नेगेटिव या पॉजिटिवः आरटीपीसीआर जांच में जानलेवा गड़बड़झाला, उठ रहे ये सवाल

राज्य में कोरोना के कहर के बीच आरटीपीसीआर जांच में गम्भीर गड़बड़झाला सामने आया है। जयपुर में कुछ लोगों के समूह ने अलग-अलग जांच लैब में इस पद्धति से अपनी जांच कराई तो सभी को विरोधाभासी रिपोर्ट थमा दी गई।

By: kamlesh

Published: 02 May 2021, 04:03 PM IST

जयपुर। राज्य में कोरोना के कहर के बीच आरटीपीसीआर जांच में गम्भीर गड़बड़झाला सामने आया है। जयपुर में कुछ लोगों के समूह ने अलग-अलग जांच लैब में इस पद्धति से अपनी जांच कराई तो सभी को विरोधाभासी रिपोर्ट थमा दी गई। सभी को एक लैब ने तो नेगेटिव बता दिया, दूसरी ने पॉजिटिव। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पद्धति में 30 प्रतिशत जांचों में अन्तर सामने आ सकता है लेकिन उक्त लोगों की रिपोर्टों में 100 प्रतिशत गड़बड़झाला सामने आने से गम्भीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

गड़बड़झाले के ये उदाहरण
- 19 अप्रेल को एक संस्था ने सूर्यम डायग्नोस्टिक सेंटर में अपने कार्मिकों की कोविड जांच कराई। 20 अप्रेल को 5 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव मिली। इनमें से 3 लोग पहले भी संक्रमित हो चुके थे। ऐसे में कंपनी ने तीनों की एंटीबॉडी जांच कराई तो उनमें मजबूत एंटीबॉडी मिली। तीनों का फिर से कोविड टेस्ट डॉ. बी. लाल क्लिनिक लैब में कराया तो सभी की रिपोर्ट नेगेटिव आई। सूर्यम ने एक अन्य व्यक्ति की रिपोर्ट पहले नेगेटिव और बाद में पॉजिटिव बताई। बाद वाली रिपोर्ट को सही बताया। इस व्यक्ति की भी रिपोर्ट डॉ. बी. लाल ने नेगेटिव बताई।

- 24 अप्रेल को एक फैक्ट्री में कर्मचारियों की जांच कराई गई। सूर्यम लैब की टीम ने वहीं पहुंचकर नमूने लिए और 41 में से 21 कर्मचारियों को पॉजिटिव बताया। ऐसे में 15 दिन के शटडाउन की तैयारी कर ली गई। लेकिन पुराने अनुभव के आधार पर उन 21 लोगों की पुन: कोविड जांच महात्मा गांधी अस्पताल में कराई गई। जिन्हें नेगेटिव बताया गया, उनमें से भी 3 की जांच कराई गई। महात्मा गांधी अस्पताल ने सभी 21 लोगों को नेगेटिव बताया।

उठ रहे ये सवाल
1. इन नमूनों की जांच भी की गई या नहीं, या फिर बिना जांच किए ही रिपोर्ट थमा दी गई?
2. जांच हुई तो वह कंपनी कौन है, जिन्होंने इनके किट की आपूर्ति की?

3. क्या किट या जांच की प्रक्रिया में कोई खामी रही?
4. क्या नमूने सही तरीके से नहीं लिए गए या जांच के लिए उचित प्रक्रिया नहीं अपनाई गई?

5. क्या निजी जांच लैबों की निगरानी या निरीक्षण नियमित तौर पर हो रहे हैं?
6. क्या पॉजिटिव होने के बाद भी घूम रहे लोगों की कोई निगरानी की व्यवस्था है? ऐसे लोग स्प्रेडर होंगे तो जिम्मेदार कौन?

यों जानें आरटीपीसीआर के तकरीकी पहलू
- सवाल: नतीजे शत प्रतिशत सही नहीं तो आरटीपीसीआर जांच ही क्यों?
- जवाब: मौजूदा तकनीकों में आरटीपीसीआर ही सबसे बेहतर विकल्प है।

- सवाल: क्या राज्य में दूसरी जांचें उपलब्ध हैं? ये सरकारी और निजी दोनों में उपलब्ध हैं?
- जवाब: राज्य में आरटीपीसीर जांच होती है, यह ट्रू नेट और सीबी नेट से भी होती है।

- सवाल: राज्य सरकार ने अन्य जांच से क्यों इनकार किया? क्या वे तकनीकी तौर पर सही नहीं हैं?
- जवाब: शुरू में रेपिड एंटिजन टेस्ट का ट्रायल हुआ था लेकिन नतीजे संतोषप्रद नहीं मिले थे। सरकार ने बाद में इस जांच से इनकार कर दिया।

- सवाल: कोरोना के लक्षण हों लेकिन रिपोर्ट नेगेटिव आए तो क्या करें?
- जवाब: लक्षण आने के तीन दिन बाद जांच कराने पर फाल्स नेगेटिव आने की 70 प्रतिशत तक आशंका रहती है। सातवें दिन बाद तक जांच कराने पर 33 प्रतिशत मामलों में ही पॉजिटिव आने की आशंका रहती है। विशेषज्ञ सलाह दें तो एचआरसीटी भी करवाई जा सकती है।

- सवाल: क्या आरटीपीसीर शत प्रतिशत मामलों में सही है?
- जवाब: इसकी शुद्धता 70 प्रतिशत तक मानी जाती है।

- सवाल: क्या ऐसा संभव है कि एक लैब में सभी रिपोर्ट पॉजिटिव तो दूसरी में नेगेटिव हो जाएं?
- जवाब: ऐसा संभव नहीं, यह तो स्केम है।

(विशेषज्ञों के अनुसार)

विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा पद्धतियों में आरटीपीसीआर ही सबसे बेहतर है। पिछले साल हमने रेपिड टेस्ट का ट्रायल कराया तो वह सही नहीं पाई गई थी। कुछ लैब में 100 प्रतिशत तक अंतर मिला है तो उसकी लिखित शिकायत मिलने पर जांच कराएंगे।
- रघु शर्मा, चिकित्सा मंत्री


लक्षण हैं लेकिन आरटीपीसीआर नेगेटिव है तो विशेषज्ञ से सलाह लेकर एचआर सीटी जांच करवानी चाहिए। सात दिन बाद सैंपल दिया तो नेगेटिव वेल्यू 66 प्रतिशत हो सकती है। तीसरे दिन 70 प्रतिशत, सातवें-आठवें दिन में 33 प्रतिशत।
- डॉ. रमन शर्मा, सीनियर प्रोफेसर, एसएमएस मेडिकल कॉलेज

कौन सही, कौन गलत
- छत्तीसगढ़: रैपिड एंटीजन टेस्ट के आधार पर ही दैनिक कोविड रिपोर्ट तैयार होती है। कोई व्यक्ति चाहे तो अपनी आरटीपीसीआर भी करवाकर कन्फर्म करवा सकता है।

- मध्यप्रदेश: रैपिड एंटीजन टेस्ट को मान्यता है लेकिन मुख्यतया आरटीपीसीआर ही होती है। इसका अनुपात लगभग 80:20 है।

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