निगम चुनाव: प्रत्याशी चयन को लेकर बवाल, विवाद सुलझाने के लिए सीएम ने बुलाई बैठक पर नहीं बनी बात

राजधानी जयपुर में नगर निगम के लिए प्रत्याशी चयन को लेकर कांग्रेस में बवाल मच गया है। जयपुर के विधायकों ने अपने पसंदीदा टिकटार्थी का पैनल देने से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने नाम देने की बजाय पार्टी से सीधे सिंबल देने की मांग की है।

By: kamlesh

Updated: 17 Oct 2020, 09:39 AM IST

जयपुर। राजधानी जयपुर में नगर निगम के लिए प्रत्याशी चयन को लेकर कांग्रेस में बवाल मच गया है। जयपुर के विधायकों ने अपने पसंदीदा टिकटार्थी का पैनल देने से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने नाम देने की बजाय पार्टी से सीधे सिंबल देने की मांग की है। ताकि वे अपने मन मुताबिक प्रत्याशी को चुनाव में उतार सके। एआईसीसी सचिव एवं पर्यवेक्षक ने विधायकों की यह मांग मानने से इनकार कर दिया।

विधायकों के एकजुट होने के बाद तीन विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी प्रत्याशी रहे नेताओं ने भी पर्यवेक्षकों को चेतावनी दे दी कि उनके पैनल में से नाम काटे गए तो ठीक नहीं होगा। नतीजतन विवाद इस कदर बढ़ा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रातों-रात सिविल लाइन्स स्थित अपने सरकारी निवास पर बैठक बुलाकर सभी से चर्चा की। गहलोत के दखल के बाद भी मामला नहीं सुलझा। अब यह तय किया गया है कि प्रदेश कांग्रेस प्रभारी अजय माकन के समक्ष यह मामला रखा जाएगा। वही इसा कोई उचित फार्मूला निकालेंगे।

हुआं यूं कि टिकट को लेकर मची इस खींचतान की वजह से ही कांग्रेस पर्यवेक्षकों ने जयपुर जिले के प्रभारी मंत्री शांति धारीवाल को कोटा जिले का दौरा रद्द करने की सलाह दी। टिकट वितरण के लिए गुरुवार शाम बैठक बुलाई गई। इसमें प्रत्याशी चयन को लेकर धारीवाल और पूर्व महापौर ज्योति खंडेलवाल के बीच तीखी तकरार हो गई।

टिकट वितरण के लिए कल दोपहर फिर बैठक बुलाई गई। बैठक की शुरुआत में ही कांग्रेस पर्यवेक्षक काजी निजामुद्दीन ने धारीवाल से हुई तकरार पर ज्योति खंडेलवाल से नाराजगी जाहिर की। बैठक में बतौर विधायक सिर्फ रफीक खान पहुंचे। उन्होंने भी पर्यवेक्षकों और मंत्रियों को पैनल सौंपने से मना कर दिया।

बैठक से गैर हाजिर सरकारी मुख्य सचेतक महेश जोशी और विधायक अमीन कागजी ने रात तक एक एक करके पर्यवेश्रक काजी, तरण कुमार, धारीवाल और निवर्तमान जिलाध्यक्ष प्रतापसिंह खाचरियावास से मुलाकात की।

उन्होंने भी टिकटार्थियों का पैनल देने से मना कर दिया। सभी विधायकों ने कहा कि उन्हें पार्टी सिंबल दे दिया जाए। वह स्वयं के स्तर पर योग्य प्रत्याशी को चुनाव में उतार देंगे। दरअसल विधायक एवं विधायक प्रत्याशी में अपने चहेतों को टिकट दिलाने की रार छिड़ी हुई है। पर्यवेक्षकों ने इससे मना कर दिया।

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस विधायकों ने निकाय चुनाव की अधिसूचना निकलने के साथ ही यह तय कर दिया कि इस बार वह अपने हिसाब से ही टिकट बांटेंगे।

नीजतन जब भी पार्टी प्रत्याशियों के नाम फाइनल करने के लिए बैठक बुलाती, विधायक कोई न कोई बहाना बनाकर उसे टाल देते। नामांकन अंतिम दिन नजदीकी आने की वजह से शुक्रवार को फिर बैठक बुलाई तो विधायकों का गुबार फूट पड़ा।

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