सुप्रीम कोर्ट ने दी अभिभावकों को राहत, नहीं देनी होगी पूरी फीस, हाईकोर्ट का आदेश रद्द

निजी स्कूलों में अध्ययनरत छात्रों के अभिभावकों को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत। 2020—21 की फीस 2019—20 की फीस से 15 प्रतिशत कम होगी, जो मार्च से अगस्त के बीच 6 किश्तों में जमा हो रही फीस में समायोजित हो जाएगी। पिछले साल 10 से 20 प्रतिशत तक फीस बढ़ा दी थी, वह भी नहीं देनी है। स्कूलों को अपने स्तर पर फीस कम करने की भी छूट।

By: pushpendra shekhawat

Published: 03 May 2021, 04:59 PM IST

जयपुर। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के निजी स्कूलों में अध्ययनरत छात्रों के अभिभावकों को बड़ी राहत दी है। न केवल शिक्षण सत्र 2020—21 में स्कूलों की ओर से बढ़ाई गई फीस का बोझ कम किया है, बल्कि शिक्षण सत्र 2019—20 से भी फीस 15 प्रतिशत कम कर दी है।


सुप्रीम कोर्ट ने 36 हजार से अधिक निजी स्कूलों के मामले में आदेश दिया है कि साल 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ाई गई फीस की वसूली तो फरवरी 2021 में ही रोक दी थी, अब शिक्षण सत्र 2019—20 से भी 15 प्रतिशत की कटौती कर दी है। यह फीस भी अगस्त तक 6 किश्तों में जमा कराने की छूट पहले से ही है। स्कूलों को अपने स्तर पर फीस कम करने की भी छूट दी गई है।


सुप्रीम कोर्ट ने यह भी दिए निर्देश
— शिक्षण सत्र 2019—20 की फीस भी 2016 के कानून के तहत तय होगी।
— फीस जमा नहीं कराने वाले बच्चों का परिणाम नहीं रुकेगा और 10—12 वीं की परीक्षा में बैठने से भी नहीं रोक पाएंगे स्कूल।
— स्कूलों को 2021—22 के लिए 2016 के कानून के तहत तय करनी होगी फीस।
— हाईकोर्ट और राज्य सरकार के स्कूलों द्वारा तय ट्यूशन फीस का 60 से 70 प्रतिशत ही ले पाने के आदेश को किया निरस्त।

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pushpendra shekhawat Desk
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