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राजस्थान:यहां मरीज भी वीआईपी होते हैं

. राज्य के सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले अति महत्त्वपूर्ण लोगों (वीआइपी) की तीमारदारी में सरकारी मैनपावर और संसाधनों का जमकर दुरुपयोग किया जा रहा है। वहीं, आम मरीज को सामान्य सुविधाओं के लिए भी घंटों कतार में इंतजार करना पड़ता है। मासिक 70 हजार से एक लाख रुपए तक वेतन पाने वाले कार्मिक भी इनकी सेवा में जुटे हैं। अकेले जयपुर में इनकी संख्या करीब 20 और प्रदेश में करीब 50 बताई जा रही है। इनका सालाना वेतन करीब 5 करोड़ रुपए है। यह स्थिति तब है, जब चिकित्सा मंत्री परसादीलाल मीणा डेपुटेशन खत्म कर मैनपावर के सदुपयोग का संदेश दे रहे हैं।

जयपुर

Published: May 07, 2022 08:34:57 pm

जयपुर. राज्य के सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले अति महत्त्वपूर्ण लोगों (वीआइपी) की तीमारदारी में सरकारी मैनपावर और संसाधनों का जमकर दुरुपयोग किया जा रहा है। वहीं, आम मरीज को सामान्य सुविधाओं के लिए भी घंटों कतार में इंतजार करना पड़ता है। मासिक 70 हजार से एक लाख रुपए तक वेतन पाने वाले कार्मिक भी इनकी सेवा में जुटे हैं। अकेले जयपुर में इनकी संख्या करीब 20 और प्रदेश में करीब 50 बताई जा रही है। इनका सालाना वेतन करीब 5 करोड़ रुपए है। यह स्थिति तब है, जब चिकित्सा मंत्री परसादीलाल मीणा डेपुटेशन खत्म कर मैनपावर के सदुपयोग का संदेश दे रहे हैं।
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एसएमएस अस्पताल में ही करीब 22 करोड़ रुपए की लागत से दो साल पहले तैयार आधुनिक आइसीयू सुविधायुक्त संक्रामक रोग संस्थान भी वीआइपी के लिए ही काम में लिया जा रहा है। कोरोना काल के दौरान यहां वीआइपी मरीजों का वैक्सीनेशन हुआ और कुछ मामलों में सिर्फ वीआइपी मरीजों को ही रखा गया। इसके अलावा करीब 25 करोड़ के संसाधन जयपुर सहित, अजमेर, जोधपुर व उदयपुर सहित अन्य शहरों के अस्पतालों में ऐसे मरीजों पर खपाए जा रहे हैं। वीआइपी में मंत्री, विधायक, बड़े अफसर, राजनीतिक दलों के पदाधिकारी-नेताओं सहित बड़े कारोबारी व अन्य क्षेत्रों के प्रभावशाली लोग शामिल हैं।
एंट्री से लेकर डिस्चार्ज तक का जिम्मा

वीआइपी की चाकरी के लिए लगाए जाने वाले कार्मिक पर्ची, दवा, जांच, भर्ती जैसी सुविधाओं का जिम्मा संभालते हैं। अप्रत्यक्ष तौर पर कुछ संसाधन सिर्फ ऐसे मरीजों के लिए ही आरक्षित हैं, जहां प्रवेश ही वीआइपी मरीजों का संभव है। पूर्ववर्ती चिकित्सा मंत्रियों के समय भी वीआइपी मरीजों की तीमारदारी पर संसाधन झोंकने को लेकर विवाद सामने आ चुके हैं। कुछ डॉक्टर भी ऐसे हैं, जिनका जिम्मा सिर्फ मंत्री या अन्य वीआइपी कॉल पर इलाज करना या उसकी व्यवस्था करना है।
सीधे आइसीयू-कॉटेज की सुविधाएं

बड़े अस्पतालों में वीआइपी मरीज के अस्पताल पहुंचते ही सीधे आइसीयू या कॉटेज दे दिए जाते हैं, जबकि आम मरीजों को ऐसी सुविधाएं आसानी से नहीं मिलतीं। भर्ती होने के बाद सामान्य लोगों को आइसीयू की जरूरत होने पर भी पहले सामान्य वार्ड में ही भर्ती किया जाता है। वहां भी कई बार चिकित्सक तक उन्हें आइसीयू नहीं दिला पाते। कई बार तो ऐसे मरीजों को सामान्य पलंग तक नहीं मिल पाता। बेंच, जमीन और बच्चों के अस्पतालों में तो एक ही पलंग पर दो बच्चों का उपचार करने के दृश्य भी सामने आ चुके हैं।
सभी शहरों में एक-सा हाल

