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Rajasthan News: बांध-जलस्रोत तोड़ते दम, शीर्ष कोर्ट की भी नहीं सुन रहे अफसर, कब लौटेंगे मूल स्वरूप में

देश के शीर्ष कोर्ट (सुप्रीम कोर्ट) और राजस्थान के शीर्ष कोर्ट (हाईकोर्ट) ने जलस्रोतों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए अभियान चलाने का निर्देश दिया, लेकिन अधिकारियों ने बुलडोजर अभियान चलाना तो दूर अतिक्रमण हटाने का प्लान तक नहीं बनाया।

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पिछले 70 साल में जयपुर के रामगढ़ बांध सहित प्रदेश के अनेक जलस्रोत अतिक्रमण के कारण दम तोड़ चुके, जिनको लेकर हाईकोर्ट पिछले 20 साल में चार बार निर्देश दे चुका कि जलस्रोतों को अतिक्रमण मुक्त कर वर्ष 1955 की स्थिति में लाया जाए। पिछले साल भी देश के शीर्ष कोर्ट (सुप्रीम कोर्ट) और राजस्थान के शीर्ष कोर्ट (हाईकोर्ट) ने जलस्रोतों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए अभियान चलाने का निर्देश दिया, लेकिन अधिकारियों ने बुलडोजर अभियान चलाना तो दूर अतिक्रमण हटाने का प्लान तक नहीं बनाया। अधिकारियों की मिलीभगत के कारण दम तोड़ रहे तालाब, जोहड़, बांध और नदियों सहित अन्य जलस्रोतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अजमेर की आनासागर और जयपुर की मानसागर झील के क्षेत्र में नियम विरूद्ध निर्माण का मामला तो सुप्रीम कोर्ट को मुख्य सचिव के ध्यान में लाना पड़ा और कोर्ट की सख्ती के बाद नियम विरूद्ध निर्माण रुक पाए।

पत्रिका समूह के प्रधान संपादक के पत्र के आधार पर जनहित याचिका

12 जनवरी 2017: मास्टर प्लान मामला: राजस्थान पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी के पत्र के आधार पर दर्ज जनहित याचिका पर निर्देश दिया कि राज्य सरकार प्राकृतिक संसाधनों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए तत्काल अभियान चलाए। प्राकृतिक संसाधनों पहाड,वन व नदी सहित सभी जलस्रोतों के बहाव क्षेत्र सुरक्षित व संरक्षित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए। अभियान चलाकर जलस्रोत सहित सभी प्राकृतिक संसाधनों को 1955 की स्थिति में लाया जाए और नियम विरूद्ध किए गए आवंटन निरस्त हों।

24 अक्टूबर 2024: नदियों के किनारे कब्जा किसका: सिकुड़ती नदियां व जलीय जीव पूछ रहे: स्वप्रेरणा से जनहित याचिका दर्ज कर हाईकोर्ट ने निर्देश दिया,सभी नदियों व जलस्रोतों को अतिक्रमण मुक्त कर मूल स्वरूप में लाया जाए। राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में तथा संभाग व जिला स्तर पर भी कमेटियां बनाई जाए, तत्काल जलस्रोतों से अवैध निर्माण हटाए जाएं। अतिक्रमण न हो, इसके लिए कानूनी प्रावधान हैं।

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती

14 अक्टूबर 2024: नदियों व जलभराव क्षेत्रों में अतिक्रमण: नदियों के किनारे व जलभराव क्षेत्रों में अवैध निर्माण पर दखल कर केन्द्र सरकार व केन्द्रीय जल आयोग से जवाब मांगा।
25 नवंबर 2019: तालाब व नहर की भूमि का आवंटन अवैध: उत्तर प्रदेश के मामले में कहा कि देश में कई जगह जलसंकट से
लोगों को पीने का पानी नहीं मिल रहा। तालाब व नहर की भूमि का आवंटन अवैध है। ऐसे में पुरानी स्थिति बहाल कर पानी के बहाव
की बाधाएं हटाई जाएं।
8 अगस्त 2013: केरल में झील बचाने की पहल: पर्यावरण व पारिस्थितिकी जनहित से जुड़ा मामला है। ऐसे में नियम विरूद्ध निर्माण को हल्के में नहीं लिया जाए।

5 अप्रेल 2010: जलस्रोत संरक्षण सर्वोपरि: आंध्रप्रदेश में रिंग रोड निर्माण के मामले में कहा कि जितना संभव हो जलस्रोत की भूमि को निर्माण से अलग रखा जाए।
25 जुलाई 2001: मूल स्वरूप में लाओ तालाब : यूपी में तालाब भूमि मामले में कहा कि आवंटन रद्द कर तालाब को मूल स्वरूप में लाया जाए।

हाईकोर्ट के निर्देश

2 अगस्त 2004: अब्दुल रहमान मामला: नदी-नाले सहित सभी जलस्रोतों के बहाव क्षेत्र अतिक्रमण मुक्त कर 15 अगस्त 1947 की स्थिति में लाए जाएं।
29 मई 2012: मर गया रामगढ़ मामला: अगस्त 2011 में स्वप्रेरणा से दर्ज मामले में कहा कि राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1955 लागू होने के बाद नदी, नाले, जोहड़, जलाशय सहित सभी जलस्रोतों व बहाव क्षेत्र में किए गए आवंटन निरस्त कर 1955 की स्थिति में लाए जाएं।