Bal Diwas Special: ये योजनाएं आपकी बालिकाओं के सपनों को देंगी नई उड़ान

dinesh saini

Publish: Nov, 14 2017 01:25:46 (IST)

Jaipur, Rajasthan, India
Bal Diwas Special: ये योजनाएं आपकी बालिकाओं के सपनों को देंगी नई उड़ान

राजस्थान में भी अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के लिए विशेष योजनाएं चलाई गई है। जिसमें खासतौर पर बालिकाओं को विशेष महत्व दिया गया है...

भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल की जंयती को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत में इनके जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन बच्चों के अधिकार, देखभाल और शिक्षा के बारे में लोगों को जागरुक किया जाता है। बाल दिवस की नींव 1925 में रखी गई थी, जिसके बाद 1953 में दुनिया भर में इसे मान्यता मिली। यूएन ने 20 नवबंर को बाल दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की लेकिन यह अन्य देशों में अलग-अलग दिन मनाया जाता है। यह दिन बच्चों के बेहतर भविष्य और उनकी मूल जरूरतों को पूरा करने की याद दिलाता है। इसी उद्देश्य से राजस्थान में भी अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के लिए विशेष योजनाएं चलाई गई है। जिसमें खासतौर पर बालिकाओं को विशेष महत्व दिया गया है। आइए जानते हैं राजस्थान में बालिकाओं के लिए चलाई गई इन योजनाओं के बारे...

- गार्गी पुरस्कार (जूनियर) योजना: इस योजना में डाईट द्वारा आयोजित कक्षा 8 परीक्षा में पंचायत एवं जिला मुख्यालय पर सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाली बालिकाओं को कक्षा 9 एवं 10 में नियमित अध्ययनरत रहने पर प्रतिवर्ष 1000/- रुपए एवं प्रमाण पत्र देकर पुरस्कृत किया जाता है।

-नि:शुल्क साइकिल वितरण योजना: विद्यालयों से अधिक दूरी के कारण होने वाली परेशानियों के चलते बालिकाओं के बीच में पढाई छोडऩे की प्रवृत्ति पर लगाम लगाने के उद्देश्य से राज्य सरकार की ओर से नि:शुल्क साइकिल वितरण योजना संचालित की गई। इसके अन्तर्गत सरकारी माध्यमिक उच्च माध्यमिक विद्यालयों में मेधावी छात्राओं को नि:शुल्क साइकिलों का विरतण किया जाता है।

-नि:शुल्क स्कूटी वितरण: मेधावी छात्राओं को सरकारी स्कूलों में नियमित अध्ययन कराने का उद्देश्य से यह योजना प्रारभ की गई।च्चशिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार की ओर से मेधावी छात्रा स्कूटी वितरण योजना शुरू की गई है। इस योजना के अंतर्गत सरकारी कॉलेजों में अध्ययनरत 12वीं की टॉपर मेधावी छात्राओं को निशुल्क स्कूटी प्रदान की जाती है।

- खेलकूद योजना : महिलाओं और बालिकाओं को खेलों के प्रति आकर्षित करने के लिए पंचायत स्तर, राज्य स्तर और राष्ट्रीय स्तर पर भाग लेने का अवसर। इसमें प्रतियोगिता में भाग लेने पर खिलाडिय़ों को नियमानुसार यात्रा व दैनिक भत्ते का भुगतान किया जाता है।

- मुख्यमंत्री हमारी बेटी योजना: इसके अंतर्गत मेधावी टॉपर छात्राओ को आर्थिक सहायता देने के लिए एवं बालिकाओ के शिक्षा के स्तर को उच्च करने के मकसद से इस योजना की शुरुआत की गई। कुछ बेटिया आर्थिक स्थिति कमज़ोर होने की वजह से अपनी पढ़ाई के सपने को साकार नहीं कर पाती है और पिछड़ जाती है इसी को देखते हुए इस योजना का शुभारम्भ किया गया। इसके अंतर्गत माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की दसवीं की परीक्षा में हर जिले की तीन मेधावी बेटियों को ‘मुख्यमंत्री हमारी बेटी योजना’ के तहत 2.25 लाख रुपए (प्रत्येक छात्रा को) की वित्तीय सहायता। राज्य के हर जिले में दो मेधावी व एक बीपीएल परिवार की मेधावी बेटी को इस योजना के तहत वित्तीय सहायता। दसवीं की परीक्षा में जिले की एक बीपीएल परिवार की बेटी को भी 1 लाख रुपए उच्च शिक्षा के लिए दिए जाएंगे।

- मुख्यमंत्री राजश्री योजना: बेटियां घर की लक्ष्मी हैं लेकिन कई कारणों से बालिकाओं की जन्म दर कम रही है। बेटियों के जन्म को प्रोत्साहित करने, उन्हें शिक्षित व सशक्त बनाने के लिए सरकार ने 1 जून 2016 से मुख्यमंत्री राजश्री योजना राज्य में शुरू की है।बालिका के जन्म से लेकर कक्षा 12वीं तक बेटी की पढ़ाई, स्वास्थ्य व देखभाल के लिए अभिभावक को 50,000 तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।

- ग्रामीण बालिकाओं के लिए ट्रांसपोर्ट वाउचर योजना: ग्रामीण क्षेत्र की राजकीय माध्यमिक एवं राजकीय उच्च माध्यमिक में कक्षा 9 से 12 में अध्ययनरत छात्राओं को उनके निवास स्थान से विद्यालय तक और विद्यालय से निवास स्थान तक आने-जाने के लिए ट्रांसपोर्ट वाउचर उपलब्ध कराना। इसके लिए निवास स्थान से विद्यालय की दूरी 5 किमी से अधिक होनी चाहिए तथा पांच बालिकाओं का समूह होना आवश्यक है।

- पालनहार योजना: इसके अंतर्गत अनाथ बच्चों के पालन-पोषण, शिक्षा आदि की व्यवस्था उपलब्ध करवाने के मकसद से इस योजना की शुरुवात की गई। अनाथ बच्चों के पालन-पोषण, शिक्षा आदि की व्यवस्था संस्थागत नहीं की जाकर समाज के भीतर ही बालक/बालिका के निकटतम रिश्तेदार/परिचित व्यक्ति के परिवार में करने के लिए इच्छुक व्यक्ति को पालनहार बनाकर राज्य की ओर से आर्थिक सहायता देना है। पालनहार परिवार की वार्षिक आय 1.20 लाख रूपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। ऐसे अनाथ बच्चों को 2 वर्ष की आयु में आंगनबाड़ी केन्द्र पर तथा 6 वर्ष की आयु में स्कूल भेजना अनिवार्य है।

- बेटी बचाओ बेटी पढाओ: इस योजना का शुभारंभ माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 22.01.15 को प्रतिकूल शिशु लिंगानुपात में सुधार लाने, बालिका शिक्षा, बालिकाओं के विकास के उद्देश्य से किया गया। इसके प्रथम चरण में राज्य के 10 जिले सम्मिलित किए गए। दूसरे चरण में 4 जिलों को और सम्मिलित किया गया।

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