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Rajasthan: छलावा साबित हो रही है राजस्थान का नि:शुल्क इलाज

CMप्रदेश के सरकारी अस्पतालों में संपूर्ण कैशलेस इलाज शुरू होने के बाद 40 दिन बाद भी शत-प्रतिशत इलाज नि:शुल्क नहीं हो पाया है। सवाई मानसिंह अस्पताल के प्लास्टिक सर्जरी वार्ड में मरीजों को विभिन्न तरह के प्रत्यारोपण ऑपरेशन के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। हैरत की बात यह है कि भामाशाह योजना के तहत ये उपलब्ध हैं, लेकिन दूसरे मरीजों को इनकार किया जा रहा है। यहां कुछ मरीज तो इम्प्लांट के अभाव में बिना सर्जरी कराए ही निजी अस्पताल चले गए।

जयपुर

Published: May 11, 2022 09:43:50 pm

जयपुर. प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में संपूर्ण कैशलेस इलाज शुरू होने के बाद 40 दिन बाद भी शत-प्रतिशत इलाज नि:शुल्क नहीं हो पाया है। सवाई मानसिंह अस्पताल के प्लास्टिक सर्जरी वार्ड में मरीजों को विभिन्न तरह के प्रत्यारोपण ऑपरेशन के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। हैरत की बात यह है कि भामाशाह योजना के तहत ये उपलब्ध हैं, लेकिन दूसरे मरीजों को इनकार किया जा रहा है। यहां कुछ मरीज तो इम्प्लांट के अभाव में बिना सर्जरी कराए ही निजी अस्पताल चले गए।
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सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के भूतल पर बने भामाशाह काउंटर पर मंगलवार को मरीज थोड़ी-थोड़ी देर में इम्प्लांट उपकरण की जानकारी लेेते दिखे। नागौर से आए मरीज पृथ्वी ने बताया कि उसे पेट में पानी भरने की दिक्कत है। सर्जरी होनी है, लेकिन इम्प्लांट नहीं होने से शनिवार को होने वाली सर्जरी बुधवार तक टाल दी गई। इसके लिए भी मंगलवार तक इम्प्लांट नहीं आया, मजबूरन बाहर से खरीदना पड़ेगा। अस्थि रोग विभाग के ऑपरेशन थियेटर में मरीज को पहनाए जाने वाले कपड़े या तो बाहर से मंगवाए जा रहे हैं या उपयोग लिए हुए इस्तेमाल किए जा रहे हैं। ऑपरेशन संबंधी कुछ अन्य सामग्रियों की भी यहां किल्लत है।
जांच कराने में भी मरीज व उनके परिजन के पसीने छूट रहे हैं। जांचों के लिए चिकित्सक के हस्ताक्षर करवाना अनिवार्य किया हुआ है। मरीज के परिजन उन्हें ढूंढते नजर आते हैं। कई बार वे सीट पर नहीं मिलते, जिससे इंतजार करना पड़ता है। इसके बाद जांच काउंटर पर घंटों कतारों में लगा रहना पड़ता है, फिर भी उन्हें जांच के लिए तारीख ही मिलती है।
जांच फ्री लेकिन खरीदनी पड़ दवा रही

पेट की सीटी स्कैन के लिए एसएमएस अस्पताल में रोजाना 30 से 50 मरीज आते हैं। जांच कराने से पहले उन्हें पानी में घोलकर दवा पीनी पड़ती है। लेकिन यह दवा उपलब्ध नहीं है। इसके लिए मरीजों को 300 रुपए तक चुकाने पड़ रहे हैं।
कई जरूरी जांच शामिल ही नहीं

एसएमएस अस्पताल में 8 हजार रुपए तक की करीब 400 जांचें नि:शुल्क हो रही हैं, लेकिन कई सस्ती जांच भी नहीं हो रही। इनके मरीज भी निरंतर आ रहे हैं। इसमें फूड एलर्जी टेस्ट, होमोसिस्टीन लेवल टेस्ट, एपीएलए,एडीए टेस्ट, यूरिन माइक्रो एल्ब्यूमिन टेस्ट समेत कई जांचें शामिल हैं।
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Anand Mani Tripathi

आनंद मणि त्रिपाठी राजस्थान पत्रिका में राजनीति, अपराध, विदेश, रक्षा एवं सामरिक मामलों के पत्रकार हैं। पत्रकारिता के तीनों माध्यम प्रिंट, टीवी और आनलाइन में गहरा और अपनी तेज तर्रार रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। पश्चिम बंगाल के कलकत्ता में जन्म हुआ। प्रारंभिक शिक्षा उत्तर प्रदेश के कानपुर और बस्ती में हुई। माध्यमिक शिक्षा नवोदय विद्यालय बस्ती, फैजाबाद और पूर्वोत्तर त्रिपुरा के धलाई जिले में हुई। अयोध्या के साकेत महाविद्यालय से स्नातक और 2009 में जेआईआईएमसी,दिल्ली से पत्रकारिता का डिप्लोमा किया। हरियाणा से पत्रकारिता आरंभ की। शिक्षा, विज्ञान, मौसम, रेलवे, प्रशासन, कृषि विभाग और मंत्रालय की रिपोर्टिंग की। इंवेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग से शिक्षा और रेलवे विभाग के कई भ्रष्टाचार का खुलासा किया। रक्षा मंत्रालय के रक्षा संवाददाता पाठयक्रम-2016 पूरा किया। इसके बाद रक्षा मामलों की पत्रकारिता शुरू कर दी। चीन, पाकिस्तान और कश्मीर मामलों पर तीक्ष्ण नजर रहती है। लेफ्टिनेंट उमर फैयाज की हत्या 2017, राइफलमैन औरंगजेब की हत्या 2018, जम्मू—कश्मीर में बदले 2018 में बदले राजनीतिक समीकरण, पुलवामा हमला 2019, कश्मीर से 370 का हटना, गलवान घाटी मुठभेड़ 2020 को बेहद करीब से जम्मू और कश्मीर में रहकर ही कवर किया। कोरोना काल 2020 में भी लददाख से नेपाल तक की यात्रा चीन के बदलते समीकरण को लेकर की। इसके साथ ही लोकसभा चुनाव 2019 में जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पंजाब की रिपोर्टिंग की। 9 नवंबर 2019 को श्रीराम जन्म भूमि अयोध्या मामले में आए फैसले की अयोध्या से कवर किया। 2022 उत्तरप्रदेश् चुनाव को सहारनपुर से सोनभद्र तक मोटर साइकिल के माध्यम से कवर किया। पत्रकारिता से इतर आनंद मणि त्रिपाठी को संगीत और पर्यटन का जबरदस्त शौक है। इन्हें किसी भी कार्य में असंभव शब्द न प्रयोग करने के लिए जाना जाता है...

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