2000 करोड़ तक का बजट खर्च हो जाता है इस मिशन में, फिर भी 20,000 नवजात मर रहे हैं हर साल, सरकार बताए क्यों?

Vijay ram

Publish: Sep, 17 2017 06:42:40 PM (IST)

Jaipur, Rajasthan, India

केंद्र सरकार द्वारा बहुत सारा पैसा हर साल बजट में घोषित किया जाता है। अरबों रुपए मिलते हैं, लेकिन इसे खर्चने और ठीक से क्रियान्वित करने में लापरवाही इतनी है कि जनता की सेहत भगवान भरोसे है। Patrika.com ने जाना हाल....

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जयपुर. केंद्र सरकार द्वारा बहुत सारा पैसा हर साल बजट में घोषित किया जाता है। अरबों रुपए मिलते हैं, लेकिन इसे खर्चने और ठीक से क्रियान्वित करने में लापरवाही इतनी है कि जनता की सेहत भगवान भरोसे है। हर साल करोड़ों खर्च होने के बाद भी इलाज मिलना तो दूर, मरीजों का उपचार तक पहुंच पाना ही मुश्किल हो रहा है। कहीं अस्पताल दूर, कहीं लम्बी कतार। कहीं डॉक्टर नहीं तो कहीं सुविधा-संसाधनों का टोटा। कहीं खून और ऑक्सीजन की कमी तो कहीं दवाओं के लिए मनाही। ऐसे में बड़ी संख्या में मरीजों की रोजाना सांसें टूट रही हैं। Patrika.com ने प्रदेशभर में अस्पतालों की पड़ताल की तो जानलेवा हालात नजर आए। ज्यादातर अस्पतालों में सामने आया कि योजनाएं सिर्फ कागजों में चल रही हैं। हकीकत में सरकार और चिकित्सा विभाग को न प्रसूताओं की फिक्र है, न गम्भीर घायलों की। न बुजुर्गों की पीड़ा का भान है और न नवजातों की चिन्ता। पड़ताल के दौरान हालात ऐसे नजर आए, जैसे मरीजों के मर्ज से बड़ा रोग तो अस्पताल पहुंचकर इलाज हासिल करना है। Next स्लाइड्स में पढें, 2000 करोड़ रुपए तक का सालाना बजट खर्च हो जाता है राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में। फिर भी आंकडे रुला देने वाले....

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