किसी रिसोर्ट की मीटिंग स्पीकर के लिए नोटिस का आधार कैसे बन सकती है-पूनियां

राजस्थान में चल रहे सियासी घटनाक्रम के बीच भाजपा वेट एंड वॉच की स्थिति में नजर आ रही है। मगर राजस्थान के नेता मिल बैठकर आगे आने वाले परिस्थितियों को लेकर रणनीति बनाते नजर आ रहे हैं। विधानसभाध्यक्ष की ओर से 19 कांग्रेस विधायकों को दिए गए नोटिस के परिप्रेक्ष्य में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां की अध्यक्षता में बैठक हुई।

By: Umesh Sharma

Published: 15 Jul 2020, 06:06 PM IST

जयपुर।

राजस्थान में चल रहे सियासी घटनाक्रम के बीच भाजपा वेट एंड वॉच की स्थिति में नजर आ रही है। मगर राजस्थान के नेता मिल बैठकर आगे आने वाले परिस्थितियों को लेकर रणनीति बनाते नजर आ रहे हैं। विधानसभाध्यक्ष की ओर से 19 कांग्रेस विधायकों को दिए गए नोटिस के परिप्रेक्ष्य में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां की अध्यक्षता में बैठक हुई।

बैठक के बाद पूनियां ने कहा कि विधायकों को नोटिस देना हास्यास्पद है। सदन गरिमाओं, मर्यादओं और नियमों से बंधा है। सदन के भीतर जो भी कार्यवाही होती है उसकी कार्य सूची और व्हीप जारी होता है। किसी रिसोर्ट की मीटिंग में विधायक अनुपस्थित हो जाए, वो स्पीकर के लिए नोटिस का आधार कैसे बन सकता है, यह संवैधानिक प्रश्न है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की बात करने वाली सरकार एसओजी और एसीबी की कार्रवाई का डर दिखा रही है। सचिन पायलट और उनके लोगों को नोटिस दिए जा रहे हैं। बैठक में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष राव राजेंद्र सिंह और पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अरुण चतुर्वेदी ने हिस्सा लिया।

विधायकों को डिस्क्वालिफाई करने की कोशिश

पूनियां ने कहा कि इनकी कोशिश यही है कि विधायकों को डिस्क्वालिफाई कर दें और सदन बुलाने की कोशिश की जाए। हम परिस्थितियों से आंख नहीं मूंद सकते। राजस्थान में विशेष परिस्थिति बनी है विपक्ष के नाते हमारी भूमिका क्या हो, इसको लेकर हमने चर्चा की है। आज नहींं तो कल इन सभी चीजों से रूबरू होना है किस समय, क्या करना है, यह सब हम आपस में चर्चा करके ही करेंगे।

अल्पमत में है सरकार

पूनियां ने दावा किया कि गहलोत सरकार के पास 100 से कम का आंकड़ा है और कैसी स्थिति में यह बहुमत साबित करेंगे यह तो समय ही बताएगा। उन्होंने कहा कि असंवैधानिक तरीके से बसपा के मर्जर की पिटिशन भी अभी स्पीकर के यहां पैंडिंग है। वो निश्चित तौर पर असंवैधानिक है। उन्होंने बीटीपी के एक विधायक के वीडियो पर कहा कि यह लोकतंत्र के लिये ठीक नहीं है।

पैरा को पढ़ लेते तो नोटिस नहीं दिया जाता-राठौड़

नोटिस को लेकर राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि इसके पेरा 1ए और 1बी में जिस प्रकार का उल्लेख किया गया है यदि उसे पढ़ लिया जाता तो शायद यह नोटिस नहीं दिया जाता। इससे पहले भी जब जनता दल में स्प्रिट हुआ था उस समय यानि 1990 के अंदर मैं विधानसभा का सदस्य था और हमने उस समय 'जनता दल दिग्विजय' बनाया था। उस समय में भी स्पष्ट व्यवस्था कि स्प्रिट का काम विधानसभा के बाहर हुआ है इसलिये विधानसभा के बाहर के किसी भी कृत्य पर किसी भी माननीय सदस्य को अयोग्यता के लिये जिम्मेवार नहीं बनाया जा सकता है।

यह स्पीकर के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता

नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि इस मामले में विधानसभा का कोई रोल नहीं है। पार्टी की बैठक में कौन सदस्य नहीं आते यह स्पीकर तय नहीं करते हैं। स्पीकर का क्षेत्र विधानसभा क्षेत्र है। विधानसभा फ्लोर में यह नोटिस दिया हो और विधानसभा में पार्टी का व्हीप जारी हो, उसका पालन नहीं करे तो स्पीकर एक्शन कर सकते हैं। हाउस की मीटिंग में उल्लंघन होता तो स्पीकर का अधिकार जरूर होता। लेकिन यह अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर किया है। कुछ राज्यों में ऐसा हुआ है, जहां से कोर्ट से राहत मिली है।

Umesh Sharma Reporting
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