राजस्थान BJP के आगे मोदी-शाह तक 'बेबस', जानिए क्या बन रहे कारण?

राजस्थान BJP के आगे मोदी-शाह तक 'बेबस', जानिए क्या बन रहे कारण?

nakul devarshi | Publish: Jun, 14 2018 01:29:39 PM (IST) | Updated: Jun, 14 2018 01:32:08 PM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

राजस्थान BJP के आगे मोदी-शाह तक 'बेबस', जानिए क्या बन रहे कारण?

जयपुर।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह इन दिनों कसमसाए से हैं। दरअसल, यह जोड़ी इन दिनों राजस्थान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की खाली पड़ी कुर्सी भरने में सफल नहीं हो पार रही है। इनके तय किए हुए नाम गजेंद्र सिंह शेखावत पर राजस्थान सरकार की मुखिया सहमति नहीं दे रही है। कई दौर की बैठकों के बाद भी मामला जस का तस बना हुआ है और यहां राजस्थान की मुख्यमंत्री हैं जो टस से मस नहीं हो रही है।

 

नए प्रदेशाध्यक्ष के सहमति बनाने के लिए बुधवार को तमाम नेता दिल्ली में एकजुट हुए, लेकिन ये कोशिश फिर से नाकाम साबित हुई। अब तो भाजपा कार्यकर्ता ही नहीं जनता को भी यह समझ में आ गया है कि चाहकर भी दिल्ली, राजस्थान को लेकर कोई निर्णय नहीं कर पा रही है। ऐसे में सवाल भी खड़ा हो गया है कि राजस्थान के आगामी विधानसभा चुनाव में आखिर दिल्ली की कितनी चलेगी।


भाजपा के चाणक्य अमित शाह प्रदेश नेतृत्व के आगे पस्त नजर आ रहे हैं, ये पहला मौका है जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष किसी प्रदेश को लेकर इतने चिंतन और मंथन के दौर से गुजर रहे हैं। नए कप्तान को लेकर जिस तरह से प्रदेश और दिल्ली के बीच मामला ठना हुआ है, उसने पार्टी के शीर्ष पदाधिकारियों की नींद उड़ा दी है।

 

पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने विश्वासपात्र केंद्रीय राज्यमंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को प्रदेशाध्यक्ष की पद पर देखना चाहते हैं तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जातिगत समीकरण गड़बड़ाने के हवाले से शेखावत के नाम पर कतई तैयार नहीं हैं। शेखावत का नाम जब-जब पार्टी नेतृत्व की ओर से आगे रखा गया है, तब-तब वसुंधरा राजे केंद्रीय नेतृत्व की राह मे खड़ी हो गई। जानकारों का कहना है कि प्रदेशाध्यक्ष की इस तनातनी के बीच चुनाव में पार्टी का नुकसान होने की आशंका बढ़ती जा रही है।

 

हर राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले अपनी पकड़ मजबूत करने की अपनी रणनीति में सफल होने में अमित शाह को राजस्थान में खासी मुश्किल पेश आ रही है। प्रदेश अध्यक्ष पद से वसुंधरा के चहेते अशोक परनामी की अघोषित छुट्टी के बाद जैसे ही अमित शाह ने नए प्रदेशाध्यक्ष के रुप में जोधपुर से लोकसभा सदस्य एवं केंद्र में कृषि राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के नाम का दांव चला, वसुंधरा राजे के खुले विरोध से वो उलटा पड़ गया।

 

अब राज्य के नए प्रदेशाध्यक्ष का नाम तय होने के बाद भी आलाकमान उसे घोषित नहीं कर पा रहा है। वो इंतजार में बैठा है कि राजस्थान थोड़ा नरम हो तो आगे कदम बढ़ाया जाए, लेकिन अभी तक के हालात ये बताते हैं कि राजस्थान के मामले में मोदी-शाह को पटखनी मिली है। दिल्ली से चले हर आदेश का पालन हर राज्य करते रहे हैं, लेकिन राजस्थान में ये आदेश हर बार हवा में ही रह गया।

 

आलाकमान की मुश्किल ये है कि प्रदेशाध्यक्ष के मामले में यदि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व प्रदेश के नेताओं की अनदेखी करते हुए निर्णय करता है तो चुनाव के नतीजों के लिए वह जिम्मेदार हो जाएगा। साथ ही टिकट बंटवारे से लेकर भी स्थिति उलझ जाएगी।

 

इस बीच माना जा रहा है कि भाजपा में इस गुटबाजी का लाभ कांग्रेस को चुनाव के दौरान मिल सकता है। साथ ही इस अंदरूनी कलह को कांग्रेस चुनाव में कैश भी करने की कोशिश कर सकती है। इस खींचतान के बीच एक बात साफ नजर आ रही है कि इसका बड़ा कारण टिकट वितरण में अपना वर्चस्व बनाए रखना ही मुख्य है। अगर केंद्रीय नेतृत्व गजेंद्रसिंह को अध्यक्ष बनाने में नाकाम रहता है तो विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण का काम भी दिल्ली के पास नहीं होगा।

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