राजस्थान: ... तो क्या Gehlot सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही फूटेगा ‘नाराजगी बम’, होंगे मध्यावधि चुनाव?

फिर गर्माया विधायकों का फोन टैपिंग प्रकरण, कांग्रेस विधायक वेदप्रकाश सोलंकी के आरोपों के बाद गरमाई सियासत, भाजपा ने जताई मध्यावधि चुनाव की आशंका, ‘मौके’ के इंतज़ार में पार्टी, मंत्रिमंडल विस्तार-फेरबदल का भाजपा नेता भी कर रहे इंतज़ार! भाजपा को आशंका मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान फूटेगा ‘नाराजगी बम’! फिलहाल बयानों के ज़रिये सरकार को घेरने में जुटे भाजपा नेता

 

By: nakul

Published: 13 Jun 2021, 12:18 PM IST

जयपुर।

गहलोत सरकार में विधायकों के कथित फोन टैपिंग प्रकरण सामने आने के बाद भाजपा ने एक बार फिर प्रदेश में मध्यावधि चुनाव होने की आशंका जता दी है। पार्टी नेताओं की दलील है कि कांग्रेस खेमे में सरकार से असंतुष्ट नेताओं की फहरिस्त बढ़ती ही जा रही है। सरकार के खुद के विधायक फोन टैपिंग जैसा गंभीर आरोप लगाकर सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहे हैं। ये तमाम परिस्थितियाँ बताती हैं कि प्रदेश में किसी भी वक्त मध्यावधि चुनाव की संभावनाएं बन सकती हैं।

 

हालांकि ये कोई पहली बार नहीं है जब भाजपा सरकार से कांग्रेस नेताओं की नाराजगी का मुद्दा उठाते हुए मध्यावधि चुनाव की संभावनाएं जताई हों। गहलोत-पायलट गुटबाजी प्रकरण गरमाने के दौरान भी पार्टी को ऐसी ही संभावनाएं दिखीं थीं। लेकिन कांग्रेस आलाकमान के हस्तक्षेप के बाद बेकाबू हो रही स्थितियों को समय रहते संभाल लिया गया था, जिससे भाजपा नेताओं की आशंकाएं वास्तविक रूप नहीं ले सकी थीं।

 

फिर मध्यावधि चुनाव का हुआ ज़िक्र
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया ने एक बयान कहा कि यदि कोई विधायक जासूसी और फोन टैपिंग की आशंका व्यक्त करता है तो मान लेना चाहिए कि प्रदेश में अघोषित आपातकाल है। नैतिक रूप से कमज़ोर हुई गहलोत सरकार अब कितने दिन और चलेगी कोई कह नहीं सकता, लेकिन ये ज़रूर है कि स्थितियां मध्यावधि चुनाव की ओर इशारा कर रही हैं।

 

मंत्रिमंडल विस्तार के इंतज़ार में भाजपा!
गहलोत सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार-फेरबदल का जहां कांग्रेस नेता बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं तो वहीँ भाजपा भी इसे लेकर टकटकी लगाए बैठी है। दरअसल, भाजपा नेताओं को आशंका है कि सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल के दौरान कांग्रेस में अंतर्कलह और नाराजगी का ‘बम’ फट सकता है।

 

भाजपा नेताओं के बयानों से भी साफ़ है कि उनकी पार्टी मंत्रिमंडल-फेरबदल के इंतज़ार में है ताकि कांग्रेस नेताओं के संभावित असंतोष को वो अपने पक्ष में भुना सके।

 

गौरतलब है कि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया ने पूर्व में दिए एक बयान में कहा था कि कांग्रेस में अंतर्कलह चरम पर है और जैसे ही मंत्रिमंडल का विस्तार होगा उसके बाद यह कलह और बढ़ेगी, जिससे मध्यावधि चुनाव की संभावनाएं प्रबल होंगी।

 

बयानों से दबाव बना रही भाजपा
कांग्रेस विधायक वेदप्रकाश सोलंकी की ओर से फोन टैपिंग का मामला उठाये जाने के बाद भाजपा के नेता भी हरकत में आ गए। इस प्रकरण के सामने आने के बाद भाजपा नेताओं ने सरकार पर निशाना साधने में ज़रा भी देर नहीं लगाई। कई वरिष्ठ नेताओं ने बयानों के ज़रिये सरकार को घेरकर दबाव बनाना शुरू कर दिया है।

 

‘ना जाने कब क्या हो जाए?...’
विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने भी फोन टैपिंग प्रकरण पर सरकार को आड़े हाथ लिया है। राठौड़ ने अपने बयान में कहा कि संविधान के खिलाफ जाकर फोन टैपिंग में महारथ हासिल कर चुकी गहलोत सरकार फिर से इसका बेजा इस्तेमाल करके जनप्रतिनिधियों को डरा रही है। अपनी ही सरकार से भयक्रांत कांग्रेस विधायकों का दबी जुबां में फोन टैपिंग की बात कहने से उनकी मनोस्थिति व पीड़ा जगजाहिर हो गई है। ना जाने कब क्या हो जाए..’

