अनोखा केस: एटीएम मशीनों से ठगी का यह नया तरीका आपके होश उड़ा देगा, 55 लाख निकाले

कई बैकों के एटीएम साफ कर दिए। अब जब इसका खुलासा हुआ तो इससे पहले ही चाहर फरार हो गया। उसका फोन बंद हैं, घर पर लाॅक है। तलाश के लिए सुराग के नाम पर पुलिस के पास कुछ सीसीटीवी शाॅट्स भर हैं।

By: JAYANT SHARMA

Published: 05 Mar 2021, 12:39 PM IST

जयपुर
एटीएम #ATM मशीनों में कैश डालते समय जानबूझकर गडबड़ करने और उसके बाद उसे सही करने के नाम पर #Fraud ठग ने अलग-अलग मशीनों से 55 लाख रुपए से भी ज्यादा का कैश निकाल लिया। यह पूरा पैसा जब कैश डालने वाली #Company कंपनी के बैंक खातों से दुबारा ट्रांसफर हुआ तब जाकर ठगी का राज खुला। ठगने वाला कंपनी का ही कार्मिक निकला और अब वह फरार हो गया। उसकी तलाश के लिए अब पुलिस और कंपनी के प्रतिनिधी #CCTV सीसीटीवी कैमरों की मदद पर निर्भर हैं।

मुकदमा ज्योति नगर #Jaipur-police थाने में दर्ज कराया गया है। जांच कर रही पुलिस ने बताया कि ज्योति नगर इलाके में स्थित कैश डालने वाली कंपनी के मैनेजर नरेश कुमार ने यह मुकदमा दर्ज कराया। कंपनी में ही काम करने वाले कार्मिक वीरेन्द्र चाहर के खिलाफ मुकदमा दिया गया है। पुलिस ने बताया कि चाहर और एक अन्य कार्मिक का काम एटीएम मशीनों में कैश डालने का था। उनके साथ कैश वैन रहती थी। कंपनी के पास कई बैंकों के एटीएम में कैश डालने का काम था।

इसी के चलते चाहर और उसके साथी कार्मिक एटीएम मशीनों में कैश डालते थे। कैश डालने के दौरान दोनो कार्मिकों के मोबाइल फोन पर वेरिफिकेशन कोड आने पर काम पूरा माना जाता था। लेकिन वेरिफिकेशन कोड के आने के बाद चाहर जान बूझकर एटीएम मशीनों में गडबड़ करता था और एरर छोड़ देता था। बाद में इसकी सूचना कैश डालने वाली कंपनी तक एटीएम प्रबंधन पहुंचाता था। इस एरर को ही सही करने के नाम पर चाहर वहां जाता और मशीने सही करने के नाम पर रुपए निकालता था।

बताया जा रहा है कि एरर सही करने का किसी तरह का मैसेज या वेरिफिकेशन कोड कंपनी से नहीं आता था इसी का फायदा उठाकर चाहर ने कई बैकों के एटीएम साफ कर दिए। अब जब इसका खुलासा हुआ तो इससे पहले ही चाहर फरार हो गया। उसका फोन बंद हैं, घर पर लाॅक है। तलाश के लिए सुराग के नाम पर पुलिस के पास कुछ सीसीटीवी शाॅट्स भर हैं।

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