कोख में बच्चियों की मौत रोकने में राजस्थान 'अव्वल', कानून पालना में दूसरे राज्यों से निकला आगे

कोख में बच्चियों की मौत रोकने में राजस्थान 'अव्वल', कानून पालना में दूसरे राज्यों से निकला आगे

neha soni | Publish: Jun, 10 2019 05:25:02 PM (IST) Jaipur, Jaipur, Rajasthan, India

कानून पालना में दूसरे राज्यों से निकला आगे

जयपुर।
कोख में बच्चियों की मौत रोकने और गिरते लिंगानुपात को ठीक करने के लिए 24 साल पहले बनाये पीसीपीएनडीटी एक्ट का मजबूत क्रियान्वयन देश के अधिकांश राज्यों में नहीं हो पा रहा है। कानून के तहत जितने मामले दर्ज हो रहे है, उनमें दोष सिद्ध होने का प्रतिशत देश में 14 प्रतिशत से भी काम है। अधिनियम के तहत देशभर में 4202 मामलों में से अब तक 586 से अधिक में ही दोषी मिले है। देश में सर्वाधिक 701 मामले दर्ज करने और इनमें से 149 में दोष सिद्ध करने के साथ राजस्थान शीर्ष पर है। महाराष्ट्र दूसरे नंबर पर है। अवैध तरीके से ***** निर्धारण को दण्डित करने के लिए यह कानून 1994 में बनाया था। देश में वर्ष 1961 में किये पहले लिंगानुपात अध्ययन में प्रति 1000 पुरषों पर 941 महिलाएं दर्ज की गई थी। वर्ष 2001 तक यह 933 और 2011 में 943 हो गया। 2014 और 2016 के बीच 898 रहा, जो चिंताजनक स्थिति में रहा।

 

कम सजा दर चिंताजनक
हाल ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा है की महत्वपूर्ण कानून के क्रियान्वयन में दोष सिद्ध होने की कम दर चिंताजनक है। ऐसे मामलों में सजा की कम दर इसमें सामने आ रही सामाजिक चुनौतियों को दर्शा रही है।

 

अधिनियम के तहत राज्यों की स्थिति :

राज्य की दर केस सजा
राजस्थान 701 149
महाराष्ट्र 87 99
हरियाणा 313 85
गुजरात 235 18
उत्तरप्रदेश 139 20

 

 

लिंगानुपात

1961 941

1971 930

1991 927

2001 933

2011 943

2012-14 906

2013-15 900

2014-16 898

 

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