जयपुर : दो साल से एसएमएस के संक्रामक रोग अस्पताल को आम मरीजों के लिए भले ही नहीं खोला गया, लेकिन कोरोना काल के दौरान यहां वीवीआइपी मरीज और उनके रिश्तेदारों का इलाज किया गया।
उदयपुर : मेडिकल कॉलेज अस्पताल में वीआइपी को हर सुविधा तत्काल उपलब्ध कराई जा रही है। अलग से स्टाफ की व्यवस्था की जाती है।

जोधपुर : डॉ. एस.एन. मेडिकल कॉलेज अस्पताल में वीआइपी की तीमारदारी में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। यहां एक वीआइपी बीमार हुआ तो उनके लिए घर पर ही अस्पताल सजा दिया गया। कई मामले ऐसे भी हुए, जिनमें सीधे आइसीयू और कॉटेज दिए गए।
अजमेर : जेएलएन में हेल्प डेस्क बनाई हुई है, जिसमें चार नर्सिंग कर्मी लगाए हुए हैं।

एसएमएस : एक वार्ड ब्वॉय और 11 नर्सिंगकर्मी इन्हीं के लिए समर्पित हैं, जो 24 घंटे जिम्मा संभालते हैं। एक कक्ष से वीआइपी की सुविधाओं की मॉनिटरिंग की जाती है।
जनाना : 3 नर्सिंगसकर्मी पूरे समय वीआइपी मरीजों के लिए ही लगाए हुए हैं।

जयपुरिया : यहां वीआइपी के लिए 2 महिला नर्सेज हैं।

जेके लोन : वीआइपी मरीजों को सीधे इमरजेंसी के जरिए भर्ती कर इलाज सुनिश्चित कर दिया जाता है।
महिला अस्पताल : 2 नर्सिंग स्टाफ को लगाया गया है।

आरयूएचएस : कोरोना काल में यहां ऐसे मरीजों के लिए कई कार्मिक जिम्मा संभाले हुए थे, आम मरीजों को तब पलंग नहीं मिले, जबकि इन्हें सीधे कमरे और आइसीयू दिए गए।
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Anand Mani Tripathi

आनंद मणि त्रिपाठी (@aanandmani) राजनीति, अपराध, विदेश, रक्षा एवं सामरिक मामलों के पत्रकार हैं। पत्रकारिता के तीनों माध्यम प्रिंट, टीवी और आनलाइन में गहरा और अपनी तेज तर्रार रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। पश्चिम बंगाल के कलकत्ता में जन्म हुआ। प्रारंभिक शिक्षा उत्तर प्रदेश के कानपुर और बस्ती में हुई। माध्यमिक शिक्षा नवोदय विद्यालय बस्ती, फैजाबाद और पूर्वोत्तर त्रिपुरा के धलाई जिले में हुई। अयोध्या के साकेत महाविद्यालय से स्नातक और 2009 में जेआईआईएमसी,दिल्ली से पत्रकारिता का डिप्लोमा किया। हरियाणा से पत्रकारिता आरंभ की। शिक्षा, विज्ञान, मौसम, रेलवे, प्रशासन, कृषि विभाग और मंत्रालय की रिपोर्टिंग की। इंवेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग से शिक्षा और रेलवे विभाग के कई भ्रष्टाचार का खुलासा किया। रक्षा मंत्रालय के रक्षा संवाददाता पाठयक्रम-2016 पूरा किया। इसके बाद रक्षा मामलों की पत्रकारिता शुरू कर दी। चीन, पाकिस्तान और कश्मीर मामलों पर तीक्ष्ण नजर रहती है। लेफ्टिनेंट उमर फैयाज की हत्या 2017, राइफलमैन औरंगजेब की हत्या 2018, जम्मू—कश्मीर में बदले 2018 में बदले राजनीतिक समीकरण, पुलवामा हमला 2019, कश्मीर से 370 का हटना, गलवान घाटी मुठभेड़ 2020 को बेहद करीब से जम्मू और कश्मीर में रहकर ही कवर किया। कोरोना काल 2020 में भी लददाख से नेपाल तक की यात्रा चीन के बदलते समीकरण को लेकर की। इसके साथ ही लोकसभा चुनाव 2019 में जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पंजाब की रिपोर्टिंग की। 9 नवंबर 2019 को श्रीराम जन्म भूमि अयोध्या मामले में आए फैसले की अयोध्या से कवर किया। 2022 उत्तरप्रदेश् चुनाव को सहारनपुर से सोनभद्र तक मोटर साइकिल के माध्यम से कवर किया। पत्रकारिता से इतर आनंद मणि त्रिपाठी को संगीत और पर्यटन का जबरदस्त शौक है। इन्हें किसी भी कार्य में असंभव शब्द न प्रयोग करने के लिए जाना जाता है...

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