
हाईकोर्ट में एक ऐसा मामला आया है, जिसमें पुलिस उपनिरीक्षक को ड्यूटी पर नहीं होने के बावजूद एक गिरतारी के लिए दंडित कर दिया। हाईकोर्ट ने इस पर राज्य सरकार से 8 सप्ताह में जवाब मांगा, वहीं याचिकाकर्ता एसआई को दिए गए परिनिंदा के दंड के प्रभाव पर रोक लगा दी।
न्यायाधीश सुदेश बंसल ने बेगाराम की याचिका पर यह आदेश दिया। अधिवक्ता रमाकांत गौतम ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता जब चौमूं में थाना इंचार्ज था, उस समय वह कार्यभार दूसरे पुलिसकर्मी को सौंपकर विभागीय कार्य से गया था। इस बीच दिनेश कुमार जांगिड़ को सीआरपीसी की धारा 151 में गिरतार किया गया, जिसकी दिनेश कुमार ने शिकायत की। इस पर 2021 में याचिकाकर्ता की एक वेतन वृद्धि रोक ली गई और विभागीय अपील में 2022 में दंड को परिनिंदा में बदल दिया।
याचिका में कहा कि घटना के दिन थाने पर हुई कार्रवाई के लिए याचिकाकर्ता जिमेदार नहीं है, क्योंकि वह उस दिन थाना इंचार्ज नहीं था। इस पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत देते हुए परिनिन्दा के दंड के प्रभाव पर रोक लगा दी।
Published on:
01 Dec 2024 08:27 am
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