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…तो कौनसा पक्षी बनेगा राजस्थान का राज्य पक्षी

राजस्थान सहित पूरे देश से गोडावन पक्षी की संख्या लगातार कम हो रही है

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जयपुर

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Suresh Yadav

Sep 12, 2019

...तो कौनसा पक्षी बनेगा राजस्थान का राज्य पक्षी

...तो कौनसा पक्षी बनेगा राजस्थान का राज्य पक्षी

जयपुर।
जिस प्रकार से राजस्थान सहित पूरे देश से गोडावन पक्षी की संख्या लगातार कम हो रही है उससे तो यही लगता है कि राजस्थान के इस राज्य पक्षी की जगह अब किसी अन्य पक्षी को राज्य पक्षी का दर्जा देना होगा।
एक अनुमान के अनुसार पूरे देश में सवा सौ से लेकर डेढ़ साौ तक ही गोडावन बचे हुए हैं। अगर इन्हें भी बचाने का कोई गंभीर प्रयास नहीं हुआ तो वह दिन दूर नहीं जब थार का यह सबसे खूबसूरत और शर्मीला सा पक्षी लुप्त हो जाएगा और राजस्थान को राज्य पक्षी का दर्जा देने के लिए किसी और पक्षी की तलाश करनी होगी।
अब बात करें सरकारी स्तर पर गोडावन की प्रजाति को बचाने के लिए किए गए प्रयासों की तो वह भी निराशाजनक ही रहे हैं। कई साल गुजरने के बाद भी न तो हेचरी बन पाई है और न ही रामदेवरा में अंडा संकलन केंद्र अस्तित्व में आ सका है। सोहन चिडिय़ा और हुकना के नाम से जाना जाना वाला गोडावण दिखने में शुतुरमुर्ग जैसा होता है और यह देश में उडऩे वाले पक्षियों में सबसे वजनी पक्षियों में है। ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के नाम से पुकारा जाने वाला यह सुंदर परिंदा आईयूसीएन की दुनिया भर की संकटग्रस्त प्रजातियों की रेड लिस्ट में शामिल है।
गोडावन की संख्या की बात की जाए. कुछ दशक पहले देश भर में इनकी संख्या 1000 से अधिक थी
एक अध्ययन के अनुसार 1978 में यह 745 थी जो 2001 में घटकर 600 व 2008 में 300 रह गयी। पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार अब ज्यादा से ज्यादा 150 गोडावण बचे हैं जिनमें 122 राजस्थान में और 28 पड़ोसी गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक तथा आंध्र प्रदेश में हैं. इसमें भी गोडावण अंडे अब फिलहाल केवल जैसलमेर में देते हैं।
अब बात इन पर मंडराते खतरे की। शिकारियों के अलावा इस पक्षी को सबसे बड़ा खतरा विशेष रूप से राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में लगी विंड मिलों के पंखों और वहां से गुजरने वाली हाइटेंशन तारों से है. दरअसल गोडावण की शारीरिक रचना इस तरह की होती है कि वह सीधा सामने नहीं देख पाता. शरीर भारी होने के कारण वह ज्यादा ऊंची उड़ान भी नहीं भर सकता। ऐसे में बिजली की तारें उसके लिए खतरनाक साबित हो रही हैं।
अगर हम भी नहीं चेते और कुछ मजबूत पहल नहीं की तो बचे खुचे गोडावण भी जल्द ही गायब हो जाएंगे और राजस्थान को अपने राज्य पक्षी के दर्जे के लिए कोई और पक्षी तलाशना पड़ेगा।