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Rajasthan News : गजब ! राजस्थान पुलिस कम्प्यूटर नहीं बर्तनों से रोकेगी ऑनलाइन ठगी के मामले, जानिए कैसे

दो साल से यहां पर्याप्त स्टाफ के साथ साइबर एक्सपर्ट भी तैनात नहीं किए गए। प्रदेश में जिला स्तर पर पहला साइबर थाना जयपुर कमिश्नरेट में वर्ष 2018 में खोला गया था। इसके बाद वर्ष 2022 में 32 राजस्व जिलों में स्पेशल साइबर थाने खोले गए।

जयपुरJun 08, 2024 / 01:11 pm

जमील खान

Jaipur News : जयपुर. साइबर थाने में कम्प्यूटर ही नहीं। यह सुनने में जरूर अजीब लगता है, लेकिन प्रदेश के जिला स्तरीय स्पेशल साइबर थानों की यही स्थिति है। प्रदेश के सभी राजस्व जिलों में 32 थाने खोलने के साथ ही सरकार ने इन थानों को मैस (रसोई) भत्ते के अलावा कोई फंड नहीं दिया। मैस भत्ते के रूप में मिले तीन से चालीस हजार रुपए में थाने का जरूरी सामान खरीद लिया गया। इसके अलावा पुलिस मुख्यालय ने थानों को बस एक-एक जीप और मोटर साइकिल दी है। कम्प्यूटर, लैपटॉप व जरूरी साइबर टूल्स के नाम पर कुछ नहीं दिया गया।
दो साल से यहां पर्याप्त स्टाफ के साथ साइबर एक्सपर्ट (Cyber Expert) भी तैनात नहीं किए गए। प्रदेश में जिला स्तर पर पहला साइबर थाना जयपुर कमिश्नरेट में वर्ष 2018 में खोला गया था। इसके बाद वर्ष 2022 में 32 राजस्व जिलों में स्पेशल साइबर थाने खोले गए। सरकार स्तर की गई प्लानिंग में थाने में कम्प्यूटर, लैपटॉप जैसे उपकरण और साइबर टूल्स का कोई जिक्र नहीं था। जिक्र केवल कम्प्यूटर टेबल सहित अन्य फर्नीचर का ही था। थाने खुले तो संबंधित पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए कि वे अपने स्तर पर थाने शुरू करने की प्रक्रिया शुरू करें। ऐसे में थाने में एक-एक कम्प्यूटर सीसीटीएनएस प्रोजेक्ट या किसी अन्य प्रोजेक्ट से निकाल कर लगाए गए।
एक भी थाने में प्रोग्रामर नहीं, निजी एक्सपर्ट के सहारे पुलिस
सरकार ने एक थाने पर पन्द्रह पुलिसकर्मियों का स्टाफ निर्धारित किया। इसमें उप अधीक्षक और निरीक्षक के साथ तीन उपनिरीक्षक, दो हेड कांस्टेबल व पांच कांस्टेबल शामिल थे। साथ ही एक प्रोग्रामर व एक सूचना सहायक का पद निर्धारित किया गया। वर्ष 2022 में खोले गए इन थानों में किसी प्रकार के लेटेस्ट साइबर टूल्स नहीं हैं। इसके अलावा पुलिस के सहयोग के लिए एक भी प्रोग्रामर नहीं दिया गया।
ऐसे में थाने वाले पूरी तरह से निजी Experts पर निर्भर हैं। थानों पर जो अधिकारी लगाए गए हैं, उन्होंने साइबर की ट्रेनिंग भी नहीं ली है। यह कारण है कि इन थानों में दर्ज हो रहे मामलों में अपेक्षाकृत परिणाम सामने नहीं आ रहे हैं। नफरी में पांच कांस्टेबल की संख्या भी कम साबित हो रही है। थाने में नियमित कार्यों में ही यह नफरी पूरी हो जाती है। ऐसे में जांच अधिकारी के सहयोग के लिए पुलिसकर्मी नहीं हैं।
साइबर टूल्स के लिए मांगा था प्रस्ताव
थानों की स्थापना के समय आदेश में स्पष्ट लिखा था कि थानों में तकनीकी साधन और साइबर टूल्स के लिए पुलिस मुख्यालय अलग से प्रस्ताव भेजेगा। यह मामला अभी तक कागजों में ही अटका है। धरातल पर कोई काम नहीं किया गया।
बिना तैयारी दिए 18 करोड़, पुलिस उपयोग नहीं कर पाई
गत सरकार ने साइबर क्षेत्र में तकनीक के इस्तेमाल के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस खोलने का निर्णय किया। इसके पुलिस को 18 करोड़ का बजट भी दिया। हालांकि पुलिस इसका उपयोग नहीं कर की। दरअसल इसके लिए भवन था ही नहीं और सरकार ने साइबर टूल्स के लिए बजट दे दिया। भवन की तलाश में ही पूरा समय निकल गया ऐसे में यह बजट भी लेप्स हो गया।

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