सरकार के दो साल: राजस्थान में दर्ज हुए इतने लाख अपराध

छह महीने के बाद पिछले साल जून में कपिल गर्ग रिटायर हुए। इस साल कुछ हफ्तों पहले ही भूपेन्द्र सिंह यादव ने वीआरएस लिया। अब वर्तमान में #DGP-ML-Lather डीजीपी लाठर के हाथ में प्रदेश पुलिस की और प्रदेश की कमान है। बड़ी बात ये है कि उन्होनें आते ही अपने इरादे भी जता दिए हैं।

By: JAYANT SHARMA

Published: 19 Dec 2020, 11:47 AM IST


जयपुर
राज्य सरकार #Rajasthan-Government दो साल पूरे करने जा रही हैं। इन दो साल में #Rajasthn-police प्रदेश पुलिस महकमें में भी बड़े स्तर पर बदलाव हुए और साथ ही अपराध में भी कमी और बढ़ोतरी हुई। दो साल की बात की जाए तो पहले साल में #State-crime अपराध बढे और बढ़कर दो लाख के भी पार पहुंच गए। ऐसा पहली दफा हुआ राजस्थान पुलिस के इतिहास में। वही इस साल अपराध कम हुए लेकिन गंभीर श्रेणी के अपराध जैसे हत्या, हत्या का प्रयास और अन्य अपराध सर्वोच्च स्तर पर रहे। अपराधों की गणित और एसपी से लेकर कांस्टेबल स्तर के हजारों तबादलों के साथ ही दो साल में प्रदेश की जनता और पुलिस ने #DGP-Rajasthan तीन डीजीपी भी देख लिए। छह महीने के बाद पिछले साल जून में कपिल गर्ग रिटायर हुए। इस साल कुछ हफ्तों पहले ही भूपेन्द्र सिंह यादव ने वीआरएस लिया। अब वर्तमान में #DGP-ML-Lather डीजीपी लाठर के हाथ में प्रदेश पुलिस की और प्रदेश की कमान है। बड़ी बात ये है कि उन्होनें आते ही अपने इरादे भी जता दिए हैं।

दो साल में इत तरह चला आंकडों का खेल, अपराध कम भी हुए लेकिन बढे भी
दो साल में अपराध की स्थिति की बात की जाए तो साल 2019 में हत्या से लेकिन अन्य अपराधों तक की श्रेणी में दो लाख पच्चीस हजार तीन सौ छह अपराध दर्ज हुए। इनमें हत्या के 1659, हत्या के प्रयास के 1905, डकैती के 105, लूट के 1421, अपहरण के 8058, बलात्कर के 5997, बलवा के 392, नकबजनी के 7182, चोरी के चाली हजार से ज्यादा और अन्य अपराधों के एक लाख 57 हजार से ज्यादा मुकदमें दर्ज हुए। इस साल नवम्बर तक की बात की जाए तो एक लाख 79 हजार से ज्यादा अपराध दर्ज हुए। लेकिन इन अपराधों में गंभीर श्रेणी के अपराध जैसे हत्या के 1600, हत्या के प्रयास के 1916, डकैती के 70, लूट के 1055, अपहरण के पांच हजार सात सौ से ज्यादा, बलात्कार के 4900, बलावा के 333 नकबजनी के पांच हजार तीन सौ 24, चोरी के 26 313 और अन्य अपराध के एक लाख 32000 से भी ज्यादा मुकदमें दर्ज हैं।

अपराध की तरह ही चढता उतरता गया पुलिस का ग्राफ
दो साल में राजस्थान पुलिस की उपलब्धि की बात करें तो दो साल के भीतर कई बड़े अपराधियों को सलाखों के पीछे किया गया। इनमें जगन गुर्जर से लेकर लॉरेंस की टीम, आनंदपाल के गुर्गें और अन्य अपराधी शामिल हैं। पुलिस को फिर से वीकली आफ का आॅप्शन मिलने की प्रक्रिया शुरु की गई। कुछ जिलों में पुलिस को वीकली आॅल मिला भी लेकिन जैसे ही अधिकारी बदले वैसे ही पुराना ढर्रा शुरु हो गया। एसीबी ने जीरो टॉलेंरस सिस्टम पर काम करना शुरु किया और भ्रष्ट कार्मिकों के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी रखी। इस साल पिछले साल की तुलना में ज्यादा कार्रवाई की गई। लेकिन इन उपलब्धियों के अलावा पुलिस के खेल भी खुलकर सामने आए। पहले बार एडीजी स्तर के एक अफसर के नाम से दो करोड़ की रिश्वत मांगने के आरोप में एक बड़े पुलिस अधिकारी का बाहर का रास्ता दिखाया गया। दो साल के भीतर आधा दर्जन से भी ज्यादा पुलिसकर्मियों ने तनाव के चलते दुनिया छोड़ दी। इसके दाग पुलिस अफसरों तक भी पहुंचे और इसी कारण पुलिस मुख्यालय में एक लैंड लाइन नंबर सेवा शुरु की गई जिस नंबर पर फोन कर पुलिसकर्मी अपने तनाव के बारे में चिकित्सकों से बातचीत कर सकें। राजस्थान पुलिस पर कालिख पोतकर फरार हुए राजस्थान पुलिस के लिए सबसे बडे अपराधी पपला गुर्जर का एक साल बीत जाने के बाद भी सुराग नहीं लगा। हांलाकि उसकी गैंग के बीस से भी ज्यादा अपराधियों को अरेस्ट करने के साथ ही पुलिस ने बीच सड़क उनका जुलुस भी निकालकर नई पहल की। हाल ही एक में बार फिर से डिकॉय आॅपरेशन शुरु किए गए तो पुलिस और अपराध का गठजोड़ एक बार फिर से खुलकर सामने आ गया।

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