170 करोड़ से बना BRTS Corridor हटाएगी राजस्थान सरकार

स्टेट रोड सेफ्टी काउंसिल की Meeting में हुआ बड़ा फैसला...

दिल्ली के बाद जयपुर में भी खत्म करने की तैयारी...

सियासत में उलझता रहा बीआरटीएस कॉरिडोर...

जयपुर। सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने और निजी वाहनों की तुलना में गंतव्य स्थल पर तेजी से पहुंचने के लिए बनाया गया बीआरटीएस (बस रेपिड ट्रांजिट सिस्टम) कॉरिडोर सियासत की भेंट चढ़ रहा है। स्टेट रोड सेफ्टी काउंसिल ने जयपुर शहर में बने बीआरटीएस कॉरिडोर को हटाने का फैसला किया है। काउंसिल की 16वीं बैठक में यह निर्णय किया गया और अब इसका प्रस्ताव नगरीय विकास विभाग को भेजा जाएगा। इसी मामले में काउंसिल की अगली बैठक होगी, जिसमें नगरीय विकास मंत्री को भी बुलाया जाएगा। परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। मंत्री का दावा है कि इस कॉरिडोर के कारण सड़क हादसे बढ़ते जा रहे हैं, इसलिए इसे हटाना जरूरी है। हालांकि, यह इतना आसान नहीं होगा, क्योंकि कॉरिडोर निर्माण की फंडिंग केन्द्र सरकार स्तर पर हुई है। राज्य सरकार को यह प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजना होगा और वहां से इस पर मुहर लगेगी। अभी सीकर रोड और अजमेर रोड से न्यू सांगानेर रोड तक करीब 16.1 किलोमीटर लम्बाई में कॉरिडोर का निर्माण किया गया है। इस पर करीब 170 करोड़ रुपए लागत आई थी। इसके अलावा यूटिलिटी सेवाओं को हटाने व अन्य खर्चे अलग हैं। उधर, विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को समय रहते इसे उपयोगी बनाने पर फोकस करना चाहिए था। गौरतलब है कि डेढ़ माह पहले ट्रेफिक पुलिस ने भी इसे बंद कर दिया था।

कांग्रेस सरकार में शुरू हुआ, इसी सरकार में होगा खत्म!
शहर में बीआरटीएस कॉरिडोर की शुरुआत कांग्रेस सरकार में वर्ष 2010 में की गई थी। उस समय केन्द्रीय मंत्री जयपाल रेड्डी सीकर रोड पर बने कॉरिडोर का उद्घाटन करने आए थे। उस दौरान केन्द्र और राज्य दोनों तरफ कांग्रेस सरकार ही थी। हालांकि, बाद में भाजपा सरकार में भी इस दिशा में फोकस नहीं किया गया। अब दिल्ली की तर्ज पर यहां भी इसे हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

मंत्री का दावा- 1271 हादसों में से 70 फीसदी कॉरिडोर में!
परिवहन मंत्री ने बताया कि राजधानी में वर्ष 2018 में सड़क दुर्घटना में 1271 मौत हुई। इनमें से 70 फीसदी मौत बीआरटीएस कोरिडोर के कारण हुई है। ऐसे में इसे हटाया जाना जरूरी है।

रिकवरी निकाल सकती है केन्द्र सरकार
इस प्रोजेक्ट का निर्माण केन्द्र सरकार फंडिंग से हुई है। ऐसे में इसे हटाने से पहले शहरी विकास मंत्रालय से अनुमति लेनी ही होगी। राज्य सरकार को हटाने की मुख्य वजह बतानी होगी। केन्द्र सरकार भी राज्य सरकार से पूछ सकती है कि कॉरिडोर के बेहतर संचालन के लिए राज्य सरकार ने क्या किया। राज्य सरकार के दावे और तर्क से संतुष्ट नहीं होने पर मंत्रालय रिकवरी निकाल सकती है। यह रिकवरी केन्द्र सरकार द्वारा दी गई फंडिंग राशि के रूप में होगी।

