बनी सहमति... हड़ताल खत्म, आज से फिर सुगम होगी राह, नहीं झेलनी पड़ेगी परेशानियां

9 दिन बाद शुक्रवार से सभी लो-फ्लोर बसें वापस सडक़ों पर दौडऩे लगेंगी...

By: dinesh

Published: 10 Nov 2017, 12:19 PM IST

जयपुर। शहर में 9 दिन बाद शुक्रवार से सभी लो-फ्लोर बसें वापस सडक़ों पर दौडऩे लगेंगी। पीपीपी मोड कम्पनी से समझौता होने के बाद चालकों-परिचालकों ने गुरुवार को हड़ताल समाप्ति की घोषणा कर दी।

 

जेसीटीएसएल की प्रबंध निदेशक आकांक्षा चौधरी ने बताया कि वेतन, सेलेरी स्लिप और साप्ताहिक विश्राम सहित कई मांगों को लेकर सांगानेर और विद्याधरनगर (बी) आगार के चालकों-परिचालकों ने हड़ताल कर दी थी। दोनों आगार संचालन के लिए पीपीपी मोड पर एक कम्पनी को दिए हुए हैं। दो दिन पहले दोनों पक्षों के बीच वार्ता कराई लेकिन हल नहीं निकला था। अब गुरुवार को अनेक मांगें मान लिए जाने पर चालक-परिचालक ड्यूटी पर आने को तैयार हो गए। अब शुक्रवार से लो-फ्लोर का संचालन सामान्य हो जाएगा, जिससे इनमें सफर करने वालों को राहत मिलेगी।

 

ये प्रमुख मांगें मानी
चालकों को प्रतिमाह 12 हजार रुपए वेतन और सेलेरी स्लिप मिलेगी।
माह में 4 साप्ताहिक अवकाश मिलेंगे।
ड्यूटी पर वर्दी में नहीं मिलने पर 500 रुपए जुर्माना।
चालकों को ईएसआई कार्ड जारी किए जाएंगे।

 

गौरतलब है कि जयपुर के पब्लिक ट्रांसपोर्ट की रीढ़ कही जाने वाली लो फ्लोर बसों के चालक—परिचालकों हड़ताल पर थे और हड़ताल की वजह जयपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड रही। क्योंकि जेसीटीएसएल अपनी ठेकेदार कंपनी को अप्रैल—मई 2017 के बाद से बस संचालन के बदले कभी पूरा भुगतान नहीं कर पाया। तब से लेकर अब तक जेसीटीएसएल की तरफ कंपनी के 8 करोड़ रूपए से ज्यादा बकाया हो गया। इसके चलते कंपनी लो फ्लोर बसों के चालक—परिचालों को सितम्बर महीने के बाद से वेतन और दीवाली बोनस का भुगतान नहीं कर पाई। इसके विरोध में लो फ्लोर बसों के कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। शहर में कुल 470 लो फ्लोर बसें संचालित है।

 

ये है बसों का गणित
कुल बसें — 479 चल रही बसें — 200 बंद खड़ी बसें — 279 विद्याधर नगर डिपो — 168 सांगानेर डिपो — 196 जेसीटीएसए7 —115 चल रही बसें — वर्जन ठेकेदार कंपनी और हड़ताली कर्मचारियों के बीच विवाद का निपटारा करने के लिए आज वार्ता होगी। इसमें जेसीटीएसएल प्रबंधन दोनों पक्षों में सुलह करवाने की कोशिश करेगा। बसें बंद होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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