राजस्थान में कांग्रेस की स्थिति एक फूल दो माली जैसी

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ( Bjp Spoksperson Sudhanshu Trivedi ) ने राजस्थान कांग्रेस ( Rajasthan Congress ) की वर्तमान स्थिति को लेकर कटाक्ष किया है। त्रिवेदी ने भाजपा मुख्यालय ( Rajasthan Bjp Office ) में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि राजस्थान की जनता चकाचौंध में है कि यहां पर दो पावर सेंटर ( Two Power Centre ) के बीच क्या चल रहा है। इसे व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं माना जाए।

जयपुर।

त्रिवेदी ने कहा कि यहां की स्थिति ऐसी है कि एक प्लेन को दो पायलट एक साथ अपने—अपने तरीके से चलाना चाहे तो प्लेन का क्या होगा। एक पुरानी फिल्म का तो आपने नाम सुना ही होगा, एक फूल दो माली। दोनों चीजों का क्या हश्र होता है राजस्थान की जनता इसकी भुगतभोगी है।

दुर्गति से मति हुई विचलित
त्रिवेदी ने कहा कि राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनी है, तब से हर क्षेत्र में जिस प्रकार से गिरावट है अव्यवस्था फैली है, उसने बढ़ते—बढ़ते यह स्थिति पहुंचा दी कि लोस चुनाव में कांग्रेस पूरी तरीके से बिखर गई। थाने पर हमला करके अपराधियों को छुड़ाना अत्यधिक चिंताजनक है। दुर्गति से उनकी मति को विचलित कर दिया है। सरकर निर्णय लेती है और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट कहते हैं कि मुझे समाचार पत्रों से पता चला है। यह सरकार के सामंजस्य और सौहार्द्र का अद्भूत नमूना है। इतना ही नहीं लोकसभा हारने के बाद मन:स्थिति निगम चुनाव में जीतने तो क्या ढंग से खड़े होने का आत्मविश्वास नहीं रह गया है।

कांग्रेस ने भगत सिंह, राजगुरु को रिव्यूलेशनरी आतंकवादी कहा
त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि स्वतंत्रता आंदोलन की एकाकी व्याख्या करके राष्ट्र की आत्मा को कलंकित करने का काम कांग्रेस ने किया है। कांग्रेस ने भगत सिंह, राजगुरू, सुखदेव सहित कई स्वतंत्रता सेनानियों को रिव्यूलेशनरी आतंकवादी तक कहा था। वीर सावरकर को भारत रत्न देने की बात पर ये लोग अचानक आक्रामक हो गए। सावरकर भारत के एकमात्र ऐसे स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्हें दो जन्मों के कारावास की सजा मिली। जब वो लोग परिहास उड़ाते हैं स्वतंत्रता आंदोलने के पुरोधा बनकर। कांग्रेस के एक नेता बताओ जिसे काला पानी हुआ हो। जो पुलिस की गोली से मारा गया। लाला लाजपत राय को छोड़कर एक नेता बताइए जिस पर प्राण घातक लाठियां बरसाई हो।

दुविधा में है कांग्रेस
त्रिवेदी ने कहा कि प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय मुद्दे पर कांग्रेस में यही दुविधा दिखती है। यूएपीए के मुद्दे पर कभी एक बयान कभी दूसरा बयान समझ नहीं आता पक्ष में है या विपक्ष में। एनआरसी पर वे स्पष्ट ही नहीं कर पाए कि वे पक्ष में हैं या विपक्ष में। ट्रिपल तलाक पर कुछ बता ही नहीं पाते है कि वो किस तरफ हैं। वो हमेशा दो चित्त में रहते हैं। जब कोई भी चीज दो पाटों के बीच में फंस जाती है तो वो बच नहीं पाती है।

Umesh Sharma
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