है। इस बीच शहर की सबसे बड़ी समाजसेवी संस्था टोंक रोड बीलवा स्थित राधास्वामी सत्संग व्यास परिसर ने यह परिसर अस्थाई कोरोना केयर सेंटर बनने के लिए दिया है। सबसे सुखद खबर है कि शहर से दूर शांत माहौल में प्रदूषण मुक्त वातावरण में कोरोना मरीजों का इलाज बड़ी संख्या में फैली हरियाली के बीच होगा। जिससे मरीजों को शुद्ध आक्सीजन और हवा मिलेगी। इसके साथ ही मरीज के स्वास्थ्य में भी जल्द सुधार होगा। प्रदेश के पहले सबसे बडे़ कोरोना सेंटर को तैयार करने का कामकाज यहां तेजी से पूरा किया जा रहा है। सेवादारो ने डोम की सफाई, पंखे लगाने सहित अन्य व्यवस्थाओं का इंतजाम किया।

ऐसे समझें हरियाली के फायदे
सबसेे खास बात यह है कि यहां पूरे 170 एकड़ जमीन पर फैले परिसर में आठ हजार से अधिक छायादार, फलदार पेड़ हैं। साथ ही 170 एकड़ जमीन यानि पूरे चार किमी. के परिसर की बाउंड्री पर बुगन बैली लगाई हुई है। हरियाली और ठंडी हवाओं के बीच परिसर में प्रवेश के बाद सुकुनभरा माहौल यहां मरीजों को मिलेगा। अस्थमा भवन के निदेशक और वरिष्ठ श्वास रोग विशेषज्ञ डाॅ. वीरेंद्र सिंह ने बताया कि एक स्वस्थ पेड़ हर दिन लगभग 230 लीटर ऑक्सीजन छोड़ता है, जिससे सात लोगों को प्राण वायु मिल पाती है। एक-एक पेड अमूल्य है, यह तापमान 1 स 5 डिग्री तक कम करने के साथ ही सीओटू कम करता है। एक पेड़ सालभर में 100 किग्रा तक ऑक्सीजन देता है। एक व्यक्ति को सालभर में 740 किग्रा ऑक्सीजन की जरूरत होती है।

दस हजार मरीज तक ठहरने की क्षमता
यहां 10 लाख स्कवायर फीट के डोम में शुरूआती दौर में कोरोना प्रभावितों के लिए चिकित्सा एवं स्वाथ्य विभाग द्वारा 500 मेडीकल सर्जिकल यूनिट बैड्स सेंटर पर उपलब्ध कराए हैं। कुल छह वार्ड यहां पहले बनाए जाएंगे। हर मरीज के बीच छह फीट की दूरी और पर्दा होगा। इसके बाद इसे बढ़ाया जाएगा। कुल 10 हजार मरीजों को यहां एकसाथ ठहराने की क्षमता डोम में है। जेडीए, चिकित्सा विभाग की टीम, नगर निगम की टीमों का अलग-अलग व्यवस्थाओं का जिम्मा संभालेगीे। वहीं राधा स्वामी संस्थान की ओर से पेयजल, चाय, नाश्ते, खाने और काढ़ा दिया जाएगा। 26 अप्रेल से यह सेंटर मरीजों के लिए शुरू होगा। डोम में आरटीपीसीआर टेस्ट की लैब के अलावा 15 तरह की दवाइयां, दो एंबुलेंस,150 के आसपास चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ रहेगा।

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