राजस्थान के शहरों की नहीं बदली सूरत, मुख्यमंत्री खुद संभालेंगे कमान, सोमवार को लगाएंगे अधिकारियों की क्लास

राजस्थान के शहरों की नहीं बदली सूरत, मुख्यमंत्री खुद संभालेंगे कमान, सोमवार को लगाएंगे अधिकारियों की क्लास

Pushpendra Singh Shekhawat | Updated: 23 Jun 2019, 08:01:22 PM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

Rajasthan CM Ashok Gehlot लेंगे बैठक

शादाब अहमद / जयपुर। राजधानी जयपुर हो या फिर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ( Cm Ashok Gehlot ) का गृह नगर जोधपुर, शहरी विकास कार्यों में तेजी नहीं दिख रही है। इसके पीछे लोकसभा चुनाव ( Loksabha Election ) की लंबे समय तक रही आचार संहिता ( Achar Sanhita ) को कारण बताया जा रहा है। शहरों की सूरत ठीक करने के लिए खुद नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल ( Shanti Dhariwal ) शहरी इलाकों का लगातार दौरा कर अफसरों को तय समय पर काम के लिए चेता रहे हैं। अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सोमवार को सभी शहरों के विकास की योजनाओं और स्वायत्त शासन की गतिविधियों की समीक्षा करेंगे।

 

प्रदेश में सत्ता बदले हुए छह महीने से अधिक समय गुजर चुका है, लेकिन शहरी इलाकों में विकास की रफ्तार नहीं बढ़ सकी है। जयपुर में जेडीए समेत अन्य शहरी निकायों की आर्थिक स्थिति खराब बनी हुई है। ऐसे में जमीन पर काम नजर नहीं आ रहे हैं। खुद मंत्री धारीवाल ने सरकार बनने के बाद माना था कि व्यवस्था बदहाल है। जेडीए की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, जिसके चलते व्यवस्थाओं को पटरी पर लाने के लिए कम से कम एक साल का वक्त लग सकता है। धारीवाल व्यवस्था सुधारने के लिए अफसरों के साथ बैठकें कर चुके हैं।

 

चुनाव के चलते बिगड़ा समय
लोकसभा चुनाव के चलते करीब ढाई महीने आचार संहिता लागू रही। इस दौरान विकास कार्यों की मंजूरियां नहीं निकाली गई। साथ ही अफसरों के चुनाव में व्यस्त होने के चलते पहले से चल रहे कार्यों की मॉनीटरिंग भी बराबर नहीं हो सकी। अब एक बार फिर प्रदेश में कुछ महीने बाद स्थानीय निकाय के चुनाव होने हैं। ऐसे में सरकार के सामने इस चुनाव की आचार संहिता लगने से पहले कार्यों की गति तेज करना सबसे बड़ी चुनौती है।

 

प्रमुख शहरों की योजनाओं के सूरत-ए-हाल

कोटा : धीमी गति नगरीय विकास मंत्री धारीवाल का गृह नगर कोटा है। शहरी विकास को लेकर उनकी पहचान है। यहां 140 करोड़ के लागत वाले दादाबाड़ी, 175 करोड़ के नार्दन बाइपास, अस्सी फीट रोड का कार्य धीमा चल रहा है।

 

जोधपुर: शहर के बीचोबीच प्रस्तावित अंडरग्राउंड मल्टीलेवल पार्किंग करीब चार साल से अटकी है। कई विवादों से गुजरते हुए नगर निगम ने कुछ माह पहले इस काम को शुरू करवाने का प्रयास किया तो कंपनियों ने रुचि नहीं दिखाई।

 

अजमेर : शहर को स्मार्ट सिटी ( Smart City ) में चयनित हुए तीन वर्ष से अधिक हो चुके हैं, लेकिन उपलब्धियों के नाम पर गिनाने के लिए कुछ खास नहीं है। पार्कों का विकास, ओपन एयर जिम लगाने, सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए स्मार्ट क्लास रूम बनाने का काम कछुआ चाल से चल रहा है। सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लास का सपना फिलहाल पूरा नहीं हुआ है। ब्रह्मपुरी में करीब 500 मीटर नाला कवर कर सडक़ का निर्माण शिलान्यास के 9 माह बाद भी शुुरू नहीं हुआ और अब इसे तकनीकी रूप से सही नहीं मानते हुए टेंडर ही निरस्त कर दिया गया। 200 करोड़ रुपए खर्च कर बनाए जा रहे एलिवेटेड रोड निर्माण की गति भी धीमी है।

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