इस राज्य के बंदियों के लिए सरकार ने तैयार किया बुलेट प्रूफ प्लान... इतने करोड़ होंगे खर्च

बंदी के साथी या खुद बंदी पुलिसवालों को चाय या नशीले पकोडे खिलाकर फरार भी हो गए। हाल ही में धौलपुर में बंदियों के साथियों ने बस पर फायरिंग कर लोगों की जान आफत में डाल दी थी।

By: JAYANT SHARMA

Updated: 05 Mar 2021, 01:03 PM IST

जयपुर
राजस्थान की जेलों में बंद #Hardcore-criminals हार्डकोर बंदियों के लिए अब राज्य सरकार #Bullet-proof बुलेट प्रूफ बंदोबस्त करने की तैयारी कर रही है। जल्द ही #Rajasthan-police राजस्थान पुलिस के बेडे में कई बुलेट प्रूफ वाहन होंगे जिससे बंदियों को पेशी पर ले जाने के लिए परेशानी खत्म हो जाएगी। हार्डकोद बंदी पेशी से फरार भी नहीं हो सकेंगे और साथ ही पुलिस पर किसी तरह का हमला भी नहीं होगा। #Rajasthan-government राज्य सरकार करोड़ों रुपए इन वाहनों पर खर्च करने जा रही है। यह पहली बार होगा कि राजस्थान सरकार हार्डकोर बंदियों के लिए इस तरह का बंदोबस्त कर रही है और बुलेट प्रूफ वाहन खरीद रही है। बंदियों के लिए बुलेट प्रूफ वाहन खरीदने वाले प्रदेशों में राजस्थान टाॅप पांच में शामिल हो गया है।

अस्सी लाख रुपए से एक करोड़ होगी कीमत
राजस्थान पुलिस के अफसरों ने बताया कि फिलहाल चार बुलेट प्रूफ वैन खरीदने की तैयारी हैं। प्रत्येक की कीमत अस्सी लाख रुपए से एक करोड़ रुपए के आसपास होगी। इन वाहनों में वे तमाम सुविधाएं होगी जो #Jail-Rajasthan बंदियों और खासतौर पर उनके साथ जाने वाले पुलिस जाब्ते को सुरक्षित रखेंगी। एक वैन में आठ से बारह तक पुलिसकर्मी और बंदी बैठ सकेंगे। प्रदेश की सेंट्रल जेलों और हाई सिक्योरिटी जेल में बंद बंदियों को पेशी पर लाने ले जाने और एक जेल से दूसरी जेल मंे शिफ्ट करने के दौरान इन बुलेट प्रूफ वाहनों का उपयोग होगा। पुलिस के काम में भी ये वाहन लिए जा सकेंगे।

यह सब खूबियां होगी इन वाहनों में
अफसरों ने बताया कि बुलेट से नहीं भेदे जा सकने वाले शीशे महत्वपूर्ण होंगे। जिससे बाहर या अंदर से फायरिंग नहीं हो सकेगी। वैन की छत पर एक स्पेशल बाॅक्स होगा जिसे जरुरत पडने पर खोला या बंद किया जा सकेगा। मेडिकल किट होगा। वैन का लाॅकिंग सिस्टम भी आॅटोमैटिक होगा जिससे सुनसान जगहों से गुजरने के दौरान बंदियों को भागने का रास्ता नहीं मिल सकेगा। वाहनों के शीशे मजबूत होने के साथ ही उन पर हैवी आयरन फेंसिग होगी जिससे अगर वाहन पर हमला किया जाता है तो वाहन भी सुरक्षित रहेगा और साथ ही उसमें सवार बंदी और पुलिसकर्मी भी।

अब तक इस तरह से पेशी भुगता रही है पुलिस
प्रदेश की जेलों में पेशी पर लाने ले जाने वाले वाहनों की हालत बेहद खराब है। जयपुर, जोधपुर समेत अन्य कुछ शहरों को छोड़ दिया जाए तो बहुत सी जिला स्तर की जेलों के पास भी अपने वाहन नहीं हैं। या जो वाहन हैं उनकी संख्या बेहद कम है। यही कारण है कि कई बार बंदियों को हथकड़ी डालकर बसों या अन्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट से एक शहर से दूसरे शहर पेशी के लिए ले जाया जाता है। कई बाद ऐसा भी सामने आया कि बंदी के साथी या खुद बंदी पुलिसवालों को चाय या नशीले पकोडे खिलाकर फरार भी हो गए। हाल ही में धौलपुर में बंदियों के साथियों ने बस पर फायरिंग कर लोगों की जान आफत में डाल दी थी।

JAYANT SHARMA Desk
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