अभी यहां है कॉरिडोर
-7.1 किलोमीटर लम्बाई में सीकर रोड पर एक्सप्रेस-वे से अम्बाबाड़ी तक कॉरिडोर। (निर्माण लागत 75 करोड़ रुपए...संचालन शुरू वर्ष 2010)
-9 किलोमीटर लम्बाई में अजमेर रोड से किसानधर्म कांटा होते हुए न्यू सांगानेर रोड (बी-2 बायपास तिराहा) तक। (निर्माण लागत 90 करोड़ रुपए...संचालन शुरू वर्ष 2015)

इन टुकड़ों को जोड़ते तो मिलती राहत..
13 किलोमीटर का बीच का हिस्सा (अम्बाबाडी से गवर्नमेंट हॉस्टल, अजमेर पुलिया, सोढाला होते हुए पुरानी चूंगी तक) जुड़े तो राहत मिले। इससे 29 किलोमीटर लम्बाई में एक साथ कॉरिडोर में बसें चल सकेंगी। उन्हें अन्य वाहनों के बीच चलने और जाम में फंसने से निजात मिलेगी। इसकी प्लानिंग भी हुई, लेकिन सड़क पर कॉरिडोर के लिए कम जगह का हवाला दे काम नहीं होने दिया।

नेताओं की प्राथमिक सूची से गायब...
-सीकर रोड पर एक्सप्रेस-वे से एयरपोर्ट तक कॉरिडोर का दायरा बढ़ाने की प्लानिंग की गई। इसके लिए अम्बाबाड़ी-पानीपेच से एयरपोर्ट तक 18.5 किलोमीटर लम्बाई में रूट तैयार भी किया गया, लेकिन यहां कॉरिडोर के लिए डेडिकेटेड लेन ही तैयार नहीं कर पाए।
-न्यू सांगानेर रोड पर बी-2 बायपास चौराहे तक कॉरिडोर बना है। इसे एयरपोर्ट टर्मिनल 2 और सांगानेर की तरफ करीब 6.94 किलोमीटर लम्बाई में कॉरिडोर बढ़ाना था। केन्द्र सरकार ने मंजूरी भी दे दी थी, लेकिन जेएनएनएयूआरम प्रोजेक्ट खत्म होने के बाद ठप। इसके बाद राज्य सरकार ने रूचि नहीं ली।
-मौजूदा सांसद, विधायक, मंत्री किसी ने भी स्तर पर इसमें रूचि नहीं ली गई। बस, कुछ विशेषज्ञ इस पर चिंता जताते रहे।

जनता के लिए यूं बनी आफत..
-सीकर रोड पर बीआरटीएस कॉरिडोर बनने से अन्य वाहनों के आवागमन के लिए जगह कम बची। कई प्वांट्स पर जाम की स्थिति बनी रहती है। अतिक्रमण नहीं हटाए। कॉरिडोर के लिए जरूरी जमीन अवाप्त नहीं की।
-सड़क के एक छोर से दूसरे हिस्से की तरफ जाने के लिए लम्बी दूरी तय करनी पड़ रही। इसका साइड इफेक्ट यह रहा कि लोग रेलिंग तोड़कर बीच में से गुजर रहे। इससे दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।
-कॉरिडोर में जेसीटीएसएल की पर्याप्त बसें नहीं चलने से खाली पड़ा रहा। नौकरशाहों ने इन बसों की संख्या बढ़ाने की बजाय यहां रोडवेज, लोक परिवहन की बसों के संचालन की अनुमति ही दी। जबकि, राज्य सरकार की ही जिम्मेदारी तय गई थी कि यहां बीआरटी बसें चलाई जा सकें।

सरकार इस तरह हो सकता है समाधान...
-सार्वजनिक परिवहन के सभी संसाधनों की संख्या आबादी के अनुपात में करें। शहरभर में इनके रूट निर्धारित हो, ऐसा एक भी मुख्य रास्ता नहीं बचे जहां सार्वजनिक परिवहन नहीं पहुंच पाए। इसके लिए जेसीटीएसएल बस सेवा, मेट्रो, ई-रिक्शा, मिनी बस सभी का समन्वय हो।
-सरकारी स्टडी रिपोर्ट में चिन्हित रूट पर यात्रियोें की संख्या और उसी आधार पर परिवहन सुविधा का आकलन कर काम शुरू करें।
-बीआरटीएस कॉरिडोर का दायरा बढ़े या फिर सीकर रोड व न्यू सांगानेर रोड पर बने कॉरिडोर का अन्य उपयोग हो।

Bhavnesh Gupta Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned