स्कूल फीस पर राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला, इतनी फीस ही ले सकेंगे स्कूल

कोरोना काल (COVID-19) में निजी स्कूलों को फीस वसूली के मामले में राजस्थान हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने निजी स्कूल संचालकों एक बड़ी राहत देते हुए कहा है कि वे अपनी टोटल फीस का 70 प्रतिशत पेरेंट्स से तीन किस्तों में चार्ज कर सकते हैं। वहीं अगर कोई पेरेंट्स यह फीस नहीं दे सकता है तो स्टूडेंट्स को दी जा रही ऑनलाइन क्लासेज रोकी जा सकती है। लेकिन उसका नाम स्कूल से नहीं काटा जाएगा। साथ ही नो स्कूल नो फीस के मुद्दे को लेकर संयुक्त अभिभावक समिति को भी कोर्ट ने पक्षकार बना लिया है।

By: Swatantra Jain

Published: 07 Sep 2020, 08:20 PM IST


कोरोना काल (COVID-19) में निजी स्कूलों को फीस वसूली के मामले में राजस्थान हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने निजी स्कूल संचालकों एक बड़ी राहत देते हुए कहा है कि वे अपनी
टोटल फीस का 70 प्रतिशत पेरेंट्स से तीन किस्तों में चार्ज कर सकते हैं। वहीं अगर कोई पेरेंट्स यह फीस नहीं दे सकता है तो स्टूडेंट्स को दी जा रही ऑनलाइन क्लासेज रोकी जा सकती है। लेकिन उसका नाम स्कूल से नहीं काटा जाएगा। हाई कोर्ट ने कहा है कि स्कूल कुल फीस का 70 फीसदी पेमेंट ले सकेंगे। बच्चों के माता-पिता को इसका भुगतान अगले साल 31 जनवरी तक तीन किस्तों में करना होगा। यह फैसला राजस्थान हाई कोर्ट न्यायमूर्ति एसपी शर्मा ने दिया है।

प्राइवेट स्कूलों की अपील पर आया है आदेश
राजस्थान सरकार के फैसले को चुनौती देने वाले प्राइवेट स्कूलों की अपील पर हाई कोर्ट का यह आदेश आया है। आदेश तीन याचिकाओं पर दिया गया था जिसके माध्यम से लगभग 200 स्कूलों ने राजस्थान सरकार के फैसले को चुनौती दी थी। राजस्थान सरकार ने स्कूलों से कोरोना के दौरान बंद के समय अभिभावकों से फीस न वसलूने की बात कही थी।
यह आदेश सोमवार को जस्टिस एसपी शर्मा की अदालत ने कैथोलिक एजुकेशन सोसायटी, प्रोग्रेसिव एजुकेशन सोसायटी और अन्य याचिका पर दिया। इन तीन याचिकाओं के जरिए करीब 200 स्कूलों ने राज्य सरकार के फीस स्थगन के आदेश को चुनौती दी थी।

राज्य सरकार के आदेश को दी गई थी चुनौती

इन तीनों याचिकाओं के माध्य्म से प्राइवेट स्कूलों ने राज्य सरकार के 9 अप्रैल और 7 जुलाई के फीस स्थगन के आदेश को चुनौती दी थी। राज्य सरकार के इन आदेशों के चलते प्राइवेट स्कूल फीस नहीं ले पा रहे थे। असल में, कोरोना संकट की वजह से राजस्थान सरकार ने प्राइवेट स्कूलों के खुलने तक फीस वसूली पर रोक लगा रखी थी। राजस्थान सरकार ने प्राइवेट स्कूलों द्वारा ली जाने वाली फीस को स्कूलों के दोबारा खुलने तक स्थगित रखने का फैसला लिया था।

राज्य सरकार ने लगाई थी फीस लेने पर रोक

कोरोना वायरस महामारी को देखते हुए राज्य सरकार ने 9 अप्रैल को राज्य के प्राइवेट स्कूलों द्वारा अग्रिम फीस लेने पर तीन महीने के लिए 30 जून तक रोक लगा दी थी। सरकार ने 9 जुलाई को इस अवधि को स्कूल के दोबारा खुलने तक बढ़ा दिया था। शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने कोरोना काल में प्राइवेट स्कूलों को 30 जून तक तीन महीने की स्कूल फीस स्थगित करने के आदेश दिए गए थे। इस आदेश को बाद में स्कूल खुलने तक आगे बढ़ाया गया है।

निजी स्कूलों की जीत हो गई...


