scriptRajasthan Pipeline Gas Distribution UDH Guideline Collector Nodel | राजस्थान में पाइपलाइन के जरिए गैस वितरण की तैयारी, गाइडलाइन तैयार, यूं होगा काम | Patrika News

राजस्थान में पाइपलाइन के जरिए गैस वितरण की तैयारी, गाइडलाइन तैयार, यूं होगा काम

प्रदेश में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क (सीजीडी) विकसित करने के लिए राज्य सरकार ने बुधवार को गाइडलाइंस जारी कर दी है। भूमिगत गैस पाइपलाइन डालने, प्रेशर रेगुलेटिंग स्टेशन और सीएनजी स्टेशन स्थापित करने की प्रक्रिया का गाइलाइंस में उल्लेख किया गया है। इस नेटवर्क के जरिए घरों में कुकिंग गैस और वाहनों के ईंधन की भूमिगत गैस पाइपलाइन से सप्लाई की जाएगी।

जयपुर

Published: November 04, 2021 08:23:29 am

जयपुर।

प्रदेश में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क (सीजीडी) विकसित करने के लिए राज्य सरकार ने बुधवार को गाइडलाइंस जारी कर दी है। भूमिगत गैस पाइपलाइन डालने, प्रेशर रेगुलेटिंग स्टेशन और सीएनजी स्टेशन स्थापित करने की प्रक्रिया का गाइलाइंस में उल्लेख किया गया है। इस नेटवर्क के जरिए घरों में कुकिंग गैस और वाहनों के ईंधन की भूमिगत गैस पाइपलाइन से सप्लाई की जाएगी।
राजस्थान में पाइपलाइन के जरिए गैस वितरण की तैयारी, गाइडलाइन तैयार, यूं होगा काम
राजस्थान में पाइपलाइन के जरिए गैस वितरण की तैयारी, गाइडलाइन तैयार, यूं होगा काम
गाइडलाइन के अनुसार फर्म की ओर से घरों में कुकिंग गैस और वाहनों के लिए भूमिगत गैस पाइपलाइन के जरिए नेचुरल गैस की सप्लाई की जाएगी। जिस कंपनी को जो एरिया नेटवर्क स्थापित करने के लिए मिलेगा, उस एरिया में वह कंपनी सीएनजी स्टेशंस भी स्थापित करेगी। राज्य सरकार प्रमुख सड़कों, राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग व अन्य सड़कों पर जमीन का आवंटन करेगी, जो कम से कम 1000 वर्ग मीटर होगी। इस बारे में जल्द ही भूमि आवंटन नीति में प्रावधान किए जाएंगे।
फर्म को करनी होगी सड़क की मरम्मत

यूडीएच की ओर से जारी गाइडलाइंस के तहत पाइप लाइन डालने के लिए ऐसी तकनीक का प्रयोग किया जाएगा, जिसमें सड़कों की कम से कम खुदाई हो। भूमिगत पाइप लाइन डालने के बाद फर्म को ही सड़क की मरम्मत करनी होगी। इसके लिए खुदाई शुरू करने से पहले ही फर्म को बैंक गारंटी देनी होगी, जो काम सही होने के संबंध में निकाय की एनओसी के आधार पर लौटाई जाएगी। पाइप लाइन डालने के लिए फर्म को चरणबद्ध कार्यक्रम देना होगा। एक चरण का काम संतोषजनक पूरा होने के बाद ही दूसरे चरण का काम करने की फर्म को अनुमति दी जाएगी।
मानसून के दौरान भी मिलेगी खुदाई की अनुमति

मानसून के दौरान भी पाइपलाइन डालने के लिए खुदाई की स्वीकृति मिल सकेगी। मानसून में पाइप लाइन डालने के लिए माइक्रो ट्रेंचिंग तकनीक अपनानी होगी। इसके लिए आवेदक फर्म को सुरक्षा संबंधी प्रावधान लागू करने होंगे। अगर पाइपलाइन डालते वक्त कोई नुकसान होता है तो फर्म अपने खर्चे पर क्षतिग्रस्त लाइन की मरम्मत करेगी।
जिला कलेक्टर को बनाया नोडल को करना होगा आवेदन

सड़कों पर पाइपलाइन डालने की स्वीकृति देने के लिए जिला कलेक्टर को डिस्ट्रिक्ट नोडल ऑफिसर अधिकृत किया गया है। आवेदक फर्म जिला कलेक्टर को आवेदन करेगी, जिसकी एक प्रति संबंधित निकाय को भी दी जाएगी। आवेदन मिलने पर उसके संबंध में 7 दिन में संबंधित निकाय अपनी रिपोर्ट देगा और इसके आधार पर डिस्ट्रिक्ट सिटी गैस कमेटी एक महीने में फैसला करेगी।
अनुमति नहीं मिली तो स्टेट नोडल ऑफिसर के पास जाएगा मामला

आवेदन के 30 दिन में अगर पाइपलाइन डालने की स्वीकृति नहीं मिलती है तो आवेदक फर्म यह मामला स्टेट नोडल ऑफिसर को दे सकेगी। स्थानीय निकाय निदेशक को स्टेट नोडल ऑफिसर बनाया गया है। आवेदन के 60 दिन में भी स्वीकृति नहीं मिलती है तो फर्म देगी ज्ञापन। आगामी 15 दिन में डिस्ट्रिक्ट नोडल ऑफिसर को ज्ञापन देगी। इसके बाद फर्म डीम्ड स्वीकृति मानते हुए पाइपलाइन डालने के लिए स्वतंत्र होगी।
जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में बनेगी मॉनिटरिंग कमेटी

सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क स्थापित करने के लिए हर जिले में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में डिस्ट्रिक्ट लेवल गैस कमेटी होगी। कमेटी में पुलिस अधीक्षक, निकायों के प्रमुख अधिकारी, प्राधिकरण या यूआईटी के सचिव, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के प्रतिनिधि, प्रमुख चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता, बिजली वितरण कंपनी के अधीक्षण अभियंता,जलदाय विभाग के अधीक्षण अभियंता को सदस्य बनाया गया है। सदस्य सचिव अतिरिक्त जिला कलेक्टर होंगे।
राज्य स्तर पर स्टेट सिटी गैस कमेटी

मॉनिटरिंग कमेटियों के कामकाज की मॉनिटरिंग के लिए राज्य स्तर पर स्टेट सिटी गैस कमेटी बनाई जाएगी। इसके चेयरमैन यूडीएच के प्रमुख सचिव होंगे। इसके अलावा स्वायत शासन विभाग के सचिव, गृह विभाग के संयुक्त सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग के संयुक्त सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव, पंचायती राज विभाग के संयुक्त सचिव, राजस्व विभाग के संयुक्त सचिव, वन व पर्यावरण विभाग के संयुक्त सचिव, ऊर्जा विभाग के संयुक्त सचिव और
पुलिस महानिदेशक कमेटी के सदस्य होंगे। वहीं स्थानीय निकाय निदेशक कमेटी के सदस्य सचिव होंगे।

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