Rajasthan BJP: गर्माया हुआ है कृषि कानूनों के विरोध का मामला, जानें 'बचाव' में क्या कर रही भाजपा?

केंद्रीय कृषि कानून के पुरजोर विरोध का मामला, कानूनों पर जयपुर से दिल्ली तक की गरमाई हुई है सियासत, इस बीच कानूनों के प्रति जागरूक करने में भाजपा फिर हुई एक्टिव, सुस्त पड़े अभियान को फिर दी जा रही रफ़्तार, वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों को प्रदेश नेतृत्व से मिले निर्देश, मीडिया और आईटी सेल भी एक्टिव मोड पर

 

By: nakul

Published: 03 Dec 2020, 12:19 PM IST

जयपुर।

केंद्रीय कृषि कानूनों के चौतरफा विरोध से घिरी भाजपा ने एक बार फिर इन कानूनों के फायदे और भ्रांतियां गिनाने के अभियान को रफ़्तार दे दी है। प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर पार्टी के तमाम पदाधिकारियों और वरिष्ठ नेताओं को गांव-ढाणियों तक पहुंचकर किसानों के बीच जाने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं कानूनों के इसी प्रचार अभियान में प्रवक्ताओं और मीडिया पैनल के अलावा आईटी टीम को भी सक्रीय कर दिया गया है।

‘सुस्त’ पड़े अभियान को फिर दी रफ़्तार
कांग्रेस समेत विभिन्न राजनीतिक दल जहां कृषि कानूनों का पुरजोर विरोध कर रहे हैं, तो वहीं भाजपा ने कानूनों को कृषि और किसानों के हित में बताते हुए इसके प्रचार को रफ़्तार दे दी है।

दरअसल, पिछले कुछ दिनों से पार्टी का फोकस नगर निगम और निकाय चुनावों से जुडी गतिविधियों पर हो गया था, जिसके कारण कृषि कानून को लेकर जागरूकता का अभियान ठंडा पड़ गया था। अब जब कानूनों का विरोध दिल्ली तक पहुंचकर गरमा गया है तब पार्टी ने भी इन कानूनों के फायदे और इससे जुडी भ्रांतियां गिनाना शुरू कर दिया है।

आरोप और बयानबाजी परवान
कृषि कानूनों के विरोध में जयपुर से लेकर दिल्ली तक की सियासत गरमाई हुई है। इस बीच प्रदेश भाजपा नेताओं के विरोधियों के खिलाफ आरोप लगाने और बयानबाजी का सिलसिला भी परवान पर है। प्रदेश अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया, उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ और मुख्य प्रवक्ता रामलाल शर्मा जैसे वरिष्ठ नेताओं की ‘तिगडी’ तो हर दिन इस मुद्दे पर बयान जारी कर कृषि कानून का विरोध कर रहे दलों पर निशाना साध रहे हैं।

मीडिया और आईटी टीम हुई सक्रीय
प्रदेश भाजपा कृषि कानून के फायदे गिनाने के साथ ही इसका विरोध कर रहे ‘विरोधियों’ का भी पुरजोर विरोध कर रहे हैं। इसके लिए खासतौर से पार्टी के मीडिया पैनल और आईटी सेल को सक्रीय किया गया है। आईटी सेल ने सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से एक बार फिर से कृषि कानूनों को लेकर जागरूक करने के अभियान को जोर दिया है।

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