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इस एडवांस टेक्निक से लैस हो रही ट्रेनें, यात्रियों के साथ रेलवे को हो रहा फायदा, जानिए कैसे

locationजयपुरPublished: Nov 24, 2023 11:34:51 am

Submitted by:

Rakesh Mishra

ट्रेनों के संचालन को सुगम और यात्री सुविधाओं में विस्तार को लेकर रेलवे कई नए प्रयोग कर रहा है। रेलवे अब ट्रेनों को हेड ऑन जनरेशन तकनीक (एचओजी) से लैस कर रहा है, जिससे न केवल ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा और ध्वनि प्रदूषण से राहत मिलेगी, बल्कि यात्रियों को अतिरिक्त सीटें भी मिल सकेगी

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ट्रेनों के संचालन को सुगम और यात्री सुविधाओं में विस्तार को लेकर रेलवे कई नए प्रयोग कर रहा है। रेलवे अब ट्रेनों को हेड ऑन जनरेशन तकनीक (एचओजी) से लैस कर रहा है, जिससे न केवल ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा और ध्वनि प्रदूषण से राहत मिलेगी, बल्कि यात्रियों को अतिरिक्त सीटें भी मिल सकेगी। दरअसल, उत्तर पश्चिम रेलवे जोन में दौड़ रही ट्रेनों के कोचों में बिजली की आपूर्ति के लिए पावरकार या जनरेटर कार लगाए जाते हैं, जिसमें लाखों लीटर डीजल की खप्त होती है और ध्वनि प्रदूषण भी होता है।
ज्यादा दिक्कत एलएचबी कोच संचालित ट्रेनों में हो रही है। क्योंकि, उनमें दो-दो पावर लगे होते हैं। जिससे ट्रेनों में यात्री कोच की संख्या कम हो जाती है। इन समस्याओं से निजात दिलवाने के लिए रेलवे, ट्रेनों में हेड ऑन जनरेशन तकनीक (एचओजी) का इस्तेमाल कर रहा है। इस तकनीक से इंजन से सीधे इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन पावर केबल का उपयोग कर कोचों में बिजली की आपूर्ति की जा रही है। उससे लाइटें, पंखे, एसी चल रहे हैं। ऐसे में जिन ट्रेनों में यह तकनीक शुरू हो चुकी हैं। उनमें एक एक पावर कार हटाए जा चुके हैं। हालांकि एक पावर कार को इमरजेंसी स्थिति से निपटने के लिए रखा गया है।
हर घंटे 60 लीटर डीजल की बचत
पूछताछ में पता चला कि एक पावरकार में हर घंटे 60 लीटर डीजल की खप्त होती है। ऐसे में एचओजी तकनीक से ट्रेनों में ईंधन पर खर्च होने वाले करोड़ों रुपए की बचत होगी। साथ ही वायु और ध्वनि दोनों प्रकार के प्रदूषण से भी राहत मिलेगी। इनके अलावा पावरकार में डीजल या ज्वलनशील उपकरणों से आग लगने का खतरा बना रहता है, जो भी घट जाएगा।
78 जोड़ी ट्रेनों में इस तकनीक का इस्तेमाल
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि देशभर में रेलवे 78 जोड़ी ट्रेनों में एचओजी तकनीकी का उपयोग प्रारम्भिक तौर पर शुरू हो चुका है। इनमें शामिल 15 जोड़ी ट्रेनें उत्तर पश्चिम रेलवे की है। ट्रेनों से हटाए जा रहे पावर कार के स्थान पर जनरल, स्लीपर, एसी या पार्सल कोच जोड़े जा रहे हैं। जिससे यात्रियों के साथ रेलवे को भी फायदा होगा।

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