108 का नंबर लगता नहीं, पुलिस कहती हम कुछ नहीं कर सकते, फिर कैसे करवाएं इलाज, हेल्पलाइन नंबर हैं नहीं

प्रदेशभर में लॉक डाउन के चलते सबसे अधिक संकट मरीजों के जीवन पर, मरीजों को आ रही अस्पताल आने जाने में परेशानी, कई मरीज और उनके परिजनों ने राजस्थान पत्रिका से सांझा की अपनी तकलीफ

By: pushpendra shekhawat

Published: 27 Mar 2020, 08:28 PM IST

मुकेश शर्मा / जयपुर। प्रदेशभर में लॉक डाउन के चलते सबसे अधिक संकट मरीजों के जीवन पर पड़ रहा है। मरीज को अस्पताल ले जाने के लिए पहले व्हीकल पास का इंतजाम करें या फिर अस्पताल से छुट्टी मिलने पर घर पहुंचने के लिए मरीज और परिजनों को भटकना पड़ रहा है। कई मरीज और उनके परिजनों ने राजस्थान पत्रिका से सांझा की अपनी तकलीफ। राजस्थान पत्रिका कुछ ऐसे लोगों के लिए मददगार भी बना।

मैं क्या करूं, घर से निकल गया

खातीपुरा निवासी नीरज ने बताया कि वह अकेला रहता है। उसके सीने में बहुत तेज दर्द हो रहा है। जी भी घबरा रहा है। आधा घंटे से 108 एम्बुलेंस का नंबर लगा रहा हूं, लेकिन नंबर लग ही नहीं रहा। पुलिस मदद नहीं कर रही है। अस्पताल कैसे पहुंचे। तब पत्रिका संवाददाता ने पीडि़त को झोटवाड़ा थानाधिकारी विक्रम सिंह से संपर्क करने की नसीहत दी और उसे एक निजी अस्पताल पहुंचाया गया। तब जाकर पीडि़त ने राहत की सांस ली।


मेरी मां को अस्पताल से छुट्टी मिल गई

मुरलीपुरा निवासी नेहा (परिवर्तित नाम) ने पत्रिका से संपर्क कर कहा कि उसकी मां पूनम (परिवर्तित नाम) को एसएमएस अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। लेकिन घर जाने को कोई साधन नहीं मिल रहा है। दो घंटे से भटक रहे हैं। पुलिस कन्ट्रोल रूम 100 नंबर पर फोन लगाया। लेकिन पुलिसकर्मी ने कहा, हम कुछ नहीं कर सकते हैं। अब कहां जाए। तब पत्रिका संवाददाता ने परिवहन विभाग द्वारा कुछ अस्पतालों के बाहर ऑटो चलाए जाने की जानकारी दी। हालांकि अस्पतालों में इस संबंध में मुख्य प्रवेश द्वार पर कोई हेल्पलाइन नंबर नहीं चस्पा होने से ऑटो तलाशने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। बाद में निजी एम्बुलेंस के जरिए उन्हें घर जाने की नसीहत दी गई।

निजी अस्पताल से छुट्टी मिल गई, अब

अपेक्स सर्कल स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती मरीज को छुट्टी मिल गई। मरीज के परिचित मनीष ने राजस्थान पत्रिका से संपर्क कर पीड़ा बताई। उसने बताया कि कहीं से कोई मदद नहीं मिल रही है। हम जा नहीं सकते और अस्पताल से वो लोग आ नहीं सकते। तब निजी एम्बुलेंस के जरिए मरीज और अन्य परिजनों को घर पहुंचने का सुझाव दिया गया।


रात्रि गश्त पर साहब, शाम को आना

सरकार ने परिवहन विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस को इमरजेंसी में लोगों के वाहन पास बनाने की सुविधा दे रखी है। लेकिन मेडिकल इमरजेंसी में यहां तक पहुंचने के लिए भी लोगों को मशक्कत करनी पड़ रही है। परिवहन विभाग ने ऑनलाइन व्यवस्था कर रखी है। लेकिन कई लोगों के पास इंटरनेट या फिर प्रिंट नहीं निकालने की सुविधा नहीं होने पर यह व्यवस्था बहुत कारगर नहीं हो रही है। वहीं पुलिस कमिश्रर ने सभी क्षेत्रीय एसीपी को पास बनाने को अधिकृत किया है। लेकिन नाकाबंदी में तैनात पुलिसकर्मी एसीपी दफ्तर तक पहुंचने में बाधा बन रहे हैं। कई पहुंच भी जाए तो रात्रि गश्त में अधिकारी की ड्यूटी होने पर पास बनवाने में दिक्कत आ रही है। सबसे अधिक परेशानी किडनी का डायलिसिस कराने वाले मरीजों को आ रही है।

सुझाव :

- सभी नाकाबंदी प्वाइंट पर पुलिसकर्मियों के पास वायरलैस होता है। घर से निकलने वाले मरीज इजाल चलने संबंधित दस्तावेज दिखाने पर उन्हें व्हीकल से केवल अस्पताल आने-जाने की छूट दी जाए।
- अचानक तबीयत खराब होने पर मरीज जिस वाहन में जिस अस्पताल जा रहा है, सबसे पहले मिलने वाले नाकाबंदी प्वाइंट पर तैनात पुलिसकर्मी उक्त वाहन नंबर की वायरलैस पर अन्य नाकाबंदी प्वाइंट पर संदेश दे अस्पताल तक उसका मार्ग सुचारू करवाएं। उक्त वाहन निर्धारित अस्पताल के मार्ग के अलावा अन्य मार्ग पर जाए तो उसके खिलाफ कार्रवाई करें।
- मरीज को अस्पताल ले जाने और अस्पताल से घर पहुंचने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए जाएं, लेकिन हेल्पलाइन नंबर सुचारू चलना चाहिए

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pushpendra shekhawat Desk
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