भाजपा में खास सीटों पर नहीं बनी बात, 36 के आंकड़े में उलझीं 38 सीटें

भारतीय जनता पार्टी ने 162 प्रत्याशियों की सूची तो घोषित कर दी लेकिन शेष रही 38 सीटों पर प्रत्याशियों का चयन पार्टी के लिए सिरदर्द बना हुआ है।

By: santosh

Updated: 15 Nov 2018, 08:09 AM IST

जयपुर। भारतीय जनता पार्टी ने 162 प्रत्याशियों की सूची तो घोषित कर दी लेकिन शेष रही 38 सीटों पर प्रत्याशियों का चयन पार्टी के लिए सिरदर्द बना हुआ है। यों कहें कि इन सीटों पर अब भी 36 का आंकड़ा बना हुआ है।

 

कभी केंद्रीय नेतृत्व से पटरी नहीं बैठ रही तो कभी आरएसएस आरएसएस वीटो ले रहा है। कुछ सीटों पर कोर कमेटी के सदस्यों में भी एकराय नहीं बन रही। इनमें मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के सबसे नजदीक समझे जाने वाले मंत्री यूनुस खान का नाम शामिल है।

 

इसके अलावा अलवर लोकसभा के हालिया उपचुनाव नतीजों में करारी हार झेल चुके मंत्री जसवंत सिंह यादव का टिकट रोक रखा है। वहीं अलवर जिले की थानागाजी सीट से आने वाले एक और केबिनेट मंत्री हेमसिंह भड़ाना का टिकट भी फंसा हुआ है। इनके अलावा कुछ अन्य प्रमुख विधायकों के टिकटों को लेकर पेच फंसा हुआ है। विवादों में उलझी ऐसी टॉप 10 सीटों का गणित यों समझें।

 

क्या उत्तरप्रदेश मॉडल पर हिंदुत्व का कार्ड?
भारतीय जनता पार्टी संभवत: राजस्थान में उत्तरप्रदेश मॉडल की तरह हिंदुत्व का कार्ड खेलना चाहती है। इसलिए अब तक मुस्लिम बहुल क्षेत्र में से कई सीट पर नाम घोषित नहीं किया। यहां तक की अपने मंत्री एवं डीडवाना से विधायक यूनुस खान तक का नाम फाइनल नहीं हो पा रहा है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे चाहती हैं कि यूनुस को ही टिकट मिले। सूत्रों के अनुसार इसके उलट राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की लॉबी तैयार नहीं। चर्चाएं ये भी राजनीतिक गलियारों में है कि यूनुस खान सीट बदलने की कोशिश में भी हैं।


बेटे को टिकट दिलाने की चाह
केबिनेट मंत्री जसवंत यादव बहरोड़ से विधायक हैं। हालांकि पार्टी ने उन्हें लोकसभा का उप चुनाव लड़वाया था लेकिन केबिनेट मंत्री होने के बावजूद वह गत लोकसभा उपचुनाव के दौरान अपने विधानसभा क्षेत्र तक में नहीं जीत सके। इस स्थिति को भांपकर यादव ने मांग उठाई कि उनके बेटे को टिकट दिया जाए। पार्टी यहां दो अन्य नामों पर विचार कर रही है।

 

ग्राउंड सर्वे में आई कमजोर स्थिति
केबिनट मंत्री हेमसिंह भड़ाना यहां से विधायक हैं। बताया जाता है कि केंद्रीय नेतृत्व ने ग्राउंड सर्वे कराया तो उनकी स्थिति कमजोर आई। ऐसे में केन्द्रीय नेतृत्व उनकी जगह दूसरे उम्मीदवार को मौका देना चाहता है। हालांकि, अब तक यह तय नहीं हो पा रहा कि उनकी जगह उतारा किसे जाए। अब तक किसी एक नाम पर सहमति नहीं बन सकी है।

 

रोहिताश्व और देवीसिंह के बीच दावेदारी
पिछली बार रोहिताश शर्मा को टिकट दिया लेकिन मोदी लहर में बड़े अंतर से हारे। पार्टी का मानना है कि यहां से कांग्रेस की विधायक के सामने रोहिताश की जगह किसी और को टिकट देकर उतारा जाए। अलवर यूआईटी चेयरमैन देवीसिंह शेखावत भी दावेदारी जता रहे हैं। हालांकि कोर कमेटी का एक खेमा रोहिताश की पैरवी में लगा है।

 

विधायक की रिपोर्ट में कुछ गड़बड़!
वर्तमान विधायक मामन सिंह यादव की सर्वे रिपोर्ट भी गड़बड़ है। पार्टी यहां से केबिनट मंत्री जसवंत सिंह की पत्नी को टिकट देना चाहती है लेकिन जिले में एक गुर्जर उम्मीदवार को सेट करने के चक्कर में यह सीट भी रुकी हुई है।

 

संघनिष्ठ विधायक पर एक राय नहीं
संसदीय सचिव शत्रुघन गौतम यहां से विधायक है। अजमेर लोकसभा उपचुनाव में पार्टी को यहां से हार मिली थी। पार्टी केकडी से कई नामों पर चर्चा कर चुकी है। संघ निष्ठ गौतम को टिकट देने के मामले में भी एकराय नहीं बन पा रही।

 

दीयाकुमारी और किरोड़ी के बीच अटकी सीट
विधायक दीया कुमारी ने एक दिन पहले ही यहां से चुनाव नहीं लडऩे की इच्छा जाहिर की है। राजपा से भाजपा में शामिल होकर राज्यसभा सदस्य बने किरोड़ीलाल मीना अब यहां से चुनाव लडऩे के इच्छुक हैं। हालांकि कोर कमेटी का सबसे मजबूत खेमा नहीं चाहता कि मीना को केंद्र से राज्य की राजनीति में फिर उतारा जाए। ऐसे में यहां भी नाम तय नहीं हो सका।


विधायक और सांसद हैं आमने-सामने
संसदीय सचिव ओमप्रकाश हुडला यहां से विधायक है। राज्यसभा सांसद किरोड़ीलाल मीना के उनसे मधुर संबंध नहीं हैं। ऐसे में मीना साफ कर चुके हैं कि हुडला को टिकट दिया जाता है तो वह उनके पक्ष में पार्टी के साथ खड़े नहीं रहेंगे। ऐसी स्थिति में पार्टी ने इस सीट पर भी फिलहाल प्रत्याशी की घोषणा रोक ली है।

 

आला नेताओं की नाराजगी
खान राज्य मंत्री सुरेन्द्रपाल सिंह टीटी इस सीट से विधायक है। केन्द्रीय नेतृत्व ने ग्राउंड सर्वे में उनकी स्थिति भी कमजोर आई है। पार्टी का मानना है कि स्थानीय राजनीतिक समीकरण भी उनके पक्ष में नहीं बन पा रहे। सूत्रों के अनुसार उनके प्रति पार्टी के कुछ आला नेताओ की नाराजग़ी भी उनका टिकट रुकने में महत्वपूर्ण है।

 

बयानबाजियों के कारण टिकट में गलफांस
भवानी सिंह राजावत यहां से लगातार तीसरी बार विधायक है। पिछले पांच साल के दौरान राजावत की गाहे-बेगाहे बयानबाज़ी से पार्टी को परेशानी झेलनी पड़ी। सूत्रों के अनुसार पार्टी यहां कांग्रेस के प्रत्याशी का इंतजार कर रही है। संभवना है कि यदि मुस्लिम को कांग्रेस टिकट नहीं देती है तो राजावत के टिकट पर खतरा हो सकता है।

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