कच्चा खनिज तेल उत्पादन में राजस्थान का दूसरा स्थान

राज्य में हाइड्रोकार्बन ( hydrocarbons ) यानी की पेट्रोलियम उत्पादों ( petroleum products ) की खोज के लिए खातेदार अपने स्तर से खातेदारी भूमि को 15 वर्षों के लिए सबलेट कर सकेंगे। इसके लिए खातेदार को भूमि रुपातंरण की अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी, अपितु केवल संबंधित तहसीलदार ( tehsildar ) को सूचित करना ही पर्याप्त होगा। इससे राज्य में हाइड्रोकार्बन खोज ( hydrocarbon exploration ) व दोहन कार्य में तेजी आएगी।

By: Narendra Kumar Solanki

Published: 04 May 2021, 06:09 PM IST

जयपुर। राज्य में हाइड्रोकार्बन यानी की पेट्रोलियम उत्पादों की खोज के लिए खातेदार अपने स्तर से खातेदारी भूमि को 15 वर्षों के लिए सबलेट कर सकेंगे। इसके लिए खातेदार को भूमि रुपातंरण की अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी, अपितु केवल संबंधित तहसीलदार को सूचित करना ही पर्याप्त होगा। इससे राज्य में हाइड्रोकार्बन खोज व दोहन कार्य में तेजी आएगी।
माइंस एवं पेट्रोलियम विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डा. सुबोध अग्रवाल ने बताया कि राज्य में इस समय 14 पेट्रोलियम एक्सप्लोरेशन लीज जारी की हुई है, जिनमें पेट्रोलियम पदार्थों की खोज का कार्य जारी है। इसी तरह से पेट्रोलियम पदार्थों के उत्पादन के लिए 13 पेट्रोलियम माइनिंग लीज जारी कर उत्पादन कार्य हो रहा है। राज्य में मुख्यत: ओएनजीसी, वेदांता और आयल इण्डिया द्वारा पेट्रोलियम पदार्थों की खोज व दोहन का कार्य किया जा रहा है। राजस्थान बॉम्बे हाई के बाद देश में घरेलू उत्पादन में दूसरे नंबर पर है। घरेलू उत्पादन में बाम्बे हाई की 40 प्रतिशत तो राजस्थान की 22 प्रतिशत हिस्सेदारी है। राज्य में बाड़मेर और जैसलमेर में क्रूड आयल का उत्पादन हो रहा है। राज्य में ओसतन प्रतिदिन एक लाख 22 हजार बैरल खनिज तेल का उत्पादन हो रहा हैं वहीं 4 से 5 मिलियन क्यूबिक मीटर गैस का उत्पादन किया जा रहा है। पिछले दिनों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भावों में लगातार सुधार होने लगा है इससे राज्य में भी खनिज तेल के उत्पादन से राजस्व में बढ़ोतरी होगी।
राज्य में पेट्रोलियम पदार्थों के उत्पादन में लगी कंपनियों के खोज व उत्पादन प्रगति की बारी-बारी से त्रैमासिक समीक्षा की जाएगी, ताकि प्रदेश में तेल व गैस के उत्पादन और राजस्व बढ़ाने की प्रभावी मोनेटरिंग हो सके। केन्द्र सरकार के पेट्रोलियम और नेचुरल गैस विभाग की ऑपरेटिव व मैनेजमेंट कमेटी में राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व होना चाहिए, जिससे राज्य में इस क्षेत्र में हो रहे खोज व उत्पादन और राज्य के हितों की प्रभावी तरीके से रखा जा सके।

Narendra Kumar Solanki Desk
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