 

.. इधर, मंत्रिमंडल फेरबदल-विस्तार के लिए बनेगा फॉर्मूला!

प्रदेश में जुलाई माह में प्रस्तावित गहलोत मंत्रिमंडल और फेरबगल की कवायद अब तेज हो गई। सचिन पायलट कैंप के साथ ही अब गहलोत खेमे से जुड़े विधायक भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से लगातार मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की मांग कर रहे हैं। शनिवार को भी गहलोत खेमे के तकरीबन एक दर्जन से ज्यादा विधायकों ने मुख्यमंत्री गहलोत से मिलकर जल्द से जल्द मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की मांग की थी, जिस पर मुख्यमंत्री ने भी अपनी सहमति दी है। इसी बीच दिल्ली में भी मंत्रिमंडल फेरबदल-विस्तार की कवायद को लेकर मंथन चल रहा है। मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल में किसे मौका दिया जाए और किसे हटाया जाए इसे लेकर एक-एक नाम पर बारीकी से मंथन चल रहा है।

 

नए विधायकों को नहीं मिलेगा मौका!
मंत्रिमंडल फेरबदल विस्तार को लेकर कांग्रेस में उच्च स्तर पर एक फार्मूला तैयार हो रहा है जिसके तहत पहली बार जीत कर आए विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल पाएगी। ऐसे में सचिन पायलट कैंप और गहलोत कैंप में से पहली बार जीत कर आए विधायकों को निराशा हाथ लग सकती है, हालांकि पहले माना जा था कि सियासी संकट के दौरान सरकार का साथ देने वाले पहली बार जीतकर आए विधायकों को भी मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है, लेकिन बदले हालातों के बीच ऐसा संभव नहीं हो पाएगा।

 

बसपा से कांग्रेस में आए विधायकों पर भी संशय
दूसरी ओर बसपा से कांग्रेस में आए 6 विधायकों को भी मंत्रिमंडल में एडजस्ट किए जाएंगे या नहीं इस पर भी संशय बरकरार है। दरअसल बसपा से कांग्रेस में आए 6 विधायकों में से केवल राजेंद्र गुढ़ा ही ऐसे हैं जो दूसरी बार विधायक बनें हैं, इसके अलावा पांच विधायक पहली बार विधायक बने हैं। ऐसे में इनके मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने को लेकर संशय हैं।

 

राजनीतिक नियुक्तियों-संगठन विस्तार में किया जा सकता है एडजस्ट
सूत्रों की माने तो पहली बार जीत कर आए विधायकों को राजनीतिक नियुक्तियों और संगठन विस्तार में एडजस्ट किया जा सकता है। प्रदेश कांग्रेस का अभी फिर से संगठन विस्तार होना है, जहां पहली बार जीतकर आए विधायकों को प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी में एडजस्ट किया जा सकता है, इसके अलावा प्रदेश में 40 के लगभग बोर्ड निगम ऐसे हैं जहां राजनीतिक नियुक्तियां होनी हैं, चर्चा है कि पहली बार जीते विधायकों को बोर्ड-निगमों में एडजस्ट किया जा सकता है।

 

इसलिए तय हो रहा है फॉर्मूला
दरअसल पहली बार चुनाव जीत कर आए विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने के पीछे तय किए जा रहे फॉर्मूले के मुताबिक अगर पहली बार जीतकर आए विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह मिलती है तो इससे 2 या उससे अधिक बार चुनाव जीत कर आए विधायकों में असंतोष बढ़ सकता है। ऐसे में वरिष्ठ विधायकों की नाराजगी पार्टी को मोस ना लेनी पड़े, इसके लिए यह फॉर्मूला उच्च स्तर पर तैयार किया जा रहा है। सूत्रों की माने तो कांग्रेस आलाकमान की भी जल्द ही इस फॉर्मूले पर मुहर लग सकती है और इसके बाद इस फॉर्मूले पर अमल करते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जुलाई माह के पहले सप्ताह में मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल कर सकते हैं।

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