निजी स्कूलों की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता दिनेश यादव, कमलाकर शर्मा, अलंकृता शर्मा और शैलेष प्रकाश शर्मा ने कोर्ट में कहा कि निजी स्कूल्स CBSC के निर्देश से अप्रेल माह से ही स्टूडेंट्स को ऑनलाइन क्लासेज दे रहे हैं। वहीं लॉकडाउन में भी स्कूल टीचर्स को पूरा भुगतान कर रही हैं। फीस चार्ज नहीं कर पाने से निजी स्कूलों को बड़ा नुकसान हो रहा है। ऐसे में राज्य सरकार के आदेश पर रोक लगाई जाए। कोर्ट ने आदेश पर रोक लगाने से तो इनकार कर दिया, लेकिन स्कूलों को तीन किस्तों में भुगतान लेने की छूट दे दी।

अभिभावक भी बने पक्षकार, जारी रहेगी सुनवाई

संयुक्त अभिभावक समिति प्रवक्ता ईशान शर्मा ने कोर्ट के निर्णय के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अभिभावकों के सम्मान में पिछले 4 माह से चले आ रहा आंदोलन आगे भी जारी रहेगा, अभिभावकों को आज कोर्ट से कुछ राहत प्राप्त हुई है। निजी स्कूल संचालक और सरकार पहले ही अभिभावकों के हितों की रक्षा करने से पल्ला झाड़ चुकी है और अभिभावकों को संघर्ष करने पर मजबूर कर दिया। मंगलवार को समिति के पदाधिकारी बैठक कर आगे की रणनीति निर्धारित करेंगे।

साथ ही नो स्कूल नो फीस के मुद्दे को लेकर संयुक्त अभिभावक समिति के सदस्यों की ओर से स्कूलों द्वारा सरकार के फैसले पर लगाई गई स्थगन अर्जी में पक्षकार बनने की अर्जी को भी कोर्ट ने सोमवार को स्वीकार कर लिया है। एडवोकेट अमित छंगाणी ने बताया कि राजस्थान उच्च न्यायालय जयपुर पीठ के समक्ष प्रोग्रेसिव स्कूल एसोसिएशन एवं कान्वेंट स्कूल एसोसिएशन द्वारा दायर रिट याचिका में पक्षकार बनाने की अर्जी को कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है।अभी अभिभावकों का पक्ष पूरी तरह से सुना नहीं गया है। कोर्ट द्वारा कुछ राहत दी गई है लेकिन यह राहत संपूर्ण नहीं है । अभिभावकों के पास पैसा होता तो पहले 100 फीसदी फीस जमा करवा देते, अब अभिभावक बिना काम-धंधे 70 फीसदी फीस कहां से जमा करवाएंगे।

अभिभावक संघ करेगा अपील

एडवोकेट अमित छंगाणी ने बताया कि राज्य सरकार ने 9 अप्रैल 2020 और 7 जुलाई 2020 को समस्त गैर सरकारी स्कूलों को जब तक स्कूल नहीं खुल जाते, तब तक किसी तरह की फीस ना लेने का आदेश जारी किया था। जिसे खारिज करवाने को लेकर प्रोग्रेसिव स्कूल एसोसिएशन एवं कान्वेंट स्कूल एसोसिएशन ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। साथ ही ऑनलाइन कक्षा पढ़ाई के आधार पर अप्रैल 2020 से स्कूल लॉक खोलने की दिनांक से अब तक फीस राशि की मांग को शामिल किया गया है। जिसका संयुक्त अभिभावक समिति और प्रदेश का प्रत्येक अभिभावक विरोध कर रहा है। ऑर्डर कॉपी आने के बाद निर्णय लिया जाएगा और अपील की जाएगी।

जारी रहेगा आंदोलन

आंदोलन जारी रहेगा संयुक्त अभिभावक समिति प्रवक्ता ईशान शर्मा ने कोर्ट के निर्णय के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अभिभावकों के सम्मान में पिछले 4 माह से चले आ रहा आंदोलन आगे भी जारी रहेगा, अभिभावकों को आज कोर्ट से कुछ राहत प्राप्त हुई है। निजी स्कूल संचालक और सरकार पहले ही अभिभावकों के हितों की रक्षा करने से पल्ला झाड़ चुकी है और अभिभावकों को संघर्ष करने पर मजबूर कर दिया। मंगलवार को समिति के पदाधिकारी बैठक कर आगे की रणनीति निर्धारित करेंगे।

COVID-19
Swatantra Jain Desk
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned