राजस्थान में मेडिकल इमरजेंसी के लिए बड़ी तैयारी कर रही पुलिस, पढ़े पूरी खबर और जुड़ें एप से..

दरअसल हर साल होने वाले सड़क हादसों में अधिकतर लोगों की जान समय पर इलाज नहीं मिलने या अस्पतालों में देरी से पहुंच पाने के कारण हो जाती है। इन मौतों को कम करने के लिए अब ग्रीन कॉरिडोर जैसी सुविधा जयपुर शहर में कम से कम प्रयासों में उपलब्ध कराने के लिए एक एप्लीकेशन डिजाइन की जा रही है।

By: JAYANT SHARMA

Published: 05 Sep 2020, 12:52 PM IST

जयपुर
हादसों के बाद या किसी मेडिकल इमरजेंसी में बिना ट्रैफिक सिग्नल और बिना वाहनों की भीड़ भाड़ के जल्द से जल्द मेडिकल मिले तो मरीज की जान बचने के चांस अस्सी फीसदी तक बढ़ जाते हैं। इसे लेकर ही जयपुर पुलिस के कुछ अफसर तैयारी कर रहे हैं हादसे के बाद उस कीमती गोल्डन आवर को पीडित परिवारों के लिए सुखद बनाने की। पूरा काम एक मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए होगा और देश के कुछ ही शहरों में इस तरह के सिस्टम को डवलप किया जा रहा है। जयपुर शहर में इस सिस्टम को डवलप करने के बाद संभव हुआ तो प्रदेश के और शहरों में भी इसे डवलप किया जा सकेगा।


गोल्डन आवर एप्लीकेशन देगी गोल्डन समय मे जीवन
दरअसल हर साल होने वाले सड़क हादसों में अधिकतर लोगों की जान समय पर इलाज नहीं मिलने या अस्पतालों में देरी से पहुंच पाने के कारण हो जाती है। इन मौतों को कम करने के लिए अब ग्रीन कॉरिडोर जैसी सुविधा जयपुर शहर में कम से कम प्रयासों में उपलब्ध कराने के लिए एक एप्लीकेशन डिजाइन की जा रही है। इस एप्लीकेशन के जरिए लोगों को जल्द से जल्द ग्रीन कॉरिडोर जैसी सुविधा मिल सकेगी और मेडिकल इमरजेंसी के दौरान मरीजों की जान बचाई जा सकेगी। इस पूरे प्रोजेक्ट के पीछे अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर राहुल प्रकाश हैं। इस बारे में सरकार को प्रस्ताव भेजा गया था और वहां से ग्रीन सिग्नल मिलने पर प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया गया है।


इस तरह काम करेगी एप्लीकेशन, मिलेगी मदद
इस एप्लीकेशन के माध्यम से प्रदेश की सभी एम्बुलेंस को जोड़ा जा रहा है। जब भी कोई भी एक्सीडेंट होगा या घर में मेडिक इमरजेंसी होगी तो उस दौरान गंभीर घायलों को संबंधित अस्पताल या फिर दूसरे ज़िलों या दूसरे राज्यों में पहुँचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाने की समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। इस एप्लीकेशन के स्टेप फॉलो करने के बाद यातायात पुलिस को ऑटोमैटिक सिगनल मिल जाएगा और आगे से आगे ग्रीन कॉरिडोर तैयार कर लिया जाएगा। जिससे मरीज़ के परिजनों को किसी भी प्रकार के यातायात के दबाव का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसमें एप्लीकेशन की तैयारी और अन्य खर्च करीब चालीस लाख रुपए है और इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। जयपुर कमिश्नरेट की ओर से तैयार की जा रही इस एप्लीकेशन से हर साल दस से बीस फीसदी तक मौतों को रोकने की तैयारी है। अफसरों को यही उम्मीद है कि सब कुछ सही रहा तो ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान बचाई जा सकेगी।


हर साल दस हजार से ज्यादा मौतें सड़क हादसों में
प्रदेश में हर साल सड़क हादसों में दस हजार से भी ज्यादा मौतें होती हैं। मौतों के अलावा पंद्रह हजार से भी ज्यादा लोग ऐसे होते हैं जिनको गंभीर चोटें आती हैं और इन चोटों के साथ ही उनको जीवन गुजारना होता है। वहीं प्रदेश भर से एसएमएस अस्पताल में आने वाले लोगों के लिए भी सही समय पर मरीज को पहुंचाना चुनौती होता है। पुलिस अफसरों की मानें तो दो साल के दौरान जयपुर शहर में चार से पांच बार ही ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया है वह भी पहले से ही तय सूचनाओं के बाद। इसमें मरीज को भी अस्पताल भेजा गया और बॉडी आर्गन ट्रांसप्लांट के लिए भी आर्गन भेजने के लिए भी ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया।

JAYANT SHARMA Desk
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