कोरोना इफेक्ट: राजस्थान में 14 फीसदी कम हुए अपराध... लेकिन सबसे गंभीर अपराध इस साल बढ़ा

पुलिस का चालानी प्रतिशत 97 फीसदी से लेकर 99 फीसदी तक रहा। सम्पत्ति संबधी अपराधों में 27 फीसदी तक कमी हुई। एक साल से ज्यादा अवधि तक लंबित करीब साढे पांच हजार प्रकरणों का निस्तारण साल 2020 में किया गया। आदतन अपराधियों को काबू करने के लिए पूरे साल में 568 हिस्ट्रीशीट खोलीं गई।

By: JAYANT SHARMA

Published: 11 Jan 2021, 03:32 PM IST

जयपुर
कोरोना ने #Corona-update पूरे देश और दुनिया के लिए बुरी खबरों का अंबार लगा दिया लेकिन इस बीच #Rajasthan-police राजस्थान में पुलिस के लिए कोरोना ने अच्छा इफेक्ट भी डाला। कोरोना के चलते #Crime-rate-low अपराध की रफ्तार अपने आप ही इतनी कम हुई कि एक लाख पुलिसवाले भी मिलकर इतनी कमी नहीं ला सके। हाल ही में पुलिस मुख्यालय में डीजीपी मोहन लाल लाठर ने #DGP-Rajasthan साल 2020 के अपराध फिगर्स सामने रखे तो पता चला कि साल 2019 की तुलना में साल 2020 में अपराध में चैदह फीसदी से भी ज्यादा की कमी आई है। इसमें पुलिस की मेहनत के साथ ही कोरोना का भी विशेष योगदान है। पूरे साल में डिकाॅय #Operations आॅपरेशन कर पुलिसकम्रियों की मिलीभगत के केस भी सामने लाए गए। पूरे साल में काम में लापरवाही बरतरे पर सात सौ पचास से भी ज्यादा पुलिसकर्मियों पर गंभीर एक्शन लिया गया।

सबसे ज्यादा गंभीर अपराध पर नहीं बड़ा कोरोना प्रभाव, वे फिर भी बढ़े
कोराना का असर हर तरह के अपराध पर पडा और उनकी संख्या पिछले साल की तुलना में कम भी हुई। लेकिन उसके बाद भी हत्या और हत्या के प्रयास जैसे दो सबसे गंभीर अपराध पुलिस पहरे और कोरोना सख्ती के बाद भी बढ़े। हत्या के मामलो में तीन फीसदी, हत्या के प्रयास के मामलों में आठ फीसदी से भी ज्यादा बढ़ोतरी हुई। हांलाकि अपहरण जैसे संगीन अपराध में बाइस प्रतिशत की कमी देखी गई। तुलना साल 2019 में कुल दर्ज हुए अपराधों से की गई।

अनुसंधान में तेजी, 99 फीसदी तक चालान, लेकिन बरामदगी प्रतिशत खास नहीं
गंभीर अपराधों में कमी दर्ज हुई तो साथ ही अनुसंधान में तेजी मिली। पिछले साल दिसम्बर तक पुलिस का चालानी प्रतिशत 97 फीसदी से लेकर 99 फीसदी तक रहा। सम्पत्ति संबधी अपराधों में 27 फीसदी तक कमी हुई। एक साल से ज्यादा अवधि तक लंबित करीब साढे पांच हजार प्रकरणों का निस्तारण साल 2020 में किया गया। आदतन अपराधियों को काबू करने के लिए पूरे साल में 568 हिस्ट्रीशीट खोलीं गई। जो पिछले कुछ सालों मंे सबसे ज्यादा रहीं। चालान पेश करने में तो पुलिसकर्मियों ने कम ही कोताही बरती लेकिन बरामदगी प्रतिशत में कुछ खास सुधार नहीं हुआ। यानि चोरी, लूट, डकैती समेत अन्य अपराधों में पीडितों को सामान वापस नहीं मिलने से कुछ खास राहत नहीं पहुंची।

JAYANT SHARMA Desk
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